S M L

मोदी सरकार@4 साल: 2019 की राह में सबसे बड़ी चुनौती रोजगार है

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में कई बार 'पढ़ाई, कमाई और दवाई' का नारा दिया है अब देखना है कि सरकार अपना वादा कितना पूरा कर पाती है

Updated On: May 27, 2018 04:01 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

0
मोदी सरकार@4 साल: 2019 की राह में सबसे बड़ी चुनौती रोजगार है

नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल 26 मई को पूरे हो गए. 27 मई को नरेंद्र मोदी ने ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने अपने चार साल के कामकाज का ब्योरा दिया. उन्होंने बताया कि किस तरह पिछले 4 साल में उनकी सरकार ने दलितों, पिछड़ों और किसानों की हित में काम किया है.

चार साल का कार्यकाल पूरे करने पर सरकार अपनी उपलब्धियों पर चर्चा करेगी लेकिन विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा. इस साल मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनाव होने वाले हैं. वहीं अगले साल 2019 में लोकसभा चुनाव होने वाला है. ऐसे में सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि अपनी चार साल की उपलब्धियां गिनवाकर इस मौके को भुना ले. इसके लिए सरकार ने अपने मंत्रालयों को कमर कसने का निर्देश भी दिया है.

एक केंद्रीय मंत्री ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार साल पूरे होने पर सभी मंत्रालयों को रोजगार के आंकड़े जुटाने को कहा था.' रोजगार एक ऐसा मुद्दा है जिसपर सरकार की सबसे ज्यादा आलोचना होती रही है.

कब होगी रोजगार की बात?

2014 में जब नरेंद्र मोदी को जनादेश मिला था तब लोगों को उम्मीद थी कि रोजगार के नए मौके बढ़ेंगे. पीएम ने भी 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था. ये स्वरोजगार हो सकते थे. निजी या सरकारी नौकरी हो सकती थी. सबको रोजगार मुहैया कराना एक सामाजिक और राजनीतिक चुनौती थी.

देश की आबादी का 65 फीसदी हिस्सा युवाओं का है. इन युवा वोटरों को आकर्षित करने के लिए इनके हाथों में रोजगार देना जरूरी है. इन्हें रोजगार देने से पीएम मोदी को पक्के युवा वोटर मिलेंगे और दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की ग्रोथ बढ़ेगी. अगर सरकार इस चुनौती को पार कर लेती है तो ये तय है कि 2019 की लड़ाई बीजेपी के लिए आसान हो जाएगी.

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में कई बार 'पढ़ाई, कमाई और दवाई' का नारा दिया है. बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने स्कूल नर्सरी योजना और पढ़ो प्रदेश स्कीम शुरू किया है. सस्ती दवाओं के लिए 'आयुष्मान भारत योजना' शुरू किया है. रोजगार एक ऐसा मुद्दा रहा है, जिसपर सरकार की स्थिति कमजोर थी. सरकार की पूरी कोशिश है कि चार साल बाद जब वह अपनी उपलब्धियां बताना शुरू करे तो उसके पास रोजगार से जुड़े मजबूत आंकड़े रहे.

मंत्रालयों के सूत्रों के मुताबिक, उन्हें उन सभी परियोजनाओं की सूची बनाने को कहा गया था जो पिछले चार साल में शुरू की गई हैं. उन परियोजनाओं से बने रोजगार के मौकों का पूरा ब्योरा देने को कहा गया है. साथ ही जो पद खाली हैं, उनपर भर्तियां करने को कहा गया है ताकि रोजगार के आंकड़े मजबूत नजर आए.

राज्यों पर फोकस

मध्य प्रदेश जनसंपर्क की रिलीज के मुताबिक, मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने अगले कुछ महीनों में 89,000 से ज्यादा नियुक्तियां करने का फैसला किया है. सरकार की इस कोशिश से साफ है कि इसका असर इसी साल होने वाले मध्यप्रदेश चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा.

राजस्थान में भी इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. वहां भी इस साल नियुक्तियों में तेजी साफ नजर आ रही है. वसुंधरा राजे सरकार ने लंबे समय से अटके RPSC की 35,714 नियुक्तियां जल्द से जल्द कराने का निर्देश दिया है. RPSC के नतीजे आने के बाद लंबे समय से नियुक्तियां टलती आ रही थीं.

यूपी में योगी आदित्यनाथ की नई सरकार नौकरियों के मोर्चे पर काफी सजग है. युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए यूपी के सीएम की कई योजनाएं हैं. इनमें 1.40 लाख युवाओं को कौशल विकास ट्रेनिंग देकर नौकरियां दी जा रही हैं. इसके अलावा पुलिस विभाग में 1.62 लाख नियुक्तियां की जाएंगी. यूपी के सीएम ने जनवरी में ऐलान किया था कि शिक्षा के क्षेत्र में 1.37 लाख सहायक अध्यापकों की हायरिंग होगी. साथ ही मिडिल स्कूल के 20,000 टीचर नियुक्त किए जाएंगे. इतना ही नहीं, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के जरिए 60,000 भर्तियां होंगी. नौकरी के मोर्चे पर इन राज्यों की तैयारियों को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि 2019 में विपक्ष को अपनी पूरी ताकत लगानी होगी.

युवाओं को जोड़ने की कोशिश

2019 के लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. ऐसे में युवा मतदाताओं को जोड़ने का सबसे बेहतर तरीका है उन्हें रोजगार मुहैया कराना. आने वाले लोकसभा चुनाव में रोजगार का मुद्दा कितना अहम होगा उसकी बानगी कर्नाटक चुनाव के दौरान साफ नजर आया. नरेंद्र मोदी सरकार को जब कांग्रेस ने घेरने की कोशिश की तो पीएम ने उल्टे कांग्रेस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. नमो ऐप के जरिए बीजेपी के युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में 60 साल तक कांग्रेस की सत्ता रही तो क्या बेरोजगारी के लिए वह जिम्मेदार नहीं है.

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने 50 लाख और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने अपने शासन काल में 60 लाख नए रोजगार देने का दावा किया है. इस पर मोदी का जवाब था कि अगर राज्य इतनी नौकरियां दे सकता है तो क्या केंद्र नहीं दे सकता.

रोजगार के अपने आंकड़ों के समर्थन में नरेंद्र मोदी ने एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPFO)के आंकड़े पेश किए हैं. उन्होंने कहा कि हर साल ईपीएओ में बढ़ रहे एनरॉलमेंट क्या इस बात का सबूत नहीं है कि रोजगार बढ़ रहे हैं.

स्वरोजगार पर फोकस

सरकार और उनके मंत्रियों ने लगातार स्वरोजगार की बात दोहराई है. एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने पकौड़ों की दुकान खोलकर रोजी रोटी हासिल करने का जिक्र किया था. अभी पिछले हफ्ते जब देश में सरकार ने यह समूचे देश में बिजली पहुंचाने का ऐलान किया तब एकबार फिर नरेंद्र मोदी ने इसे स्वरोजगार से जोड़ा था. उन्होंने कहा था कि गांव-गांव तक बिजली पहुंचने से अब रोजगार के मौके बढ़ जाएंगे. जैसे अब कोई फ्रिज लगाकर कोल्ड ड्रिंक बेच सकता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सरकारी और निजी नौकरियों के अलावा स्वरोजगार के मौके भी बढ़े हैं. मुद्रा योजना के जरिए देशभर के करीब 12 करोड़ से ज्यादा लोग बगैर किसी गारंटी के लोन लेकर अपना काम शुरू कर चुके हैं.

स्वरोजगार पर त्रिपुरा के चीफ मिनिस्टर बिप्लव देब ने भी लोगों को सलाह दी थी कि युवाओं को सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बजाय पान की दुकान खोल लेनी चाहिए. रोजगार एक ऐसा मुद्दा था, जिससे विपक्षी पार्टियां बीजेपी को परेशान कर सकती थीं लेकिन नरेंद्र मोदी की तैयारियों को देखकर फिलहाल ऐसा मुश्किल लग रहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi