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मोदी का बिहार दौरा, बापू की धरती से नीतीश की तारीफ, बीजेपी नेताओं को नसीहत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू की कर्म भूमि चंपारण से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खूब तारीफ की.

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 10, 2018 05:12 PM IST

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मोदी का बिहार दौरा, बापू की धरती से नीतीश की तारीफ, बीजेपी नेताओं को नसीहत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू की कर्म भूमि चंपारण से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खूब तारीफ की. चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के समापन अवसर पर बोलते हुए मोदी ने कहा ‘आज के इस अवसर पर मैं नीतीश जी के धैर्य और उनके कुशल प्रशासन की प्रशंसा करना चाहता हूं. वो जिस तरह से बिहार में भ्रष्ट और असामाजिक ताकतों से लड़ रहे हैं, वह आसान नहीं है. भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके स्वच्छता अभियान को और सामाजिक बदलाव के लिए की जाने वाली उनकी कोशिशों को केंद्र सरकार का पूरा-पूरा समर्थन है.’

मोदी की तरफ से नीतीश कुमार के पक्ष में दिए गए इस बयान का बड़ा सियासी मतलब है. मोदी ने उस वक्त नीतीश की तारीफ की है, जब बिहार में एनडीए गठबंधन के भीतर खींचतान दिख रही थी. हालांकि यह खींचतान बीजेपी के बिहार के कुछ नेताओं के बयानों और उस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की असहजता के चलते थी.

अभी हाल ही में रामनवमी के मौके पर निकाले गए जुलूस के बाद बिहार के कई शहरों में सांप्रदायिक तनाव का माहौल बन गया था. भागलपुर में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत प्रकरण ने तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परेशानी बढ़ा दी थी. कहा तो यही जाने लगा था कि नीतीश कुमार पहले भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लालू के साथ रहकर ‘सफोकेशन’ महसूस कर रहे थे और अब बीजेपी के साथ आकर चौबे जी के प्रकरण के बाद ‘सफोकेशन’ महसूस करने लगे हैं.

लेकिन, अश्विनी चौबे और गिरिराज सिंह जैसे बीजेपी नेताओं पर लगाम लगाकर बीजेपी आलाकमान ने नीतीश कुमार का ही साथ दिया था. अश्विनी चौबे के बेटे की गिरफ्तारी भी हुई, तब जाकर मामला कुछ हद तक शांत हुआ.

गिरिराज सिंह

गिरिराज सिंह

लेकिन, इस पूरे घटनाक्रम के बीच नीतीश कुमार की रामविलास पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और पप्पू यादव के साथ बढ़ रही नजदीकियों को बिहार में एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक-ठाक नहीं होने के संकेत के तौर पर देखा जाने लगा था. खासतौर से नीतीश-पासवान-कुशवाहा की जोड़ी के करीब आने को एनडीए के भीतर प्रेशर ग्रुप के तौर पर ही देखा जाने लगा था. यह बीजेपी के लिए एक संदेश भी था.

लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार सरकार और उसके मुखिया के काम की सार्वजनिक मंच से प्रशंसा कर अपने विरोधियों के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी उन नेताओं को संदेश दे दिया जो अक्सर बयानबाजी कर गठबंधन में तनाव पैदा कर देते हैं.

प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से सबका साथ-सबका विकास के नारे को लेकर अपने संकल्प को दोहराया. बिहार की धरती से प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उनके विकास के काम को लेकर काफी तारीफ भी की.

हालांकि मौका ‘सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह’ अभियान का था लेकिन, इस मौके पर गांधी की कर्भूमि से गांधी के विचारों पर चलने की नसीहत देकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उन लोगों को एक संदेश दे दिया जिनके चलते कुछ दिन पहले तक वो सफोकेशन महसूस कर रहे थे. नीतीश कुमार ने कहा ‘हमें पक्का विश्वास है कि अगर गांधी जी के विचारों से नई पीढ़ी अवगत हो गई और दस से पंद्रह प्रतिशत लोगों ने भी उनके विचारों को अपना लिया तो यह समाज बदल जाएगा, देश बदल जाएगा और जो हिंसा का तनाव का वातावरण है उससे छुटकारा मिल जाएगा.’

गांधी के बताए मार्ग पर चलने की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा ‘इस चंपारण की धरती पर हम स्वच्छता का संकल्प लें और इसके साथ–साथ शांति और सद्भावना का संकल्प लें. हम सब एक-दूसरे की इज्जत करें ये सबसे बड़ी बात है, चाहे वो किसी भी धर्म को मानने वाले क्यों न हों, किसी भी बिरादरी के लोग क्यों न हों.’

नीतीश कुमार चंपारण के कार्यक्रम में अपने विरोधियों के साथ-साथ एनडीए के भीतर भी उन लोगों को भी पहले से ही संदेश देने का मन बनाकर आए थे. उनके बयान से ऐसा लग रहा था कि हर कीमत पर वो भ्रष्टाचार के साथ-साथ सांप्रदायिकता के मुद्दे पर भी वो समझौता नहीं करने वाले, हालांकि वो पहले भी यह बयान दे चुके हैं. लेकिन, प्रधानमंत्री के सामने मंच पर बीजेपी के सभी केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उनके बयान का बड़ा अर्थ निकाला जा रहा है.

उन्होंने कहा ‘प्रेम और सद्भाव के साथ ही देश आगे बढ़ सकता है, तनाव और टकराव में देश आगे नहीं बढ़ सकता है. इसलिए हम सभी लोगों को इन चीजों पर आगे बढ़ना है. इन चीजों को ध्यान में रखना है. इसी तरह हम गांधी जी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट कर सकते हैं.’

दरअसल, इस वक्त पूरे देश में सरकार के खिलाफ विपक्ष ने हल्ला बोल रखा है. सरकार की छवि एंटी दलित बनाने की हो रही है. दलितों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद के हालात ने मोदी सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है. प्रधानमंत्री भी इस बात को समझ रहे हैं, लिहाजा चंपारण से उन्होंने इस मौके पर विपक्ष पर हमला भी किया. लेकिन, नीतीश कुमार को साध कर अपने गठबंधन के किले को मजबूत करने की पूरी कोशिश भी की.

फोटो सोर्स- द बेटर इंडिया

फोटो सोर्स- द बेटर इंडिया

बीजेपी के खिलाफ हो रही लामबंदी के दौरान सहयोगी टीडीपी पहले ही साथ छोड़ चुकी है. शिवसेना ने भी अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में अगर नीतीश भी नाराज हो गए तो फिर बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लिहाजा कोशिश विपक्षी खेमे को एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक-ठाक होने का संदेश भी भेजना था.

बिहार में हुए विवाद के बाद पहली बार मोदी-नीतीश एक मंच पर थे. वो भी गांधी की कर्मभूमि में. ऐसे में उम्मीद पहले से ही की जा रही थी कि इस मौके पर प्रधानमंत्री की तरफ से ऐसा संदेश दिया जाएगा. लेकिन, बीजेपी के बिहार के सभी नेताओं की मौजूदगी में मुख्यमंत्री नीतीश की पीठ थपथपा कर मोदी ने अपने पार्टी नेताओं को भी हद में रहने की नसीहत दे दी है.

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