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नोटबंदी की 'अग्निपरीक्षा' में मोदी को मिले 90 फीसदी अंक

92 प्रतिशत लोगों का मानना था कि काला धन, भ्रष्टाचार के खिलाफ सही कदम

Updated On: Nov 24, 2016 08:57 AM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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नोटबंदी की 'अग्निपरीक्षा' में मोदी को मिले 90 फीसदी अंक

पिछले 30 घंटों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मोबाइल एप पर 5 लाख से अधिक लोगों ने भाग लेकर फैसला सुना दिया कि 90 प्रतिशत लोग काले धन के खिलाफ छेड़ी गई लड़ाई में मोदी के साथ है. 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करना मास्टर स्ट्रोक है. 92 प्रतिशत लोगों का मानना था कि इससे काला धन, भ्रष्टाचार व आतंकवाद को खत्म करने में बहुत मदद मिलेगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने ‍ट्वीटर पर सर्वे के नतीजों को साझा करते हुए कहा कि लोगों द्वारा दिए कमेंट को पढ़कर संतोष हुआ. सरकार की किसी नीति को लेकर जनता से राय लेने का यह तरीका काफी दिलचस्प है. मोदी ने सर्वे में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करके यह बताने की कोशिश की है कि नोटबंदी के सवाल पर लगभग पूरा देश उनके साथ है.

बेहतर ढंग से योजना बनती तो कम होती परेशानी 

कई टीवी चैनलों ने भी इस सवाल पर सर्वे कराकर इसी तरह के नतीजें पेश किए थे, लेकिन उनका एक निष्कर्ष यह भी था कि यदि बेहतर ढंग से योजना बनाई जाती तो जनता को कम परेशानी का सामना करना पड़ता.

टीवी चैनलों पर बैंक के सामने घंटों तक लाइन में खड़े लोगों में से 80 प्रतिशत लोगों की यही राय होती थी कि सरकार ने काले धन, भ्रष्टाचार व आतंकवाद के खिलाफ अच्छा कदम उठाया है. इसलिए प्रधानमंत्री के एप पर कराए गए इस सर्वे के नतीजे भी चौंकानेवाले नहीं है.

जाहिर है इस सर्वे में उन लोगों ने ही भाग लिया है, जिनके पास स्मार्ट मोबाइल व इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है. इस सर्वे में ग्रामीण इलाकों के कितने लोग शामिल हुए, यह स्पष्ट नहीं है. सवा अरब के देश में पांच लाख लोगों की राय के आधार पर कोई ठोस निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है.

इस सर्वे में शामिल सवालों को इस तरह से तय किया गया कि उसमें प्रशंसा करने का ही विकल्प हो. जैसे यह सवाल नहीं किया गया कि क्या इस योजना को बेहतर ढंग से लागू किया जाना था? सर्वे यदि कोई स्वतंत्र निकाय से कराया जाता तो उसकी विश्वसनीयता अधिक होती.

सर्वे में ज्यादातर समर्थक ही होते हैं शामिल 

किसी राजनीतिक दल या सरकार द्वारा किसी विषय पर सर्वे कराया जाता है तो आम तौर देखा गया है कि उसमें अधिकांशत: उनके समर्थक ही भाग लेते हैं. समर्थकों की राय को देश की राय मान लेना उचित नहीं होगा. सरकार को यदि अपनी नीतियों के बारे में लोगों की राय सर्वे के माध्यम से जानना जरुरी हो तो तीसरी एजेन्सी को यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. तीसरी एजेन्सी के सर्वे की साख कई गुना अधिक होती है.

प्रधानमंत्री के सर्वे में कुछ सवाल अनावश्यक थे, जैसे क्या देश में काले धन की समस्या है? क्या आप काले धन के खिलाफ है? इस तरह के सवालों का कोई अर्थ नहीं है. कोई भी व्यक्ति यह नहीं कहेगा कि वह काले धन के पक्ष में है.

प्रधानमंत्री द्वारा कराए गए इस सर्वे का इस्तेमाल वे अपने पक्ष में कर सकते हैं, लेकिन जनता के बीच इसकी प्रमाणिकता कम ही होगी.

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