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मेरा बेटा ज्यादा विजनरी है क्योंकि वो विदेश से पढ़कर आया है: कैलाश विजयवर्गीय

विजयवर्गीय ने कहा कि मैं मध्यप्रदेश की 229 सीटों पर तो चुनाव प्रचार करने जाउंगा लेकिन अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार नहीं करुंगा क्योंकि बेटा मुझसे ज्यादा विजनरी है

Updated On: Nov 16, 2018 10:39 PM IST

FP Staff

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मेरा बेटा ज्यादा विजनरी है क्योंकि वो विदेश से पढ़कर आया है: कैलाश विजयवर्गीय

बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे. इसके साथ उन्होंने कहा कि अब मेरी मंशा चुनाव लड़ने की नहीं है.

न्यूज़18 से खास बातचीत में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मैं 2019 का चुनाव भी नहीं लड़ूंगा. अपने बेटे आकाश के चुनाव प्रचार को लेकर उन्होंने फिर दोहराया कि मैं मध्य प्रदेश की 229 सीटों पर तो चुनाव प्रचार करुंगा, लेकिन अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार नहीं करुंगा क्योंकि मेरा बेटा मुझसे ज्यादा विजनरी है क्योंकि वो विदेश में पड़ा है और मैं सरकारी स्कूल में पड़ा हूं... वो अपने दम पर चुनाव जीतेगा.

इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय के सबसे अच्छे मित्र और दामाद ललित पोरवाल, उनके बेटे के सामने ही ताल ठोक रहे हैं. कहा जाता है कि बीजेपी नेता ललित पोरवाल जब शादी नहीं करना चाहते थे, तब कैलाश विजयवर्गीय ने ही उन्हें शादी के लिए राजी किया. इतना ही नहीं कैलाश विजयवर्गीय ने ललित पोरवाल की शादी अपनी भतीजी सपना विजयवर्गीय से करवाई.

भतीजी सपना का कन्यादान भी कैलाश विजयवर्गीय ने ही किया था. लेकिन आज वही मित्र बगावत का बिगुल बजा रहे हैं और कैलाश विजयवर्गीय पर भाई भतीजावाद, वंशवाद के आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि रिश्तेदारी का अर्थ यह नहीं होता कि किसी का गला काट दो.

वहीं अपनों से घिरे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि ललित पोरवाल इतने बड़े नेता नहीं कि उन पर कोई टिप्पणी की जाए. मैं उनसे बोलने भी नहीं जाऊंगा कि वो अपना नामांकन वापस ले लें और चुनाव न लड़ें. हालांकि विजयवर्गीय यह एलान भी कर चुके हैं कि अपने बेटे आकाश के चुनाव प्रचार के लिए नहीं जाएंगे.

रिश्तेदारों की इस लड़ाई ने कांग्रेस को भी बीजेपी पर हमला बोलने का मौका दे दे दिया है. कांग्रेस की मीडिया प्रभारी शोभा ओझा का कहना है कि चाल, चरित्र, चेहरे की बात करने वाली बीजेपी का इस चुनाव में असली चेहरा सामने आ गया है. कैलाश विजयवर्गीय अपने दामाद को ही नहीं संभाल पा रहे हैं तो पार्टी को क्या संभालेंगे.

दरअसल 35 साल से बीजेपी जुड़े रहे ललित पोरवाल चार बार पार्षद रहने के साथ ही इंदौर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी रहे हैं. वह इंदौर की तीन नंबर सीट से अरसे से टिकट की मांग कर रहे थे. इस बार उषा ठाकुर का विरोध होने के चलते उन्हें टिकट मिलने की उम्मीद थी. लेकिन बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने यहां से अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय को टिकट दिला दिया. इससे नाराज होकर वो निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं.

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