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मुजफ्फरपुर यौन शोषण मामला: 'सीबीआई जांच से क्यों बचना चाह रही है बिहार सरकार'

इस कांड में भले ही रोज नए वीभत्स खुलासे हो रहे हों लेकिन सरकार अभी सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं दिखती.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jul 25, 2018 08:36 PM IST

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मुजफ्फरपुर यौन शोषण मामला: 'सीबीआई जांच से क्यों बचना चाह रही है बिहार सरकार'

मुजफ्फरपुर के इस बालिका गृह को लेकर एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक बालिका गृह के अंदर पुलिस को एक मिनी आपरेशन रूम मिला है, जिसमें से अबॉर्शन की भारी मात्रा में दवाइयां, ग्रोथ हार्मोन इंजेक्शन और सेक्स वर्धक दवाईयां मिली हैं. बालिका गृह में कुछ तहखाने भी मिले हैं, जिनकी जानकारी वहां काम करनेवाले कुछ ही लोगों को थी. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बालिका गृह में निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों के पास संचालक द्वारा कई लड़कियों को एक साथ भेजा जाता था.

सीबीआई जांच से इंकार!

इस कांड में भले ही रोज नए वीभत्स खुलासे हो रहे हों लेकिन सरकार अभी सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं दिखती. बिहार के डीजीपी के.एस. द्विवेदी ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में सीबीआई जांच से इंकार किया है. मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि मामले में 31 मई को केस दर्ज किया गया था और 2 जून को आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पीड़ित लड़कियों को फिलहाल पटना और मोकामा में रखा गया है. उन्होंने कहा कि बाकी अन्य जगहों के मामलों में पुलिस मुख्यालय की पहल पर सीआईडी जांच कर रही है.

उन्होंने कहा कि छपरा से भी यौन शोषण के मामले में तीन में से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. एस के द्विवेदी ने कहा कि बालिका गृह में यौन शोषण मामले को लेकर सरकार काफी गंभीर है. भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बालिका गृहों में सुधार लाने के मकसद से ही सोशल ऑडिट कराया गया था.

सीबीआई जांच से क्यों बच रही सरकार

Bihar Muzaffarpur Shelter Home

(फोटो: फेसबुक से साभार)

इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाने वाले और पिछले 50 दिनों से लगातार उठाने के बाद मीडिया की सुर्खियां बनाने वाले समाज सेवी संतोष कुमार फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'देखिए मैंने 23 तारीख को ही खुदाई के दौरान एतराज जताया था कि जब 40 दिन पहले ही 164 के अंतर्गत लड़कियों का बयान आ गया था तो आपने 40 दिन के बाद खुदाई क्यों की? दूसरा, इस मामले में जो पहली एफआईआर दर्ज हुआ है, वह नामजद एफआईआर नहीं है. सुधार गृह की तीन बच्चियों के बयानों के बाद 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इन सभी आरोपियों पर नामजद एफआईआर होनी चाहिए. मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस संस्था के संचालक ब्रजेश ठाकुर की बहुत बड़ी पृष्ठभूमि है. ब्रजेश ठाकुर के 17 एनजीओ चलते हैं. वह अपना एक अखबार भी प्रकाशित करता है. बिहार सरकार की तरफ से बहुत तरह से रियायत भी लेता है. ब्रजेश ठाकुर के रिश्तेदारों का मीडिया में और सरकार में बड़ा रसूख हैं.’

संतोष कुमार आगे कहते हैं, ‘इस मामले को लेकर हमने पटना हाईकोर्ट में एक पीआईएल भी दाखिल की है. शुरुआती दिनों से इस मुद्दे को हम उठा रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर कोर्ट तक हमने इस मामले को उठाया है. मुझे अब खुशी हो रही है कि यह मामला देश के सामने आ गया है. संसद से लेकर बिहार विधानसभा में भी यह मामला उठ रहा है. मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि जब केंद्रीय गृह मंत्री संसद में कह रहे हैं कि हम सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं, बशर्ते बिहार सरकार की तरफ से हमारे पास प्रपोजल आए. फिर, बिहार सरकार सीबीआई जांच से क्यों बचना चाह रही है? यह मेरे समझ में नहीं आ रहा है. देखिए हमारी लड़ाई बहुत लंबी है हम इस मामले को कोर्ट से लेकर रोड तक ले जाएंगे.’

क्यों न कराएं सीबीआई जांच: हाईकोर्ट

इस मामले की जांच में हीलाहवाली को लेकर पटना हाईकोर्ट ने भी कड़ा रुख दिखाया है. कुछ दिन पहले पटना उच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार से पूछा है, ‘क्यों न इस घटना की जांच सीबीआई से कराई जाए?’

तेज हुआ राजनीतिक विरोध

tejaswi yadav

इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है. बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव इस घटना को लेकर नीतीश सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं. तेजस्वी यादव लगातार ट्वीट के जरिए इस मुद्दे को खूब हवा दे रहे हैं. तेजस्वी ट्वीट करते हुए कहते हैं, 'सोचिए? अगर आपके परिवार और गांव की 7 से लेकर 17 वर्षीय बहन-बेटियों के साथ सत्ता समर्थित और प्रायोजित हैवान महीनों तक दरिंदगी से दुष्कर्म करते रहें तो कैसा लगेगा? बिहार में बलात्कार की बाढ़ सी आई हुई है और सरकार साहेब है कि इसपर मुंह खोलने के लिए तैयार ही नहीं है. कुर्सी प्यारी है ना!'

जेल में हैं आरोपी

इस मामले में सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत 10 आरोपी जेल में हैं जबकि एक फरार है. राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि बालिका गृह यौन शोषण मामले में कई बड़े सफेदपोश और रसूखदार पुलिस अधिकारी रडार पर हैं. बालिका गृह का संचालक और इस मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर इस पूरे कांड का राजदार है. ब्रजेश ठाकुर और बलिकागृह के 7 अन्य कर्मचारियों के साथ बाल कल्याण समिति के सदस्य विकास कुमार एवं मुजफ्फरपुर के बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रौशन की भी गिरफ्तारी हो चुकी है. बाल कल्याण समिति जिन्हें फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट का अधिकार है, उनके अध्यक्ष दिलीप वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है.

मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िताओं ने सुनाई आपबीती

नाबालिग बच्चियों के साथ यातना एवं उत्पीड़न पर एफआईआर दर्ज होने के बाद बच्चियों ने न केवल पुलिस पदाधिकारियों के सामने बल्कि मजिस्ट्रेट के सामने भी अपनी आपबीती सुनाई थी. आपबीती में बच्चियों ने बताया था कि एक बच्ची ने जब जबरन यौन शोषण का विरोध किया तो उसे इतना मारा-पीटा गया कि उसकी वहीं बलिकागृह में ही मौत हो गई. उस नाबालिग लड़की का शव बालिका गृह के कैंपस में ही दफना दिया गया.

तीन नाबालिग बच्चियों के बयान के बाद पॉक्सो कोर्ट ने डीएम को मजिस्ट्रेट की निगरानी में वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ उस जगह की खुदाई का आदेश दिया था. प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी शिला रानी गुप्ता सहित अन्य सीनियर पुलिस ऑफिसर की निगरानी में 23 जून 2018 को न्यूज चैनलों के कैमरे के नजरों के बीच खुदाई शुरू की गई. खुदाई शुरू होने से पूर्व उन तीन बच्चियों को उस जगह को शिनाख्त करने के लिए पटना से लाया गया, जिन्होंने हफ्तों पहले इसके बारे बताया था.

जगह की निशानदेही के लिए पटना से लाई गई बच्ची सीधे उस परिसर पहुंची, जहां जेल में बंद बलिकागृह का संचालक ब्रजेश ठाकुर का आवास भी है. निशानदेही पर मिनी जेसीबी बॉबकट मशीन से खुदाई की गई. करीब चार फीट गहरी खुदाई के बाद लाश दफन किए जाने का तो साक्ष्य नही मिला. लेकिन, खुदाई के क्रम में अधिकारी गड्ढे के नीचे चले गए.

अधिकारी को नीचे जाने पर एक सुरंग दिखाई दी. यह सुरंग काफी गहरी थी लेकिन उस जगह पर शव का कोई अवशेष नहीं मिला. सुरंग के मुहाने से मिट्टी का सैंपल लेकर फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है. मजिस्ट्रेट के आदेश पर दूसरी जगह भी खुदाई की गई. वहां पर भी कुछ बरामद नहीं हो सका. इस खुदाई के लिए बिहार पुलिस ने डॉग स्क्वाड की भी मदद ली थी.

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