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शेल्टर होम केस की वजह से बदनामी झेल रहे मुजफ्फपुर की कहानी

मुजफ्फरपुर वर्तमान समय में भले ही ब्रजेश ठाकुर के नाम की कुख्याति का दंश झेल रहा हो लेकिन ये शहर आजादी के पहले और बाद बड़े नेताओं का गढ़ रहा है

FP Staff Updated On: Aug 06, 2018 04:59 PM IST

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शेल्टर होम केस की वजह से बदनामी झेल रहे मुजफ्फपुर की कहानी

बिहार का मुजफ्फरपुर जिला इस समय शेल्टर होम केस की वजह से चर्चा में है. जिले के ब्रजेश ठाकुर का नाम इस समय राष्ट्रीय मीडिया में जमकर कुख्याति पा रहा है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की परिधि के नजदीक भले ही इस जिले के बारे में लोग उतना न जानते हों लेकिन बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के रहने वाले लोग इस जिले से बखूबी वाकिफ हैं.

बिहार के उत्तरी हिस्से में पड़ने वाला मुजफ्फरपुर जिला राजधानी पटना के बाद शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र के रूप में भी मशहूर है. सन् 1875 में ब्रिटिश राज के दौरान तिरहुत जिले से अलग होकर मुजफ्फरपुर जिला पहली बार अस्तित्व में आया था. जिले का नाम ब्रिटिश राज में राजस्व अधिकारी मुजफ्फर खान के नाम पर इस शहर का नाम मुजफ्फरपुर पड़ा. आजादी के बाद 1972 में इस शहर से अलग होकर वैशाली और सीतामढ़ी जिले बने.

देश के बड़े नेताओं का गढ़ रहा है मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर वर्तमान समय में भले ही ब्रजेश ठाकुर के नाम की कुख्याति का दंश झेल रहा हो लेकिन ये शहर आजादी के पहले और बाद में बड़े नेताओं का गढ़ रहा है. महात्मा गांधी के चंपारण आंदोलन से लेकर राजेंद्र प्रसाद, आचार्य जेबी कृपलानी और आजादी के बाद जॉर्ज फर्नांडिस से इस शहर का बड़ा लगाव रहा है. इसके अलावा इस शहर से रामवृक्ष बेनीपुरी, देवकी नंदन खत्री जैसे साहित्यकार सहित कई नामचीन हस्तियां इस शहर से निकली हैं.

लीची के लिए मशहूर

muzaffarpur

मुजफ्फरपुर शहर शाही लीचियों के लिए बेहद मशहूर है. इसी वजह से इसे लीची किंगडम का उपनाम भी दिया जाता है. बिहार से बाहर निर्यात होने वाले जर्दालू आम, कतरनी चावल और मगही पान के बाद अब लीची को जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग ( इस टैग के जरिए किसी भी उत्पाद की भौगोलिक पहचान की जा सकती है.) मिलने वाला है.

महात्मा गांधी से मुन्ना शुक्ला तक का मुजफ्फरपुर

देश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी की राजनीतिक यात्रा में मुजफ्फरपुर का बेहद अहम रोल रहा है लेकिन एक क्षेत्र जो कभी अपनी बेहतरीन संस्कृति, शिक्षा और राजनीति की वजह से जाना जाता था आज के दौर में वो अपराधीकरण और पिछड़ेपन के नाम से जाना जाता है. कभी जिस शहर ने देश के राष्ट्रपिता को भी दिशा दी थी आज वो खुद अपराधियों की एसयूवी गाड़ियों तले अपनी पहचान खो रहा है. साल 2009 में पंचायतीराज मंत्रालय ने जिले को देश के 250 अतिपिछड़े जिलों में जगह दी थी.

पारिवारिक वेश्यावृत्ति का केंद्र भी है यहां

मुजफ्फरपुर जिले में चतुर्भुज स्थान नाम का ऐसा भी इलाका है जहां वेश्यावृत्ति का कलंक मां से बेटी को ढोना पड़ता है. आईनेक्स्ट में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक ये जगह मुगल काल के समय से है. यहां नेपाल और बंगाल से लड़कियां जिस्मफरोशी के लिए जाती हैं. क्या ये एक ऐसे शहर के लिए जहालत की बात नहीं हो सकती जहां देश के बड़े नेताओं ने अपना भविष्य निर्माण किया.

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