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राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल पास कराना सरकार के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पास कराने में सरकार को समस्या नहीं पेश हुई मगर राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के कारण उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है

Updated On: Dec 31, 2018 11:38 AM IST

FP Staff

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राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल पास कराना सरकार के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा को रोकने के लिए लाया गया मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक सोमवार को राज्यसभा में पेश होना है. गुरुवार को यह लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बाद भी पास हो गया था. इसके पक्ष में 245 और खिलाफ में महज 11 वोट पड़े थे. वोटिंग के दौरान कांग्रेस, AIADMK, DMK और समाजवादी पार्टी के सदस्य सदन से वॉक आउट कर गए थे.

क्या है राज्यसभा का गणित

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में एनडीए गठबंधन के 93 सदस्य हैं. इसमें से 73 बीजेपी, जेडीयू के 6, शिवसेना के 3 और आरपीआई के 1 सदस्य शामिल हैं. दूसरी तरफ यूपीए गठबंधन और विपक्ष के 112 सांसद राज्यसभा में हैं. कांग्रेस के पास 50, समाजवादी पार्टी के पास 13, टीएमसी के 13, सीपीएम के 5, एनसीपी के 4, बीएसपी के 4, सीपीआई के 2 और पीडीपी के कुल 2 सदस्य हैं.

इसके अलावा कुछ दल ऐसे भी हैं जो न सत्ता पक्ष के साथ हैं और न ही विपक्ष के साथ. यह दल समय और परिस्थितियों के हिसाब से किसी मुद्दे पर समर्थन करने और नहीं करने पर फैसला लेते हैं. ऐसे दलों के कुल 28 सांसद राज्यसभा में मौजूद हैं. जिनमें से AIADMK के 13, टीआरएस के 6 और बीजेडी के 9 सदस्य हैं. लोकसभा में तीन तलाक बिल पर वोटिंग के दौरान AIADMK के वॉक आउट करने के बाद अब सबसे अहम सवाल यह खड़ा होता है कि राज्यसभा में इस पार्टी का रुख क्या रहने वाला है.

संसद का शीतकालीन सत्र भी 5 जनवरी को खत्म हो रहा है. ऐसे में सरकार के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि राज्यसभा से इस विधेयक को पारित कराया जाए. अगर इस बार भी विधेयक राज्यसभा में अटक गया तो सरकार को अध्यादेश का सहारा लेना पड़ेगा. 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सरकार चाहेगी कि इस विधेयक को पारित करा लिया जाए और प्रचार के दौरान इसे एक उपलब्धि के तौर पर जनता के बीच मुद्दा बनाया जाए.

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