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तीन तलाक के बाद बहुविवाह पर प्रतिबंध की मांग

न्यायालय का रुख करने वाली महिलाओं ने कहा कि नए कानून में मुस्लिम पुरूषों में बहुविवाह की प्रथा को भी प्रतिबंधित करना चाहिए था, जो तीन तलाक से भी ज्यादा बदतर है

FP Staff Updated On: Jan 01, 2018 11:55 AM IST

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तीन तलाक के बाद बहुविवाह पर प्रतिबंध की मांग

ट्रिपल तलाक पर लोकसभा में बिल पास होने के बाद मुस्लिम महिलाओं ने अब बहु विवाह पर कानून लाने की मांग की है. तीन तलाक के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करने वाली महिलाओं ने कहा कि नए कानून में मुस्लिम पुरूषों में बहुविवाह की प्रथा को भी प्रतिबंधित करना चाहिए था, जो ‘‘तीन तलाक से भी ज्यादा बदतर है.’
तीन तलाक और बहुविवाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली लड़ाई से जुड़ी रहीं वकील फराह फैज, रिजवाना और रजिया को इस बात की तसल्ली है कि मौजूदा एनडीए सरकार ने कम से कम ‘एक शुरूआत’ तो की है.

उन्होंने दावा किया कि 1985 में शाह बानो मामले में भी ऐसा ही मौका आया था, लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार ने उस मौके को गंवा दिया.

तीन तलाक विधेयक के जरिए ही बंद हो बहु विवाह

फैज ने कहा, ‘एक नई शुरूआत हुई है जिससे निकाह हलाला की अनैतिक प्रथा से मुस्लिम महिलाओं का संरक्षण हो सकेगा.’ रिजवाना और रजिया ने फैज की इस टिप्पणी पर मोटे तौर पर सहमति जताई.

‘निकाह हलाला’ ऐसी प्रथा है जिसका मकसद तलाक के मामलों में कटौती करना है. इसके तहत, कोई पुरुष अपनी पूर्व पत्नी से फिर से शादी तभी कर सकता है जब वह महिला किसी और व्यक्ति से शादी करे, उससे शारीरिक संबंध बनाए और फिर तलाक ले. इसके बाद ‘इद्दत’ कही जाने वाली अलगाव की अवधि बिताए और फिर अपने पूर्व पति के पास जाए.

रिजवाना और रजिया की राय है कि सरकार को तीन तलाक वाले विधेयक के जरिए ही बहुविवाह को प्रतिबंधित कर देना चाहिए था.

विमन पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील चंद्रा राजन ने भी की तारीफ

बहुविवाह की पीड़िता 33 साल की रिजवाना ने कहा, ‘मैं इस कदम का स्वागत करती हूं, लेकिन अब पुरुष इस कदम का अनुचित फायदा उठाएंगे और खुलेआम बहुविवाह करेंगे, क्योंकि यह तो अब भी चलन में है. बहुविवाह का चलन जारी रहने से तीन तलाक के उन्मूलन मात्र से हमें कोई फायदा नहीं होने वाला.’

रजिया (24) ने सरकार की ओर से लाए गए विधेयक को सराहा और उम्मीद जताई कि उसके जैसी महिलाओं को इंसाफ मिलेगा. रजिया के पति ने बेटियों को जन्म देने पर उन्हें फोन पर ही तलाक दे दिया था.

ऑल इंडिया मुस्लिम विमन पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील चंद्रा राजन ने भी विधेयक की तारीफ की और कहा कि यह इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा.

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