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रिश्तों के एक्सप्रेस वे पर 'मुलायम' परिवार

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के उद्घाटन पर यादव परिवार एकजुट दिखा

Updated On: Nov 22, 2016 12:49 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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रिश्तों के एक्सप्रेस वे पर 'मुलायम' परिवार

यूपी की सियासत में सत्ताधारी पार्टी का प्रथम परिवार गुजरे एक महीने तक सुर्खियों में रहा. परिवार का फैमिली ड्रामा किसी राष्ट्रीय मुद्दे की तरह बहस का हिस्सा बनने लगा. पिता-पुत्र के बीच जंग छिड़ी, चाचा-भतीजे के बीच रार ठनी तो चचेर भाइयों के बीच तलवारें खिंची.

नतीजा ये हुआ कि रामगोपाल यादव जिन्हें पार्टी में सम्मान से प्रोफेसर साब कहते हैं, उन्हें ही फसाद की जड़ बताते हुए पार्टी से छह साल के लिये बाहर कर दिया गया.

लेकिन इसके पहले समाजवादी पार्टी ने अपने रजत जयंती समारोह में मंच पर माहौल खींचने की भी कोशिश की. चाचा शिवपाल के भतीजे अखिलेश ने पैर छुए ताकि जनता में संदेश जाए कि परिवार में सबकुछ ठीक है. लेकिन दोनों के बीच की दूरी रथ यात्रा में साफ दिखाई दी.

अब जब नोटबंदी ने सारे सियासी मुद्दों और पारिवारिक कलहों को पीछे छोड़ दिया है तो सपा परिवार में अजब ही एकता दिखाई दे रही है.

प्रोफेसर रामगोपाल वर्मी की पार्टी में वापसी हो गई. निष्कासन रद्द हो गया. संसद के शीतकालीन सत्र में उन्होंने सपा की तरफ से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया.

इतना ही नहीं खुद शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव के पैर भी छू डाले.

जबकि शिवपाल यादव ने ही रामगोपाल यादव पर तमाम आरोप लगाए थे तो रामगोपाल यादव ने भी पलटवार करने में देर नहीं की थी.

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर नोटबंदी के फॉर्मूले में ऐसा क्या राज है जिसकी वजह से अब पूरा परिवार एक होकर चुनाव में 'जोर लगाके हईशा' के लिये तैयार हो गया है.

देश के सबसे लंबे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के उद्घाटन पर समाजवादी पार्टी के बड़े नेता और यादव परिवार एकजुट दिखा. उद्घाटन के मौके पर शिवपाल यादव ने बड़े भाई और पार्टी नेता रामगोपाल यादव के चरण छुए. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दोनों चाचाओं के पैर छूकर सम्मान दिया तो रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव ने चाचा शिवपाल यादव के पैर छुए. माना जा सकता है कि अब चुनाव तक रिश्तों के एक्सप्रेस वे पर भी सारे मतभेदों को भुलाकर ये लोग साथ चलेंगे.

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