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मुसलमानों के नाम पर पिता मुलायम का बेटे अखिलेश पर पहला हमला

मुलायम ने सब को चुप करते हुए सीधा निशाना अखिलेश पर साधा

Faisal Fareed Updated On: Jan 16, 2017 04:27 PM IST

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मुसलमानों के नाम पर पिता मुलायम का बेटे अखिलेश पर पहला हमला

अब से कुछ देर बाद चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी के आपसी झगड़े पर अपना फैसला सुना सकता है. इसी के साथ मुलायम और अखिलेश दोनों गुट की राहें अलग हो जाएंगी.

अखिलेश यादव की वो करोड़ों की मर्सडीज वाली बस याद है आपको. जी हां वो बस अब बेकार हो गई. पिता-पुत्र के झगड़े में अब अखिलेश और मुलायम दोनों तरफ के लोग हेलिकॉप्टर की जुगाड़ में लगे हैं.

एक तरफ अखिलेश यादव ये साबित करने पर आमादा हैं कि गुरु गुड़ तो चेला शक्कर हो गया है. दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव बेटे और दुनिया को बता देना चाहते हैं कि रोटी चाहे जितनी भी बड़ी हो जाए तवे से छोटी ही रहती है.

अखिलेश बनेंगे यूपी के नरेन्द्र मोदी

अखिलेश यादव के खेमे ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है और पूरा रोड मैप लगभग तैयार है. चुनाव आयोग के आदेश के बाद जल्द ही वो अपना संभावित गठबंधन जो कि कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और अन्य छोटे दलों से होगा, उसका एलान कर सकते हैं. उसके बाद चुनावी घोषणा पत्र जिस पर लगातार काम चल रहा है, वो भी जारी हो सकता है. 1-2 दिन में अखिलेश खेमा अपने उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर सकता है.

Akhilesh Yadav in Adhiveshan

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में बोलते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

अखिलेश गुट के हिसाब से इस समय चुनाव सिर्फ अखिलेश के चेहरे पर लड़ा जायेगा. वो ऐसे हालात देख रहे हैं, जैसे 2014 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर चुनाव हुआ और भाजपा पीछे छूट गई. उनकी सोशल मीडिया पर ब्रांडिंग सिर्फ इसी तरह हो रही है, जहां सारे पोस्टर्स और कैप्शन सिर्फ अखिलेश को सामने रखकर बनाये जा रहे हैं.

अखिलेश खेमे का मानना है कि उनके पास ऐसा चेहरा है, जो जाति से ऊपर उठाकर समाज के सब वर्गों में स्वीकार्य है. जाहिर है वो चुनाव सिर्फ विकास के मुद्दे पर लड़ना चाह रहे हैं.

इधर लखनऊ में मुलायम सिंह यादव ने पहले से पेशबंदी शुरू कर दी है. मुलायम राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं. उनको मालूम है की हिंदी पट्टी की राजनीति में जाति का तड़का लगाना जरूरी है. पार्टी ऊपरी तौर पर भले न माने लेकिन टिकट बांटने से लेकर सभी फैसले अपने वोटबैंक को ध्यान में रख कर करती हैं. सपा का वोटबैंक यादव और मुसलमान हैं.  दोनों मिल कर लगभग 26 फीसदी वोट हो जाते हैं.

इसी को ध्यान में रखते हुए जब सारी निगाहें चुनाव आयोग की तरफ लगी हुई थी, मुलायम पार्टी कार्यालय पहुंचे. उनके पहुंचते ही मौजूद कार्यकर्ता पार्टी को बचाने की गुहार लगाने लगे.

सवाल मुलायम के अपने वजूद का भी

मुलायम ने सब को चुप करते हुए सीधा निशाना अखिलेश पर साधा. उन्होंने कहा कि जनता के बीच संदेश गया है कि अखिलेश मुसलमान विरोधी हैं.

Mulayam Singh Yadav

मुलायम ने दावा किया कि एक मुस्लिम को प्रदेश का पुलिस मुखिया बनाने का भी विरोध हुआ था. हमने अल्पसंख्यको के लिए बहुत काम किया और आगे भी करते रहेंगे. मेरा बेटा दूसरो के हाथों में खेल रहा है. रामगोपाल ने पार्टी को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मैंने कई बार अखिलेश को बुलाया लेकिन वो नहीं आया, एक बार आया तो कुछ बात शुरू होने से पहले चला गया.

मुलायम ने सीधा तीर मुसलमानों पर चलाया. उनको मालूम है कि लगभग 19 परसेंट मुसलमान अगर अखिलेश से मुंह मोड़ ले तो वो चुनाव में कहीं नहीं टिक पाएंगे. ये भी जानते हैं की मुसलमान को अपने पाले में रखना उनके खुद के लिए भी बहुत जरूरी है. आखिर सवाल उनके भी राजनीतिक भविष्य का है.

यूपी चुनाव में मुसलमान किस पर करेंगे भरोसा?

मुलायम का मुसलमानों पर बयान इस वजह से और महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इससे वो मुसलमानों को अपने तरफ रोकना चाहते हैं. क्योंकि दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती मुसलमानों को अपने पाले में करने के लिए बहुत आक्रामक रवैया अपना चुकी हैं.

बसपा ने 97 टिकट भी मुसलमानों को दिए हैं. ऐसे में मुलायम ने सीधा हमला बोलते हुए अखिलेश के लिए परेशानी खड़ी कर दी है. इससे पहले मुलायम खुले तौर पर ये भी कह चुके हैं कि रामगोपाल चार बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिले हैं ताकि वो अपने बेटे और बहू को बचा सकें.

मुलायम ने मुसलमानों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि जिस भाजपा को हराने के लिए वो सपा को वोट देते आये हैं, यादव परिवार का वो अहम सदस्य भाजपा से सांठ-गांठ कर रहा है.

मुलायम ने कार्यकर्ताओं से ये भी कहा की सिंबल चाहे कुछ भी हो आप लोग साथ दीजिये. मुलायम ने यहां तक कहा की वो अखिलेश के खिलाफ चुनाव भी लड़ने को तैयार हैं.

इधर कुछ दिनों से अखिलेश के जसवंतनगर से चुनाव लड़ने की सूचनाएं आ रही हैं. जसवंतनगर मुलायम की पारंपरिक सीट रही है और सांसद बनने पर वहां से शिवपाल यादव को लड़ाया था.

देखना होगा की अखिलेश अब अपने पारंपरिक वोट बैंक मुसलमानों को बचाने के लिए क्या करते हैं.

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