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मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू, फिर लटक सकता है ‘भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल 2018’!

Updated On: Jul 19, 2018 06:54 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू,  फिर लटक सकता है ‘भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल 2018’!

संसद का मॉनसून सत्र बुधवार से शुरू होने जा रहा है. मोदी सरकार के इस कार्यकाल का यह आखिरी मॉनसून सत्र होगा. इस मॉनसून सत्र में मोदी सरकार ऐसे कई लंबित बिलों को पारित कराने को लेकर फिक्रमंद है, जो पिछले सत्र में  किसी कारणवश पारित नहीं हो सका था.

खासकर बैंकों से कर्ज लेकर या आर्थिक अपराध कर विदेश भागने वाले भगोड़ों की संपत्ति जब्त करने से लेकर कर्ज नहीं चुका पाने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ भी कठोर कानून वाले बिल पारित कराए जाने हैं. मोदी सरकार भ्रष्टाचार निरोधी कानून में संशोधन जैसे कई और महत्पपूर्ण बिलों को भी इसी सत्र में हर हालत में पास कराना चाहती है.

पिछले दिनों ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आर्थिक अपराध करके देश से भागने वालों के खिलाफ सख्त कानून के लिए एक विधेयक की मंजूरी दी थी. इस विधेयक में विदेश भागने वालों को अदालत में दोषी ठहराए बिना ही उसकी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है. देश को इस सख्त कानून की जरूरत विजय माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे आर्थिक अपराधियों को देश से बाहर भाग जाने के बाद आन पड़ी है.

इस विधेयक को पिछले बजट सत्र के दूसरे हिस्से में ही पेश किया जाना था, लेकिन बजट सत्र हंगामेदार रहने के कारण इस बिल को पारित नहीं किया जा सका. क्योंकि, अगले साल देश में लोकसभा चुनाव होने हैं और मोदी सरकार हर हालत में इस बिल को पास करा कर जनता के बीच जाना चाहेगी.

क्या है इस बिल के प्रावधान?

इस विधेयक में ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि अगर कोई व्यक्ति घोटाला करके विदेश भाग जाता है और देश नहीं लौटता है तो उसकी संपत्ति बिना अदालत गए  जब्त की जा सकती है. यह प्रावधान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला या कर्ज लेने वाले पर लागू होगा. विधेयक में प्रावधान है कि भगोड़े की संपत्ति को बेचकर कर्ज देने वाले बैंकों को चुकाया जाएगा. साथ ही इस तरह के आर्थिक अपराधों की सुनवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की जाएगी.

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अब सवाल यह उठता है कि क्या वाकई मोदी सरकार संसद के मॉनसून सत्र में इन महत्वपूर्ण बिलों को पारित करा लेगी या फिर यह सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा. पिछला बजट सत्र भी 23 दिनों तक चला था लेकिन कोई काम नहीं हो पाया था. पिछले बजट सत्र के दौरान लोकसभा में सिर्फ पांच बिल ही पास हो सके थे.

पिछला बजट सत्र के दौरान राज्यसभा की स्थिति और भी बुरी थी. उस वक्त ग्रेच्युटी बिल के अलावा कोई बिल पास नहीं हो सका था. तब राज्यसभा सिर्फ दो दिन ही ठीक से चल पाई थी. राज्यसभा से रिटायर हो रहे सदस्यों की विदाई और नए सदस्यों के शपथ के दिन ही सदन की कार्यवाही ठीक से चल पाई थी. बाकी वक्त सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे में कट गया.

क्या होगा आगे?

देश में विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे आर्थिक अपराध करने वालों के खिलाफ ‘भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल 2018’ पिछली बार पास नहीं हो पाया था लेकिन सांसदों ने अपने मतलब का वेतन भत्ता बढ़ाने वाला बिल जरूर पास करा लिया था.

सरकार ने सांसदों के वेतन भत्ता वाले बिल को वित्त विधेयक बना कर बिना बहस के ही पास करा लिया था. यहीं नहीं कांग्रेस और बीजेपी दोनों का फायदा पहुंचाने वाला फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन  रेगुलेशन एक्ट में भी पिछले दरवाजे से बदलाव कर दिया गया था. इसको पास कराने के लिए भी सरकार ने वित्त विधेयक का सहारा लिया. इन दोनों विधेयक के पास होने पर मीडिया ने जब संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार से उस समय सवाल किया था तो उनको जवाब था, ‘आपलोगों को कांग्रेस से इस बारे में पूछना चाहिए, क्योंकि सरकार हर मामले में बहस को तैयार रहती है.’

अब सवाल यह उठता है कि सियासी पार्टियों के इस दोहरे चरित्र को कैसे समझा जाए? पिछले कुछ सालों से संसद में विरोध प्रदर्शन कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं. बीते कुछ सालों की तरह इस साल भी अगर संसद में गतिरोध जारी रहा तो यह देश की जनता के लिए ससंद की एक अलग छवि बन कर सामने आएगी.

13 हजार 500 करोड़ का पीएनबी घोटाले का वांछित भगोड़ा नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को भारत वापसी को लेकर भारतीय जांच एजेंसियां प्रयासरत है. दोनों भगोड़ों को लेकर भारतीय जांच एजेंसियां दूसरे देशों की जांच एजेंसियों के संपर्क में भी है. हाल ही में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक टीम सिंगापुर पहुंची है. ऐसे में अगर संसद से भगोड़ा बिल पास कर दिया जाता है तो नीरव मोदी, ललित मोदी, विजय माल्या और मेहुल चोकसी जैसे लोगों पर और शिकंजा कस जाएगा.

सरकार को देना होगा जवाब?

संसद के मॉनसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले कांग्रेस ने कहा है कि वह सरकार से हर मुद्दे पर जवाब मांगेगी. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘हमारी सोमवार को मीटिंग हुई है उसमें तय हुआ है कि जो बुनियादी सवाल हैं चाहे वह किसानों के मुद्दे हों या फिर रोजगार का मुद्दा हो या फिर SC/ST एक्ट का मामला हो या फिर नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे लोगों का देश छोड़ कर भागने का , उसको सदन में उठाएंगे.

बैंकों के 13 हजार 500 करोड़ रुपए चुना लगाने वाला व्यक्ति कैसे देश छोड़ कर भाग गया? पिछले सत्र में भी विपक्ष की तरफ से तो कोई बाधा नहीं डाली गई थी. सदन में जो विरोध हुए वह सरकार की अपनी नीतियों के कारण हुई. सरकार को सपोर्ट कर रही एआईडीएमके ने ही सदन को बाधित किया था. उस समय सरकार के ही एक और सहयोगी दल टीडीपी ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने के मुद्दे पर सरकार का विरोध किया था. सरकार के ही सहयोगी दल कावेरी मुद्दे और SC/ST एक्ट को लेकर सदन के कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे.’

प्रदीप टम्टा आगे कहते हैं, 'देखिए पिछले सत्र में तो सरकार के ही सहयोगियों ने सदन को नहीं चलने दिया और आरोप कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों पर लगा दिया. कांग्रेस तो चाहती है कि सदन ठीक से चले. नीरव मोदी का मामला हो या ललित मोदी का मामला हो या फिर विजय माल्या का अगर सरकार कुछ करना चाहती है तो हम उसका स्वागत करेंगे.'

उन्होंने कहा, 'जहां तक सदन को बाधित करने का सवाल है तो मैं अनंत कुमार से यह पूछना चाहता हूं कि पिछले सत्र के दौरान किस पार्टी के सांसद बेल में जा कर हंगामा कर रहे थे? क्या वह कांग्रेस पार्टी के सांसद थे या प्रतिपक्ष के थे? पिछले सत्र में तो एआईडीएमके और टीडीपी के सांसदों ने ही तो सरकार के नीतियों का विरोध किया था. हमलोग तो सदन को चलाना चाहते हैं. काला धन का मामला हो या फिर नीरव मोदी, विजय माल्या और ललित मोदी का मामला हो हमलोगों ने पिछली बार इन मुद्दों पर नोटिस दिया था, लेकिन सरकार ही बहस नहीं करना चाहती है. आखिर सरकार की जवाबदेही बनती तो है कि इस मामले पर वह सदन को बताए.’

कुलमिलाकर विपक्ष की तरफ से खासकर आर्थिक मोर्चों, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि मोदी सरकार तमाम मोर्चों पर फिसड्डी साबित हुई है. विपक्षी पार्टियों के नेताओं का साफ कहना है कि मोदी सरकार खासकर आर्थिक मोर्चों पर अपनी नाकामयबी छुपाना चाह रही है. मोदी सरकार आर्थिक अपराध में शामिल विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी समेत 31 कारोबारियों को अब तक देश में लाने में विफल साबित हुई है.

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