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पूरे देश में बने गोहत्या के खिलाफ कानून लेकिन गोरक्षा के नाम पर हिंसा गलत: भागवत

भागवत ने कहा गोसंरक्षण को इस तरह बढ़ावा दिया जाना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस उद्देश्य से जुड़ें

Bhasha Updated On: Apr 09, 2017 05:46 PM IST

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पूरे देश में बने गोहत्या के खिलाफ कानून लेकिन गोरक्षा के नाम पर हिंसा गलत: भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को गोरक्षक समूहों द्वारा की गई हिंसा की आलोचना की और कहा कि इससे उद्देश्य की ‘बदनामी’ होती है. उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट किया कि संघ पूरे देश में गोहत्या के खिलाफ कानून चाहता है.

गोहत्या को एक ‘बुराई’ करार देते हुए इसे हर हाल में दूर किए जाने पर जोर देते हुए उन्होंने ज्यादा लोगों को इस अभियान से जोड़कर गोसंरक्षण प्रयास को और आगे ले जाने की वकालत की.

भगवान महावीर की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत का यह बयान ऐसे वक्त पर आया जब बीजेपी शासित राज्य राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों द्वारा पीट-पीटकर एक युवक की हत्या कर दी गई थी. इसको लेकर विपक्षी दलों ने सरकार की घेराबंदी की है और भगवा पार्टी को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है.

गोरक्षकों के प्रयासों की बदनामी होगी

भागवत ने कहा, ‘गायों की रक्षा करते हुए ऐसा कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए जिससे कुछ लोगों की मान्यता आहत हो. ऐसा कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए जो हिंसक हो. इससे सिर्फ गोरक्षकों के प्रयासों की बदनामी होगी...गायों के संरक्षण का काम कानूनों और संविधान का सम्मान करते हुये किया जाना चाहिये.’

संघ प्रमुख ने कहा कि कई राज्यों में जहां संघ कार्यकर्ता या संघ की पृष्ठभूमि वाले सत्ता में हैं उन्होंने ऐसा कानून बनाया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरी सरकारें भी स्थानीय ‘जटिलताओं’ से निपटते हुए ऐसा कानून बनाएंगी. कई पूर्वोत्तर राज्यों में गोहत्या प्रतिबंधित नहीं है.

इनमें से वो राज्य भी शामिल हैं जहां बीजेपी सत्ता में है, जबकि केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गोमांस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है जहां बीजेपी मजबूत सियासी ताकत के तौर पर उभरने के लिये काम कर रही है.

MohanBhagwat

संघ प्रमुख ने सुझाव दिया कि राजनीतिक जटिलताओं की वजह से हर जगह ऐसा कानून लागू करने में समय लगेगा .

उन्होंने कहा, ‘ऐसा कोई कानून नहीं हो सकता जो कहे आप हिंसा कीजिए. यह असंभव है.’ भागवत ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि जहां संघ कार्यकर्ता सत्ता में हैं, वो स्थानीय जटिलताओं से निपट कर इस दिशा में काम करेंगे.’

उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण को इस तरह बढ़ावा दिया जाना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस उद्देश्य से जुड़ें और ऐसा करने के लिए उनकी प्रशंसा हो.

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