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नोटबैन: बीजेपी के सांसद-विधायक देंगे हिसाब

बीजेपी के जनप्रतिनिधि अपने खातों के लेन-देन की पूरी जानकारी पार्टी अध्यक्ष को सौंपेंगे.

Updated On: Nov 30, 2016 10:00 AM IST

Amitesh Amitesh

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नोटबैन: बीजेपी के सांसद-विधायक देंगे हिसाब

मोदी को कड़क चाय पिलाने की आदत रही है. लेकिन, यह कड़वी चाय अब मोदी के अपनों को भी पीनी पड़ रही है. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में अपने आप को सबसे बड़े नायक के रूप में स्थापित करने के बाद मोदी ने अपनी पार्टी के सांसदों और विधायकों को भी अपने खाते का हिसाब देने को कहा है.

बीजेपी संसदीय दल की बैठक में उन्होंने साफ कर दिया कि बीजेपी के सभी सांसदों और विधायकों को नोटबंदी के बाद के सारे लेन-देन का हिसाब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को सौंपना होगा.

अब बीजेपी के जनप्रतिनिधि 9 नवंबर से 31 दिसंबर तक अपने खातों के लेन-देन की पूरी जानकारी पार्टी अध्यक्ष को 1 जनवरी को सौंपेंगे.

बीजेपी संसदीय दल की बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार के मुताबिक

प्रधानमंत्री ने संसदीय दल की बैठक में कहा कि हमारी लड़ाई कालेधन के खिलाफ है. आईटी कानून में संशोधन कालेधन को सफेद करने के लिए नहीं बल्कि, गरीबों के लूटे हुए धन को वसूल करने के लिए है. प्रधानमंत्री ने कहा कि हम देश को कैशलेस सोसायटी बनाना चाहते हैं, जिसके लिए सभी को सहयोग करना चाहिए.

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की नीयत पर सवाल पर सवाल खडे़ किए जाते रहे हैं. राहुल से लेकर ममता तक सबका आरोप यही रहा है कि बीजेपी नेताओं को नोटबंदी के बारे में जानकारी पहले से ही थी.

लेकिन अब अपने सांसदों से लेन-देन का हिसाब मांग कर मोदी ने शुचिता का आदर्श पेश करने की एक कोशिश की है. मोदी को लगता है कि उनके इस कदम से विपक्षी दलों के ऊपर भी एक नैतिक दवाब बनेगा.

संसदीय दल की बैठक में मौजूद बिहार के उजियारपुर से बीजेपी सांसद नित्यानंद राय ने फर्स्टपोस्ट हिंदी के साथ बातचीत में कहा कि

मोदी जी का यह कदम स्वागत योग्य है. इससे पारदर्शिता बढे़गी और राजनीति में एक नई मिसाल पेश होगी. नित्यानंद राय इसे अनुकरणीय कदम बता रहे हैं.

nityanand rai

बीजेपी सांसदों और विधायकों से हिसाब मांग कर मोदी की कोशिश विपक्षी दलों के आरोप की धार को कुंद करने की है.

नोटबंदी के बाद विपक्ष के जन आक्रोश दिवस को जिस तरीके से मोदी ने भ्रष्टाचार बंद बनाम भारत बंद , कालाधन बंद बनाम भारत बंद के रूप में तब्दील कर दिया उसके बाद विपक्षी दलों के हमले की धार कम हो गई है. महाराष्ट्र और गुजरात के स्थानीय चुनाव के नतीजों ने मोदी को एक नई ताकत दी है. इसे नोटबंदी पर जनता के समर्थन की मुहर मानकर मोदी ने अपना रूख और सख्त कर लिया है.

मोदी की पूरी कोशिश है कि अपनेआप को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़े आईकॉन के रूप में पेश करें. मोदी ने काफी हद तक इसमें सफलता हासिल भी कर ली है.

फिलहाल इतना तो कहा जा सकता है कि मोदी अपनों की नकेल कसकर औरों की मुहिम की हवा निकालने में लगे हैं.

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