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मोदी की घोषणाएं: किसी बड़े राहत की उम्मीद नहीं

प्रधानमंत्री मोदी के पूरे संबोधन में नोटबंदी से उपजी तकलीफों और दबाबों का स्पष्ट असर दिखाई पड़ता है.

Updated On: Dec 31, 2016 10:29 PM IST

Rajesh Raparia Rajesh Raparia
वरिष्ठ पत्र​कार और आर्थिक मामलों के जानकार

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मोदी की घोषणाएं: किसी बड़े राहत की उम्मीद नहीं

मोदी जी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर जिन देशवासियों में उत्तेजना और व्यग्रता थी. उनको निराशा ही हाथ लगी होगी.

प्रधानमंत्री मोदी के पूरे संबोधन में नोटबंदी से उपजी तकलीफों और दबाबों का स्पष्ट असर दिखाई पड़ता है.

अपने संबोधन में मोदी जी ने जिन तमाम राहतों की घोषणा की है. उनमें से एक-आध को छोड़कर कोई भी नई नहीं है.

मसलन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कर्ज में 3-4 फीसदी देने की घोषणा है. वह भी पुरानी है. बस उसमें सूद की सीमा बढाई गई है.

लेकिन बड़ा सवाल यहां यह है कि मकानों के लिए कर्ज लेने वालों की संख्या में अब तक कोई विशेष उछल नहीं देखा गया है. साथ ही इसका कोई असर रियल एस्टेट बिजनेस से जुड़े लगभग 150 उद्योगों पर नहीं दिखाई दे रहा है.

किसानों के थोड़ा मजदूरों के लिए कुछ भी नहीं

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कृषि के महत्त्व को माना है. उन्होंने रबी और खरीफ की फसल के लिए किसानों ने जो कर्ज लिए हैं. उन पर 60 दिन की ब्याज माफी की घोषणा की है. भले ही यह ऊंट के मुंह में जीरा हो लेकिन स्वागतयोग्य है.

नोटबंदी का सबसे बड़ा असर छोटे कारोबारियों, किसानों और मेहनतकश लोगों पर ही पड़ा है. जिनमें दिहाड़ी के मजदूरों की संख्या सबसे ज्यादा है. लेकिन उनकी मदद या राहत के  लिए कोई घोषणा प्रधानमंत्री ने नहीं की है.

ताज्जुब की बात यह है कि इनफॉर्मल सेक्टर, जहां नकदी में कारोबार  सबसे ज्यादा होता है. जिन पर सबसे बड़ा आरोप ये है कि वे कच्चे पक्के का काम सबसे ज्यादा करते हैं. उनके आंसू पोछने के लिए भी प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ राहतों की घोषणा की है.

मसलन पहले छोटे कारोबारियों को एक करोड़ का लोन लेने के लिए  क्रेडिट गारंटी स्कीम थी. अब इसकी सीमा बढ़ा कर 2 करोड़ रुपये कर दी गई है.

हालांकि यह स्कीम मूल रूप से बहुत पुरानी है. पर अधिकांश ब्रांच मैनेजरों को इस स्कीम का पता नहीं है या वे लोग इस स्कीम के तहत लोन देना नहीं चाहते हैं. सरकार की तरफ से भी इसका गहन प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है. असल में यह किताबों में दर्ज एक स्कीम है.

क्रेडिट लिमिट बढ़ने से छोटे कारोबारियों को राहत 

नोटबंदी के चलते छोटे कारोबारियों की बहुत बड़ी रकम बैंकों में जमा हो गई है. इस वजह से उनकी कैश क्रेडिट लिमिट बढ़ाने की घोषणा भी प्रधानमंत्री ने की है. इस घोषणा को वास्तव में बैंकों द्वारा अमल किया गया तो छोटे व्यापारियों को नकदी के संकट से कुछ राहत मिल सकती है.

वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी राहत देने की कोशिश प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में की है. 7.5 लाख की जमा राशियों पर 8 फीसदी की सुरक्षित ब्याज देने की बात प्रधानमंत्री ने की है.

Modi Speech

पीटीआई

लेकिन यह सुविधा बुजुर्गों को चिढ़ाने जैसी है. सब जानते हैं कि हमारे देश में सामाजिक सुरक्षा न के बराबर हैं. और ब्याज दरों के घटने का सबसे ज्यादा असर इन्हीं फिक्स इनकम ग्रुप के बुजुर्गों पर पड़ता है.

बेहतर यह होता कि प्रधानमंत्री इस सुरक्षित ब्याज को रेपो रेट से जोड़ देते और कम से कम तीन फीसदी ब्याज इसके ऊपर से देते. तब वास्तव में कुछ बड़ी राहत इस वर्ग को मिल सकती थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सरकारी कर्मचारियों का भी जिक्र किया और टिप्पणी की है. मोदी ने जो भी राहतें दी हैं, उनका क्रियान्वयन भी सरकारी कर्मचारियों को ही करना है.नोटबंदी के दौरान इनकी मुस्तैदी सबके सामने है.

जनधन खाते में जमा बड़ी धन राशियों पर दिमाग लगाने की बात मोदी ने बड़े जोरशोर से करी थी. लेकिन उसका जिक्र करना अपने संबोधन में वे एक सिरे से भूल गए.यह आश्चर्यजनक है.

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली का काम कुछ हलका कर दिया है.असल में सरकार की घोषणाएं बजट में ही की जाती रही हैं.

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