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मॉनसून सत्र के बाद मोदी कैबिनेट में होगा बड़ा फेरबदल!

यह इस मोदी कैबिनेट का आखिरी फेरबदल भी हो सकता है

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 18, 2017 05:41 PM IST

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मॉनसून सत्र के बाद मोदी कैबिनेट में होगा बड़ा फेरबदल!

वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के बाद अब कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है. फिलहाल वेंकैया नायडू के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी और शहरी विकास मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को दे दिया गया है.

लेकिन, संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के वक्त नए लोगों की इंट्री हो सकती है, जो खाली जगह की भरपाई कर सकते हैं.

इसके पहले मनोहर पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के बाद अप्रैल से ही रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त काम वित्त मंत्री अरूण जेटली संभाल रहे है. चीन और पाकिस्तान के साथ चल रहे तनाव के इस वक्त देश को एक फुल-टाइम रक्षा मंत्री की सख्त जरूरत भी है.

इस वक्त चीन के साथ सिक्किम से सटी सीमा पर डोकलाम इलाके में तनातनी चल रही है. दूसरी तरफ पाकिस्तान के सीमा पर फायरिंग के बाद माहौल लगातार खराब है. वहीं कश्मीर के हालात भी ऐसे नहीं हैं कि सरकार चैन की नींद सो सके. ऐसे में मनोहर पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक रक्षा मंत्री की तलाश है.

रक्षा मंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री को एक ऐसे व्यक्ति की तलाश होगी जो न सिर्फ ईमानदार हो बल्कि उनको भरोसेमंद भी हो. रक्षा सौदों को लेकर हमेशा विवाद होता रहा है. ऐसे में रक्षा मंत्री के तौर पर किसी भरोसेमंद की नियुक्ति संभव है.

कश्मीर के हालात और चीन-पाकिस्तान के साथ मौजूदा हालात के बाद विपक्ष की तरफ से भी कई बार फुल-टाइम रक्षा मंत्री न होने को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं.

अनिल दवे के निधन के बाद पर्यावरण मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन संभाल रहे हैं. पर्यावरण मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग के लिए भी एक मंत्री की जरूरत है.

arun jaitly

फिलहाल अरुण जेटली रक्षा मंत्रालय भी संभाल रहे हैं.

मोदी सरकार का संभावित आखिरी विस्तार

माना जा रहा है कि मॉनसून सत्र के बाद कैबिनेट विस्तार किया जाएगा, जिसमें नए मंत्रियों को शामिल कर खाली पदों को भरा जाएगा.

वेंकैया नायडू के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी दक्षिण भारत के किसी नेता को मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है. क्योंकि अगले दो सालों में दक्षिण के तीन राज्यों में चुनाव होने हैं और उसके पहले बीजेपी दक्षिण भारत में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है.

मोदी सरकार के तीन साल होने के बाद सरकार अपने काम का प्रचार भी कर रही है. लेकिन, इस दौरान मंत्रालयों और मंत्रियों के काम की समीक्षा भी की जा रही है. नजर हर विभाग पर है और उन विभागों में हो रहे काम के आधार पर मंत्रियों की रैंकिंग भी की जा रही है.

ऐसे में इस बात की संभावना काफी बढ़ गई है कि मौजूदा कैबिनेट विस्तार के दौरान कई नए मंत्रियों को शामिल भी किया जाएगा, तो कई मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी बड़े पैमाने पर होगा.

कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं. खासतौर से 75 की उम्र पार कर चुके कलराज मिश्रा को लेकर इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

इसके पहले दो बार मोदी कैबिनेट का विस्तार हो चुका है. पहली बार सरकार बनने के छह महीने बाद ही नवंबर 2014 में ही हुआ था, जबकि, दूसरी बार करीब एक साल पहले जुलाई 2016 में कैबिनेट विस्तार हुआ था.

यूपी चुनाव से पहले हुए इस कैबिनेट विस्तार में कई मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई थी तो कई नए चेहरों को जगह भी मिली थी. लेकिन, अब होनेवाले तीसरे कैबिनेट विस्तार को मोदी सरकार का आखिरी कैबिनेट विस्तार माना जा रहा है.

कैबिनेट विस्तार के बाद मुश्किल से डेढ़ साल का ही वक्त बचेगा जिसमें सरकार को अपने बेहतर कामकाज और बेहतर छवि के साथ जनता के दरबार में जाना होगा.

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