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समान सोच वाली विपक्षी पार्टियां साथ आएं : मिलिंद देवड़ा

देवड़ा ने कहा कि एनसीपी प्रमुख को महाराष्ट्र की राजनीति की ‘अच्छी खासी जानकारी’ है जो केंद्र स्तर पर कांग्रेस के साथ काम कर सकती हैं

Updated On: Apr 23, 2018 04:50 PM IST

Bhasha

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समान सोच वाली विपक्षी पार्टियां साथ आएं : मिलिंद देवड़ा

कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी और एनसीपी अगले साल होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से काफी पहले सीटों की साझीदारी को लेकर समझौते की घोषणा करेगी. उन्होंने सत्तारूढ़ बीजेपी  को हराने के लिए ‘समान सोच वाली’ अन्य पार्टियों को भी गठबंधन में शामिल करने की वकालत की.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में एक ‘छोटा तबका’ है जो मानता है कि शिवसेना को भी संभावित गठबंधन में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, पार्टी के बहुमत की राय है कि यह विकल्प नहीं है.

देवड़ा ने कहा कि एनसीपी केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर कांग्रेस की महत्वपूर्ण साझीदार है.

उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं मानता कि कांग्रेस में इस बात को लेकर कोई संदेह है कि क्या हमें एनसीपी के साथ गठबंधन करना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि हम काफी पहले सीटों की साझीदारी की घोषणा करने में सक्षम होंगे.’ महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव अगले साल के अंत में होने वाले हैं.

शरद पवार की सराहना करते हुए देवड़ा ने कहा कि एनसीपी प्रमुख को महाराष्ट्र की राजनीति की ‘अच्छी खासी जानकारी’ है और विभिन्न पार्टियों के साथ उनके निजी रिश्ते हैं, जो केंद्र स्तर पर कांग्रेस के साथ काम कर सकती हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘खासतौर पर महाराष्ट्र में हमें दूसरी पार्टियों को भी देखना चाहिए.’

किसी भी पार्टी का नाम लिए बिना देवड़ा ने कहा, ‘अन्य पार्टियां हो सकती हैं--निश्चित तौर पर अन्य पार्टियां हैं, समान विचारों वाली पार्टियां हैं, जिनकी महाराष्ट्र में मतदाताओं के बीच विश्वसनीयता है और जो देश की दशा को लेकर चिंतित हैं, उन्हें साथ लेने और गठबंधन में शामिल करने पर हमें विचार करना चाहिए.’

शिवसेना के साथ गठबंधन पर क्या बोले देवड़ा

यह पूछे जाने पर कि बीजेपी से नाखुश चल रही शिवसेना को क्या गठबंधन में शामिल किया जा सकता है तो देवड़ा ने कहा, ‘पार्टी में एक छोटा तबका है जो मानता है कि वह संभव हो सकता है लेकिन पार्टी का बड़ा हिस्सा मानता है कि यह विकल्प भी नहीं है. उनका मानना है कि शिवसेना और कांग्रेस की विचारधारा में काफी अंतर है.’

उन्होंने कहा कि शिवसेना जिस तरह की राजनीति का प्रतिनिधित्व करती है, कांग्रेस उसका समर्थन नहीं करती है.

शिवसेना और एमएनएस नजरिए में लाए बदलाव

देवड़ा ने कहा, ‘शिवसेना और एमएनएस वो पार्टियां हैं जो मानती हैं कि अगर आप उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय, मारवाड़ी, जैन हैं तो आप महाराष्ट्रियन नहीं हैं. कांग्रेस में आम राय है कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘ अगर ये पार्टियां अपने नजरिए में बदलाव करना शुरू कर दें तो कौन जानता है, कुछ भी संभव है. उसके लिए उन पार्टियों को लंबी दूरी तय करनी होगी और उन्हें उन आधारों को छोड़ना होगा, जिनपर उनका गठन किया गया था.’

यह पूछे जाने पर कि अगर शिवसेना या राज ठाकरे नीत एमएनएस खुद में बदलाव करती है तो क्या उनके साथ गठबंधन करने पर कांग्रेस विचार कर सकती है तो उन्होंने कहा, ‘अगर वे अपना रंग बदलते हैं तो हमें देखना होगा कि क्या वे इसको लेकर गंभीर हैं, या वे राजनैतिक अवसरवाद के लिए ऐसा कर रहे हैं. फिलहाल, मैं इन पार्टियों में बदलाव की कोई मंशा नहीं देखता हूं.’

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को चुनाव से पहले अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर देनी चाहिए तो देवड़ा ने कहा कि महाराष्ट्र और दिल्ली में पार्टी नेताओं और गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच इसपर चर्चा की आवश्यकता होगी.

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