S M L

DMK ने की SC/ST एक्ट को संविधान की नौवीं सूची में शामिल करने की मांग

संविधान की नौवीं सूची में शामिल कानून को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है

Updated On: Apr 16, 2018 08:03 PM IST

Bhasha

0
DMK ने की SC/ST एक्ट को संविधान की नौवीं सूची में शामिल करने की मांग

DMK ने SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के हाल के आदेश के मद्देजर इस कानून को संविधान की नौवीं सूची के तहत लाने की मांग की, जिसकी न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है.

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की ओर से भी इसी तरह के प्रस्ताव को लेकर टिप्पणी करने के कुछ दिनों बाद द्रमुक के कार्यवाहक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा कानून को ‘कमजोर’ करने से दबे-कुचले लोगों में रोष व्याप्त हुआ है.

संविधान की नौवीं सूची में शामिल कानून को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सालों पहले कहा था कि न्यायिक समीक्षा संविधान की बुनियादी विशिष्टता है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि नौवीं सूची के तहत आने वाले कानूनों की पड़ताल की जा सकती है अगर वे मौलिक अधिकारों या संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हैं.

यहां शीर्ष अदालत के आदेश को बदलने की मांग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा, ‘केंद्र को एससी / एसटी अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए या कानून को संविधान की नौवीं सूची में शामिल करना चाहिए और अच्छा माहौल बनाना चाहिए.’

उन्होंने चेताया भी कि अगर केंद्र यह नहीं करता है तो आंदोलन जारी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अपने आदेश में एसटी / एसटी अधिनियम के कड़े प्रावधानों को कमजोर कर दिया था जो तुरंत गिरफ्तारी के संबंध में हैं.

केंद्र ने आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है जबकि मुद्दे को लेकर दो अप्रैल हिंसा हुई थी.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi