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मिजोरम चुनाव 2018: हाथ में एक सीट नहीं फिर भी राज्य पर कब्जे की कोशिश में BJP

जीत की अपनी संभावनाओं को धार देने के लिए बीजेपी ने ऐलान किया है कि मिजोरम में किंगमेकर की भूमिका निभाने के लिए पार्टी के चुनाव-प्रभारी का पद हेमंत बिस्वा शर्मा संभालेंगे

Updated On: Nov 21, 2018 09:23 PM IST

Biswa Kalyan Purkayastha

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मिजोरम चुनाव 2018: हाथ में एक सीट नहीं फिर भी राज्य पर कब्जे की कोशिश में BJP

मिजोरम में 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और इस चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) यहां जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है क्योंकि पूर्वोत्तर में यही एकमात्र राज्य है जहां बीजेपी की नहीं बल्कि किसी अन्य पार्टी की सरकार है. सूबे में कांग्रेस पार्टी की सरकार को सत्ता-विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है और ऐसा माहौल बीजेपी के लिए मिजोरम में ज्यादा सीटें जीतने में मददगार है- बशर्ते क्षेत्रीय स्तर पर असरदार मिजो नेशनल फ्रंट उसके आड़े नहीं आए.

जीत की अपनी संभावनाओं को धार देने के लिए बीजेपी ने ऐलान किया है कि मिजोरम में किंगमेकर की भूमिका निभाने के लिए पार्टी के चुनाव-प्रभारी का पद हेमंत बिस्वा शर्मा संभालेंगे. हेमंत बिस्वा शर्मा ने ही इस साल चंद महीने पहले त्रिपुरा में एक अरसे से कायम वामपंथी धड़े को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था. आत्मविश्वास से लबरेज हेमंत बिस्वा शर्मा का कहना है कि 'बीजेपी इस साल पूर्ण बहुमत से शासन में आ रही है.'

राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं ने सूबे में चुनाव प्रचार करते हुए मिजोरम को मुख्यधारा में लाने का वादा किया है. इस हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू सूबे का दौरा करने वाले हैं. गृहमंत्री राजनाथ सिंह पिछले हफ्ते तीन निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं.

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शुक्रवार को ममित जिले में चुनाव प्रचार करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर सड़कों की बदहाली को लेकर तंज कसते हुए कहा कि:'यहां रोड पर गड्ढा है या गड्ढे पर रोड समझ में नहीं आता.'

गृहमंत्री ने आश्वासन दिया कि बीजेपी सत्ता में आई तो छह महीने के भीतर सभी सड़कों का विकास हो जाएगा. उन्होंने कहा कि स्थानीय सरकार हमें सूबे का विकास करने में बाधा पहुंचाती है. अगर हम सत्ता में आए तो हमारे लिए योजनाओं को लागू करना आसान होगा. केंद्र सरकार की ओर से मिजोरम को अधिकतम फंड जारी करने का वादा करते हुए राजनाथ सिंह ने यह वचन भी दिया कि सूबे में परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि का विकास किया जाएगा. ममित जिले में तकरीबन 3000 लोग बीजेपी की रैली में आए थे जिसे गृहमंत्री ने ‘विशाल भीड़’ करार दिया.

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के वक्त यानी 20 नवंबर को बीजेपी अपना मेनिफेस्टो जारी कर सकती है. विकास के एजेंडे पर जोर देने के अलावा बीजेपी सूबे में इस आरोप का भी जोरदार मुकाबला कर रही है कि वो ईसाई-बहुल समाज में ‘हिंदुत्व’ की पैठ करना चाहती है.

Amit Shah roadshow in Bikaner Bikaner: BJP President Amit Shah greets his supporters during a roadshow, in Bikaner, Wednesday, Nov. 21, 2018. (PTI Photo) (PTI11_21_2018_000127B)

शर्मा ने कहा कि 'हमारी पार्टी ईसाई-बहुल राज्य मेघालय में सत्ता में है. इससे बात स्पष्ट हो जाती है. कांग्रेस के पास हमारे विकास के एजेंडे का कोई जवाब नहीं है इसलिए कांग्रेस हमारे ऊपर हिंदुत्व का कार्ड खेलने का आरोप लगा रही है.'

मिजो लोगों की राय दो खेमों में बंटी हुई है. एक तरफ वो लोग हैं जो सोचते हैं कि बीजेपी को सत्ता में आने का मौका देना चाहिए क्योंकि ये लोग सूबे के विकास में एमएनएफ तथा कांग्रेस के नाकाम रहने से उकता चुके हैं तो दूसरी तरफ वो लोग हैं जो सोचते हैं कि मिजोरम सरीखे नृजातीय(एथनिक) समाज के लिए राष्ट्रीय स्तर की दक्षिणपंथी पार्टी को विकल्प के रुप में चुनना ठीक नहीं.

सूबे में एथनिक समूहों पर जोर

मिजोरम में कई नृजातीय समुदाय हैं और इस सूबे की सीमा असम, त्रिपुरा और मणिपुर से मिलती है. इसका मतलब हुआ कि मिजो बहुल इस राज्य में मतदाताओं की एक बड़ी तादाद मणिपुरी, चकमा, ब्रू, हमर, रियांग और अन्य नृजातीय समुदाय के लोगों की है.

सूबे में बीजेपी के प्रभारी पवन शर्मा का कहना है कि 'त्रिपुरा के बाद मिजोरम बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल राज्य है क्योंकि यहां कई नृजातीय समुदाय रहते हैं. भाषा एक बहुत बड़ी बाधा है और हम दूसरे राज्यों से अपने नेताओं को बुलाकर इस बाधा को पार करने की कोशिश कर रहे हैं.'

पड़ोसी राज्य असम, त्रिपुरा तथा मणिपुर से आए स्टार कंपेनर मिजोरम के कई निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव-प्रचार कर रहे हैं. इनमें हेमंत बिस्वा शर्मा, मणिपुर के कृषिमंत्री वी. हंगखानलियन और त्रिपुरा के एमएलए प्रमोद रियांग का नाम शामिल है.

BJP Panchayat election manifesto release Guwahati: Assam Chief Minister Sarbananda Sonowal flanked by NEDA Chairman Himanta Biswa Sarma and BJP State President Ranjit Das release BJP Panchayat election manifesto, in Guwahati, Wednesday, Nov. 21, 2018. (PTI Photo) (PTI11_21_2018_000121B)

बहरहाल, पार्टी के वरिष्ठ नेता भले ही दावा कर रहे हों कि मिजोरम में अगली सरकार बीजेपी बनायेगी लेकिन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की राय है कि पार्टी को बहुत कम सीटों पर जीत हासिल होगी.

हांगखानलियन अपने पांच सदस्यों की टोली के साथ उस सारे इलाके में चुनाव प्रचार करेंगे जहां मणिपुरी मतदाता हैं. उनका कहना है कि 'मिजोरम में बीजेपी के लिए पूर्ण बहुमत लाना बहुत मुश्किल है. लेकिन हमलोग अपने लोगों तक पहुंच बना रहे हैं. विकास की कमी की वजह से विभिन्न समुदायों में झगड़ा है. हम लोगों को समझाने में लगे हैं कि वे झगड़ों की बात से हटकर समग्र विकास के मुद्दे पर एकजुट हों. विकास लाने का सबसे बेहतर तरीका है बीजेपी को वोट करना.' उन्होंने दावा किया कि पार्टी विधानसभा की 40 सीटों में कम से कम पांच सीटें जरुर जीतेगी. बीजेपी के स्थानीय चुनाव-प्रचारकों का दावा है कि ममित, कोलासिब, लुंगलेई और लांगतलाई जैसे सीमावर्ती जिलों में बयार बीजेपी के पक्ष में बह रही है.

इंजीनियर खावल्हिंग लालरिमाविया डंपा निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार हैं. उन्होंने बताया कि सूबा बुनियादी ढांचे के विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है और बीजेपी इस कमी को दूर कर सकती है. इससे विकास में मदद मिलेगी. उनका कहना था, 'हमारे राज्य में प्राकृतिक संसाधनों की कमीं नहीं लेकिन इसके बावजूद हमलोग अभावों का जीवन जी रहे हैं क्योंकि कोई बुनियादी ढांचा, परिवहन, पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज तथा अन्य जरुरी सुविधाएं नहीं हैं. बीजेपी केंद्र में कई सालों तक सत्ता में रहने वाली है और मैं उस शक्ति से हाथ मिलाना चाहता हूं जो यहां विकास लाए.'

हेमंत बिस्वा शर्मा सूबे की राजधानी आइजॉल से चुनाव-प्रचार की देखरेख कर रहे हैं. उन्होंने असम से आयी अपनी टोली को सूबे के सभी कोनो में जाने का आदेश दिया है. असम के वन मंत्री परिमल शुक्लावैद्या और अन्य वरिष्ठ नेता जल्द ही ‘मिशन मिजोरम’ में शिरकत करने वाले हैं. यह मिशन पार्टी ने राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए चलाया गया है.

परिमल शुक्लावैद्या ने फोन पर बताया कि 'दक्षिण असम के तीन जिले मिजोरम के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहां ज्यादातर लोग इन्हीं इलाकों पर व्यापार-व्यवसाय के लिए निर्भर हैं. बांग्लाभाषी लोगों के साथ कुछ मनमुटाव है लेकिन दोनों राज्यों के बीच कायम व्यापार-संबंधों पर ऐसी किसी बात से बाधा नहीं आती. अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो यह मंजर और बेहतर होगा.'

मिजोरम में पांच बार चुनाव लड़ने के बावजूद बीजेपी को इस राज्य में एक भी सीट नसीब नहीं हो सकी है. पार्टी का 2013 में वोट-शेयर 3 प्रतिशत का था जो उस वक्त तक का अधिकतम है.

BJP Central Election Committee (CEC) meeting New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and BJP President Amit Shah during the BJP Central Election Committee (CEC) meeting for the upcoming Assembly elections in 5 states, at BJP headquarters in New Delhi on Saturday, Oct 20,2018.(PTI Photo /Subhav Shukla) (PTI10_20_2018_000115B)

कांग्रेस एमएनएफ का आरोप- फूड डालना चाहती है बीजेपी

कांग्रेस और एमएनएफ के नेताओं का आरोप है कि बीजेपी चुनावी फायदे के लिए समाज में फूट डालना चाहती है. पूर्व मुख्यमंत्री और एमएनएफ के प्रमुख जोरमथंगा ने हाल में दावा किया था कि बीजेपी हिंदुत्व का एजेंडा लाकर ईसाई-बहुल मिजोरम में शांति भंग कर रही है और इसी कारण एमएनएफ ने बीजेपी के साथ चुनाव के लिए गठबंधन करने में परहेज किया. बहरहाल, उन्होंने कांग्रेस के इस राय से असहमति जताई कि बीजेपी सूबे में सत्ता में आई तो गिरजाघरों की गरिमा को चोट पहुंचायेगी. जोरमथंगा ने कहा कि' बीजेपी देश के एक बड़े हिस्से पर शासन कर रही है. इसने कहीं भी गिरजाघरों की गरिमा को नुकसान नहीं पहुंचाया है.'

आइजॉल में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का दावा है कि बीजेपी का ध्यान सूबे के उन इलाकों पर है जहां गैर-ईसाई रहते हैं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि बीजेपी कैडर आधारित पार्टी है और उसका एजेंडा लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का होता है. कांग्रेस के चुनाव-प्रचार में लगे कार्यकर्ताओं का कहना था कि बीजेपी गैर-मिजो और गैर-ईसाई आबादी तक पहुंच रही है और बहुत संभव है कि इस आबादी के बीच वह हिंदुत्व के एजेंडे को बढ़ावा दे रही हो.

कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख तथा मिजोरम में चुनाव-प्रचार के प्रभारी सजरिता लइतफलांग ने बीजेपी की यह कहते हुए आलोचना की कि पार्टी फूट डालो-राज करो की नीति पर चल रही है. सजरिता का कहना था कि 'बीजेपी यहां के शांतिपूर्ण वातावरण को हिंदुत्व की विचारधारा के जरिए दूषित कर रही है. लेकिन मिजोरम के लोगों को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता जो वो बीजेपी को वोट करें, बीजेपी सूबे से खाली हाथ जाएगी. कांग्रेस इस साल कम से कम 37 सीट जीतेगी.'

जोरमथंगा का मानना है कि बीजेपी मिजोरम जैसे राज्य के मन-मिजाज के माफिक नहीं है. दो दफे मुख्यमंत्री रह चुके जोरमथंगा ने कहा कि' बीजेपी के पास एक स्पष्ट विचारधारा है जो देश के बाकी हिस्सों के लिए ठीक है लेकिन मिजोरम उनके बस की बात नहीं. पूर्वोत्तर में वो लोग जो काम कर रहे हैं, हम उससे खुश हैं लेकिन मिजोरम को हम खुद ही अपने प्रयासों के बूते विकास के रास्ते पर ले जाने में सक्षम हैं.'

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जोरमथंगा के इस विचार से कि मिजो जनता खुद में सक्षम है, नेशनल पीपुल्स पार्टी के डॉ. लालरिना ने सहमति जताते हुए आरोप लगाया कि कोई भी राष्ट्रीय दल इस जनजातीय प्रदेश में बदलाव लाने में सक्षम नहीं. उनका दावा है कि 'मिजोरम और मेघालय सरीखे राज्यों में विकास तभी हो सकता है जब स्थानीय पार्टियां चुनाव जीतकर सत्ता में आएं. बीजेपी और कांग्रेस के नेता हमारे मुद्दे नहीं समझ सकते और लोग इस बात को जानते हैं. हमने मेघालय में 19 सीटें जीतीं और मिजोरम में हमलोग कम से कम 9 सीट जीतेंगे.

हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाने के आरोपों को खारिज करते हुए त्रिपुरा के विधायक प्रमोद रियांग ने कहा कि 'कांग्रेस और अन्य दल बीजेपी के विकास के एजेंडे से मुकाबला करने में मुश्किल का सामना कर रहे हैं. हमारी पार्टी पर त्रिपुरा में युगों पुरानी वामपंथी पार्टियों ने भी ऐसे ही आरोप लगाए थे. लेकिन अब के वक्त में मतदाता कहीं ज्यादा समझदार हैं. मतदाताओं ने त्रिपुरा में विकास को चुना और वे मिजोरम में भी यही करने जा रहे हैं.'

बीजेपी पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वो चुनाव बाद के समय में पिछले दरवाजे से विधायकों को खरीद-फरोख्त करेगी. लेकिन बीजेपी के स्थानीय नेता अभी यह कह सकने की स्थिति में नहीं हैं कि पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी और मिजोरम में कमल किस तरह खिलेगा.

(लेखक स्वतंत्र-लेखन करते हैं और जमीनी स्तर के संवाददाताओं के अखिल भारतीय नेटवर्क 101Reporters.com के सदस्य हैं)

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