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तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्रांतिकारी और ऐतिहासिक: योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आधी आबादी के सशक्तिकरण के साथ-साथ न्याय और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देने से जुड़ा मुद्दा है

Bhasha Updated On: Aug 22, 2017 04:41 PM IST

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तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्रांतिकारी और ऐतिहासिक: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक साथ लगातार तीन बार तलाक बोलने की प्रथा को असंवैधानिक करार देने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक करार दिया है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खैर मकदम करते हुए कहा, ‘यह एक ऐतिहासिक, प्रगतिशील और आधी आबादी को न्याय के साथ-साथ उनके सशक्तीकरण का मार्ग प्रशस्त करने वाला स्वागत योग्य निर्णय है.’

उन्होंने कहा कि 'एक बड़ी आबादी न्याय और अपने अधिकारों से वंचित थी. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा बहुमत के आधार पर दिया गया यह फैसला, उस बड़ी आबादी को न्याय और सशक्तीकरण की ओर ले जाएगा. हम विश्वास करते हैं कि अतिशीघ्र इस दिशा में और भी प्रभावी कदम उठेंगे.’

अभियान में शामिल महिलाओं को भी दी बधाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आधी आबादी के सशक्तिकरण के साथ-साथ न्याय और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देने से जुड़ा मुद्दा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गौर किया और अपना ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला दिया है. मुझे लगता है कि भविष्य में कोई देर नहीं होगी और समय सीमा के अंदर इस समस्या का निदान निकलेगा. मैं इस पूरे अभियान को आगे बढ़ाने वाली प्रगतिशील बहनों को बधाई देता हूं.

राज्य सरकार के प्रवक्ता और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का आदेश ऐतिहासिक है. अब न्यायालय ने भी तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है.’

उन्होंने कहा, ‘बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहले से ही मत है कि लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए. इस निर्णय से हमारे देश की धर्मनिरपेक्ष बुनियाद और मजबूत होगी.’

प्रदेश की बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए ‘अपने अधिकार के लिए लड़ रही मुस्लिम महिलाओं’ के साथ खड़े होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की पीठ ने मंगलवार को बहुमत से फैसला सुनाते हुए मुसलमानों में एक-साथ लगातार तीन बार तलाक बोलकर पत्नी को छोड़ने की प्रथा को ‘अवैध’, ‘गैर कानूनी’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया है. साथ ही न्यायालय ने केंद्र से इस संबंध में कानून बनाने को कहा है.

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