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मेघालय चुनाव 2018: जीत के लिए पार्टियां ले रही हैं संगीत का सहारा

बीजेपी को उम्मीद है कि मजाव की प्रसिद्धि से पार्टी के चुनाव-चिह्न की चमक कुछ और बढ़ेगी

Updated On: Feb 26, 2018 11:28 AM IST

Ayswarya Murthy

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मेघालय चुनाव 2018: जीत के लिए पार्टियां ले रही हैं संगीत का सहारा

राहुल गांधी ने हाल के अपने चुनाव-प्रचार अभियान के दौरान कहा कि भारत मेघालय के बिना पूर्ण नहीं है. राहुल का कहना था कि 'आप भारत की आत्मा में जोश और रंग भरते हैं. आप संगीत जगाते हैं.'

मेघालय के समाज और संस्कृति में संगीत की भूमिका जानी-पहचानी है. संगीत का जोर लुप्त होती जा रही लोक-संस्कृति और समुदाय-परंपरा में भी देख सकते हैं और मशहूर रॉक म्यूजिक के जलसों में भी. मेघालय के लोगों का एक और पसंदीदा शगल है. चुनाव (पिछले दो विधानसभा चुनावों में यहां 80 फीसदी तक मतदान हुआ) और संगीत की सुरलहरियां अक्सर चुनावी तरंग से घुल-मिल जाती हैं.

आप चाहें तो यह भी मान सकते हैं कि लोग गीत के बोल सुनकर वोट करने को निकलते हैं. राजनीतिक दल चुनाव-प्रचार के गीत बजाते हैं, यहां राजनीतिक रैलियां लोगों के लिए कंधे पर गिटार टांग लेने के एक बहाने का काम करती है. मौसम चुनावों का हो तो डीजे और बैंड उम्मीदवारों के संग-साथ चला करते हैं. मेघालय में गीत-संगीत का आलम यह है कि चुनाव आयोग भी लोगों से वोट डालने की अपील करने के लिए संगीत समारोह और वीडियो का सहारा लेता है. मेघालय के निवासियों को जितना संगीत एकजुट कर सकता है उतना कुछ और नहीं.

इस साल सूबे में बीजेपी ने अपने साथ लोऊ मजाव को जोड़ा है. लोऊ मजाव क्षेत्रीय स्तर पर संगीत की जानी-मानी हस्ती हैं. उन्हें भूपेन हजारिका अवार्ड मिल चुका है. बीजेपी ने लोऊ को अपने प्रचार अभियान का गीत गाने का जिम्मा सौंपा है. उन्हें जोवाई और तूरा में होने वाले चुनावी संगीत-समारोहों में हिस्सा लेना है.

लेकिन मजाव की ख्याति बॉब डिलन की याद में किए जाने वाले उनके शो के कारण है. डिलन लंबे समय से उनके प्रेरणा-स्रोत हैं लेकिन मजाव का मिजाज सियासी कत्तई नहीं. वो कहते हैं, 'यह तो मेरा काम है और मैं एक कलाकार हूं. मेरे मन में किसी भी राजनीतिक दल के लिए पूर्वाग्रह नहीं है. मैं सियासत की बातें एकदम नहीं समझता और जो थोड़ी-बहुत बातें समझ में आती भी हैं उनसे सियासत से मेरा मन और दूर भागता है.'

बहरहाल, मजाव चाहे जो कहें लेकिन बीजेपी की उम्मीद है कि उनकी प्रसिद्धि से पार्टी के चुनाव-चिह्न की चमक कुछ और बढ़ेगी. मजाव बीजेपी के लिए जो गीत गाते हैं उसके बोल का हिंदी में अनुवाद करें तो वह कुछ यूं होगा: 'वो वक्त करीब आ पहुंचा है जब हुंकार भरनी होगी. वो वक्त करीब आ पहुंचा है जब बदलाव की बयार हर तरफ बहेगी. मेरे लिए कमल का फूल मुस्कुराएगा.'

ऐसे में लोग अगर उनसे पूछने लगे हैं कि क्या आप बीजेपी में शामिल हो गए हैं तो इसमें अचरज की कोई बात नहीं. वो पलटकर विस्मय में पूछते हैं, 'आपने क्या कहा, मैं किस पार्टी में शामिल हो गया हूं?'. वो फोन पर अपनी पुरकशिश और दोस्ताना आवाज में बताते हैं, 'मैं शायद ही कभी अपना वोट डालने जाता हूं'. लेकिन मजाव को ऐसे सवालों से दो-चार होने की आदत हो गई है. उनका म्यूजिक करियर दशकों से जारी है और इस दौरान उन्होंने कई राजनीतिक अवसरों पर ‘परफार्मेंस’ दी है. वो बताते हैं, 'पहली दफे मैंने एक क्षेत्रीय पार्टी के जलसे में गाया था. यह कोई 15-20 साल पहले की बात है और वहां लोगों ने मुझसे पूछना शुरू किया कि क्या मैंने पार्टी ज्वाइन कर लिया है. मैंने कहा कि ना, मैं यहां बस अपने संगीत से लोगों का मनोरंजन करने आया हूं.'

आज, बरसों गुजरने के बाद भी उनका मकसद पहले जैसा ही है. वो कहते हैं, अब भी मेरा किसी तरफ सियास झुकाव नहीं है. मैं बस इतना चाहता हूं कि अपने संगीत से लोगों में आनंद और उत्साह जगाऊं.'

फैन या फॉलोअर?

लेकिन क्या उनके हजारों फैन को यह नहीं लगता कि उन्होंने किसी पार्टी का पल्ला थाम लिया है? मजाव राजनीति और संगीत को अलग रखने पर जोर डालते हुए कहते हैं, 'अगर किसी का दिमाग ठीक है तो वह म्यूजिक कंसर्ट में म्यूजिक के लिए जाएगा और इसके बाद मतदान केंद्र में वोट डालने के लिए पहुंचेगा.'

मजाव की बातों से लैम्फांग एम साइमलिह सहमत हैं. साइमलिह परंपरागत खासी संगीत गाते हैं (वो सोल और जाज भी गाते हैं). उन्हें सियासी मंच पर पर्फार्मेंस का पहला मौका ‘सेलिब्रेशन ऑफ पीस’ नाम के जलसे में मिला. इसे कांग्रेस ने आयोजित किया था और इस संगीत समारोह में राहुल गांधी और मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने भाग लिया था.

साइमलिह कहते हैं, 'मैं निजी तौर पर किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करता. संगीत समारोह अमन के लिए था और एक कलाकार के रूप में मेरी जिम्मेवारी बनती है कि मैं अमन के पैगाम को अपने संगीत के जरिए समर्थन दूं. संगीत-समारोह की उस शाम जो लोग मौजूद थे उनके मन में क्या चल रहा था- इसकी जानकारी मुझे नहीं है. अगर वो सचमुच मेरे फैन हैं तो वो मेरे संगीत को सुनेंगे और उस संदेश को भी जो मैं अपने संगीत के सहारे लोगों को सुना रहा हूं.'

साइमलिह ने कहा, 'अगर नेशनल पीपुल्स पार्टी मुझे एकता का संदेश देने के लिए अपने संगीत-समारोह में बुलाती है तो मैं वहां जरुर जाऊंगा क्योंकि मैं एकता के पक्ष में हूं. मेरा झुकाव किसी भी राजनीतिक दल के प्रति नहीं है और मेरे फैंस जानते हैं कि मैं जो कुछ करता हूं वह सब संगीत के लिए होता है. इसके अलावे एक बात यह भी है कि वोटिंग के मामले में मेघालय में लोग बहुत आजाद-ख्याल और तेज हैं. चाहे कोई कुछ भी हो उसके लिए वो अपना मत नहीं बदलते.'

बहरहाल, मेघालय के कुछ कलाकारों ने दुविधा की स्थिति से किनारा कर तटस्थ रहने का फैसला किया है. समरसॉल्ट एक मल्टी-जॉनर बैंड है. इसके गीत ज्यादतर खासी और अंग्रेजी भाषा में होते हैं. समरसॉल्ट की अगुवाई कितूपर किट सांगपिलांग के हाथ में है. सांगपिलांग का जोर इस बात पर है कि लोग नैतिकता के एतबार से वोट डालें. वो कहते हैं, 'इसी कारण मैंने चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है. यहां मेघालय में ऐसे लोग हैं जो सोच की इस लकीर पर सोचते हैं और हमलोग ऐसे लोगों के साथ हैं.'

समरसॉल्ट ने स्थानीय स्तर के कई कलाकारों को अपने साथ जोड़ा और चुनाव आयोग के लिए जन-जागरण का एक वीडियो निकाला है. वीडियो में लोगों से मतदाता सूची मे नाम लिखवाने और वोट डालने की अपील की गई है साथ ही यह भी कहा गया है कि वोट सोच-समझकर और पूरी जिम्मेदारी की भावना से डालें.

चुनाव से 3 दिन पहले 24 फरवरी के दिन समरसॉल्ट ने मेघालय में संगीत की दुनिया की नामी-गिरामी हस्तियों के साथ चुनाव आयोग के रॉक द बोट विद् युअर वोट नाम के कंसर्ट में हिस्सा लिया. सांगपिलांग कहते हैं, 'हमें राजनीतिक पार्टियों से बुलावे मिले लेकिन हमने ना कह दिया. हम दलगत राजनीति के खिलाफ नहीं हैं. अगर कलाकार किसी पार्टी में यकीन करता है तो फिर इस बात पर क्या कहा जा सकता है. बेशक कलाकार का अधिकार है, वह चाहे जिस पार्टी के लिए गाए. लेकिन हम किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ना चाहते. हम चाहते हैं, सभी लोग हमारी बात सुनें. जहां तक समरसॉल्ट का सवाल है, हम अपने नजरिए में इसी किस्म की सियासी साफगोई देखना चाहते हैं. कला लोकतंत्र का पांचवां स्तंभ है और कलाकार के रुप में हम राजनीतिक रुझानों से ऊपर दिखना चाहते हैं.'

क्या फैंस समरसॉल्ट के रुख से सहमत हैं, क्या समरसॉल्ट का रुख उनकी नजर में आया है? सांगपिलांग बताते हैं, 'हम अपने फैंस की राय का सम्मान करते हैं और कुछ फैंस से बात करने का हमें मौका मिला है जो हमारे रुख से सहमत थे'. लेकिन दलगत राजनीति से ऊपर दिखने की इस नीयत को हाल ही में कड़े इम्तहान से गुजरना पड़ा. समरसॉल्ट ने सार्वजनिक तौर पर बीजेपी के एक उम्मीदवार पर आरोप मढ़ा कि वह बिना अनुमति के उनका एक गीत अपने चुनाव-प्रचार में इस्तेमाल कर रहा है.

समरसॉल्ट का बयान (फोटो: समरसॉल्ट)

समरसॉल्ट का बयान (फोटो: समरसॉल्ट)

बाद में समरसॉल्ट ने एक और बयान जारी किया और कहा कि किसी और पार्टी का भी उम्मीदवार होता तो हम ऐसा ही करते- 'दुर्भाग्य से संदेश यह गया कि हम किसी खास पार्टी को अपनी आलोचना का निशाना बना रहा है लेकिन कोई और भी होता तो हम ऐसा ही जवाब देते.'

समरलॉल्ट का दूसरा बयान- (तस्वीर-समरलॉल्ट )

समरलॉल्ट का दूसरा बयान- (तस्वीर-समरलॉल्ट )

इस सिलसिले की सबसे जरूरी बात मजाव कहते हैं, वो चुनाव-प्रक्रिया में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी को देख बहुत खुश हैं- ' मैं इसे यूं देखता हूं कि कलाकारों को अभी काम मिल रहा है और यह बात मेरे लिए बहुत मायने रखती है. अगर 1001 पार्टियां हों, उन्हें 1001 नारों और गीतों की जरुरत हो और वो 1001 कलाकारों, संगीतकारों और गायकों को काम पर रख सकें तो उनकी (कलाकारों की) जीविका के एतबार से यह अच्छा है. हमारे लिए यह बहुत मुश्किल है क्योंकि हम हिंदी गीत नहीं गाते जहां हम ज्यादा पैसे कमा सकते हैं. मुझे स्टेज पर परफार्म करते 52 साल हो गए लेकिन जीविका की जद्दोजहद अब भी खत्म नहीं हुई. इस तरह (चुनाव-प्रचार में हिस्सेदारी के जरिए) हरेक को कुछ ना कुछ मिल जाता है और रोज की रोटी का जुगाड़ हो जाता है.'

लेकिन मेघालय के कलाकार चुनावों से क्या उम्मीद रखते हैं ?

किट सांगपिलांग का कहना है, 'मैं चाहता हूं उम्मीदवार एक-दूसरे के बारे में कम और मुद्दों के बारे में ज्यादा बोलें: कीचड़ उछालना कम हो और व्यावहारिक समाधान की बातें ज्यादा. लेकिन मैं कुछ निराश हूं. मैं देखता हूं कि मेघालय के लोग युवा हैं, उनमें बहुत प्रतिभा और ऊर्जा है. हमारे लिए उम्मीद एक ही है कि हम सरकार पर अपनी निर्भरता खत्म करें. व्यावहारिक तौर पर हम चाहते हैं कि कला-संस्कृति के लिए अच्छी नीतियां बने, शिक्षा, युवा, रोजगार, टिकाऊ पर्यटन तथा बिजली की बेहतर व्यवस्था हो.'

लोऊ मजाउ कहते हैं, 'मैं चाहता हूं लोग हंसे और मुस्कुराएं, खुद में खुश रहें. बेशक आपके नारे हैं, आप किसी उम्मीदवार और पार्टी के तरफदार हैं लेकिन यह मत भूलिए कि आखिरकार आप एक बेहतर इंसान भी हैं जिसे दूसरों के जज्बातों की कद्र करनी है, चाहे वह जिस जाति, धर्म या सूबे का हो, उसकी पहचान चाहे जो भी हो.'

लाम्फांग सिमलियाह का कहना है कि 'ईसाई होने के नाते मैं प्रार्थना करूंगा कि हमें रोशनी दिखाई दे, हम संमार्ग पर चलें, हमें अच्छे प्रतिनिधि मिलें जो लोगों और इस सूबे से प्यार करें और वो अपने निजी हितों को तरजीह ना देते हुए समाज की सेवा करें. हमारे प्रतिनिधि चाहे जिस पार्टी के हों, अगर वो ईश्वर से डरते हैं और सूबे की भलाई के लिए काम करते हैं तो चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि मेघालय में अभी बहुत परेशानी की हालत है.'

(ऐश्वर्या मूर्ति बंगलुरु स्थित फ्रीलांसर तथा जमीनी स्तर के रिपोर्टर्स के अखिल भारतीय नेटवर्क 101रिपोर्टर्स.कॉम की सदस्य हैं.)

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