S M L

इनसे मिलिए, ये हैं मऊ के धरती पकड़

मऊ के हेशमुद्दीन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं

Amitesh Amitesh Updated On: Feb 20, 2017 06:56 PM IST

0
इनसे मिलिए, ये हैं मऊ के धरती पकड़

भारतीय राजनीति में धरती पकड़ उपनाम सामान्य तौर पर तीन नेताओं के साथा जोड़ा जाता है. पहले गुजरात के कपड़ा व्यवसायी काका जोगिंदर सिंह जिन्होंने करीब 300 चुनाव लड़े. दूसरे, भोपाल के व्यापारी मोहन लाल जिनके बारे में मशहूर था कि हर चुनाव में उनकी जमानत जब्त होती है. और तीसरे नगरमल बाजोरिया जो 2012 में प्रणब मुखर्जी और पीए संगमा से दो-दो हाथ करने को तैयार थे.

लेकिन हमारी कहानी मऊ के हेशमुद्दीन के बारे में है जो देश के चौथे धरती पकड़ बनने की पूरी काबिलियत रखते हैं. मऊ सदर विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक और बीएसपी उम्मीदवार मुख्तार अंसारी से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं हाजी हेशमुद्दीन. 76 साल के हाजी हेशमुद्दीन को सुनने में भी तकलीफ है और देखने में भी. काफी मुश्किल से बात हो पाती है.

लेकिन, उत्साह उनका गजब का है. बातचीत के दौरान दावा करते हैं कि मेरी लड़ाई किसी से नहीं है. हम चुनाव जीत कर ही रहेंगे. निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हाजी हेशमुद्दीन को गुब्बारा चुनाव चिन्ह मिल गया है, लेकिन अबतक न झंडे न बैनर और न ही किसी तरह की चुनावी सरगर्मी दिख रही है. बस दावा जरूर है मऊ सदर सीट अबकी बार हमारी है.

हर चुनाव लड़ते हैं-नगरपालिका हो या लोकसभा

dharti pakad

मऊ सदर के क्यारीटोला इलाके के रहने वाले हाजी हेशमुद्दीन इन दिनों इलाके में चर्चाओं के केंद्र में हैं. चर्चा इस बात की हो रही है कि हेशमुद्दीन साहब फिर से चुनावों में खड़े हो गए हैं. उसी क्षेत्र के रहने वाले अल्ताफ अंसारी का कहना है कि हेशमुद्दीन साहब हर चुनाव लड़ते हैं. चाहे वो नगरपालिका का हो, विधानसभा का या फिर लोकसभा का.

खुद हाजी हेशमुद्दीन का दावा है कि अबतक हमने 18 से 20 चुनावों में शिरकत की है. अब इलाके के लोग उन्हें धरती पकड़ के नाम से पुकारने लगे हैं.

कल्पनाथ राय को करते हैं याद

हालांकि, वो खुद अपने आप को पुराना कांग्रेसी बताना नहीं भूलते. इलाके से बड़े कांग्रेसी नेता रहे सांसद कल्पनाथ राय का नाम याद करते हुए कहते हैं कि हमने उनके साथ काम किया है. लेकिन, किस्मत ऐसी कि हमेशा निर्दलीय लड़े. पार्टी ने टिकट नहीं दिया. लिहाजा जीत नसीब नहीं हुई.

चुनाव जीतने पर जनता के लिए बड़ा काम करना चाहते हैं. चुनावी वादों का पिटारा है उनके पास. खुद हज करने गए तो मऊ में एयरपोर्ट नहीं होने से तकलीफ झेलनी पड़ी थी. अब क्षेत्र की जनता से वादा है कि चुनाव जीतने पर सबसे पहले मऊ में एक बड़ा एयरपोर्ट बनाने का प्रयास करेंगे.

वादों की फेहरिस्त यहीं नहीं रुकती. जनाब मंझे हुए राजनेता की तरह कहते हैं कि रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज भी बनाया जाएगा. लेकिन, न कोई लिखित में वादे हैं और न ही कोई लाउडस्पीकर और न ही कोई चुनाव प्रचार का तरीका.

डोर टू डोर कैंपेन के तहत प्रचार करने में शायद ज्यादा भरोसा है इनको. फिजूलखर्ची से बचने की नसीहत का पूरा ख्यार रखने वाले लगते हैं जनाब.

गुब्बारा चुनाव चिन्ह वाले हाजी हेशमुद्दीन के गुब्बारे में भले ही हवा नहीं दिख रही हो, लेकिन, इस उम्र में भी उनकी चुनाव लड़ने की जिद ने धरती पकड़ की याद एक बार फिर से ताजा कर दी है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
DRONACHARYA: योगेश्वर दत्त से सीखिए फितले दांव

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi