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एमसीडी चुनाव: बड़ी पार्टियों का सिरदर्द बने बागी और निर्दलीय

इन प्रत्याशियों ने एमसीडी चुनाव को बहुकोणीय बना दिया है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 13, 2017 07:47 AM IST

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एमसीडी चुनाव: बड़ी पार्टियों का सिरदर्द बने बागी और निर्दलीय

दिल्ली के एमसीडी चुनाव में निर्दलीय और छोटी पार्टियां मिलकर बीजेपी, आप और कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती हैं. तीनों नगर निगम मिलाकर लगभग 125 सीटों पर निर्दलीय और छोटे दलों के मजबूत उम्मीदवारों ने बड़ी पार्टियों को मुश्किल में डाल दिया है.

एमसीडी चुनाव में मजबूत दलों पर निर्दलीय प्रत्याशी भारी पड़ रहे हैं. निगम की सत्ता पाने के दावेदार दलों में रार मचने से चुनाव बहुकोणीय बनता जा रहा है. निर्दलीय उम्मीदवारों के बड़ी संख्या में चुनाव लड़ने के कारण बड़ी पार्टियों को कई सीटों पर हार का भय भी सताने लगा है.

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अगर ये निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवार चुनाव नहीं भी जीतते हैं फिर भी सत्ता के दावेदार बड़े दलों के समीकरण बदलने की ताकत तो रखते ही हैं.

100 सीटों पर 10 से ज्यादा उम्मीदवार

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वार्ड 21 प्रतापनगर की सीट अकाली दल को दिए जाने से नाराज पूर्व डूसू अध्यक्ष मनोज चौधरी निर्दलीय ही मैदान में आ गए हैं.

इस बार के एमसीडी चुनाव में लगभग 100 सीटों पर दस से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. पूर्वी नगर निगम के करावल नगर वार्ड से सबसे ज्यादा 23 उम्मीदवार मैदान में हैं. कुछ ऐसे भी वार्ड हैं जहां पर पांच से कम उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है.

कई दलों के नेताओं ने पदयात्रा और विकास यात्रा की शुरुआत कर दी है. इस बार के एमसीडी चुनाव में राजनीतिक दलों ने बड़ी रैली करने के बजाए छोटी सभाओं के द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. पर, सभी पार्टियों को निर्दलीय उम्मीदवारों ने पानी पिला रखा है. सभी दल निर्दलीय उम्मीदवारों के तेवर से परेशान नजर आ रहे हैं.

कांग्रेस के लगभग 50 बागी उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने की खबर है. बीजेपी और आप में बागियों की संख्या 100 के आस-पास देखी जा रही है.

दिल्ली विधानसभा और लोकसभा में मुख्य राजनीतिक दलों के अलावा अन्य के खाते में वोट शेयर 20 से 25 फीसदी तक आते रहे हैं. एमसीडी चुनाव में यही आंकड़ा 30 से 35 प्रतिशत तक हो जाता है.

2012 के दिल्ली एमसीडी चुनाव में निर्दलीय और अन्य दलों ने 42 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी का शासन तीनों नगर निगमों में था. दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में बीजेपी को बहुमत के लिए 53 सीटें चाहिए थीं, लेकिन बीजेपी को 44 सीटें ही मिल पाई थी. इसके बावजूद बीजेपी ने निर्दलीय विजेताओं की मदद से सत्ता पाई थी. दक्षिणी नगर निगम में कांग्रेस को 29 सीटें मिली थीं.

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इस बार के एमसीडी चुनाव में तो अलग ही नजारा है. बीजेपी और आम आदमी पार्टी सत्ता के दो मजबूत दावेदार हैं. दोनों पार्टियां दिल्ली की हर सीट पर चुनाव लड़ रही हैं. इसके अलावा स्वराज इंडिया पार्टी भी मैदान में है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली जेडीयू भी लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इसके अलावा वाम दल, एनसीपी, एसपी, बीएसपी, इनेलो और शिवसेना भी चुनाव मैदान में खम ठोंक रहे हैं.

नाम वापसी की तारीख तक प्रत्याशी कम होने की थी उम्मीद

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वसंतकुंज वार्ड नंबर 69 से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे विजय मलिक (बीच में)

बड़े दलों के उम्मीदवारों को यह उम्मीद थी कि नाम वापसी तक उम्मीदवारों की संख्या में कमी आ जाएगी. लेकिन, नाम वापसी की तारीख खत्म होने के बाद भी निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं.

एमसीडी चुनाव में कई सीट ऐसी भी हैं, जहां पर बीजेपी, आप और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. पूर्वी नगर निगम के कृष्णा नगर में सिर्फ तीन पार्टियां ही मैदान में हैं. जबकि, आनंद विहार, मुस्तफाबाद, नीरू विहार और त्रिलोकपुरी वेस्ट में चार-चार उम्मीदवार मैदान में हैं.

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के महावीर नगर और जनकपुरी दक्षिण सीट पर भी तीन बड़ी पार्टियों के बीच मुकाबला है. जबकि, जनकपुरी वेस्ट और ख्याला में चार-चार उम्मीदवार मैदान में हैं.

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एमसीडी में कई सीटों पर प्रत्याशियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वोट बंटना साफ नजर आता है. पूर्वी एमसीडी के करावल नगर वेस्ट सीट पर 23 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. दक्षिणी दिल्ली के अबुल फजल एंक्लेव पर 22 और जैतपुर सीट पर 18 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. उत्तरी दिल्ली नगर निगम के विजय विहार सीट पर 21 सीट उम्मीदवार मैदान में हैं.

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