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एमसीडी चुनाव 2017 : इस 'महाभारत' में भी 'विभीषण' हैं

एमसीडी चुनाव में हर पार्टी के भीतर विरोधी स्वर गूंज रहे हैं

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 20, 2017 04:29 PM IST

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एमसीडी चुनाव 2017 : इस 'महाभारत' में भी 'विभीषण' हैं

दिल्ली के भीतर बीजेपी दस साल से एमसीडी की सत्ता में है. आम आदमी पार्टी दिल्ली सरकार चला रही है तो दूसरी तरफ दिल्ली में सफाए के बाद कांग्रेस एक बार फिर से अपनी खोई जमीन तलाश रही है. लिहाजा दिल्ली की लड़ाई  त्रिकोणीय बन गई है.

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एक-दूसरे को कमजोर करने और अपने-आप को एमसीडी चुनाव के दौरान सबसे बड़े विजेता के तौर पर उभारने के लिए तीनों पार्टियों के दिग्गज अपना सबकुछ दांव पर लगाए हुए हैं. लेकिन, इन दिग्गजों को अपनी-अपनी पार्टी के भीतर से ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

कांग्रेस की बात की जाए तो यहां दिल्ली के अध्यक्ष अजय माकन के हाथों में कमान है. टिकट बंटवारे से लेकर कांग्रेस की रणनीति तय करने तक में कांग्रेस के सर्वेसर्वा के रूप में अजय माकन ही हैं.

कांग्रेस की हार या जीत का ठीकरा माकन पर

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अजय माकन की फेसबुक वॉल से

एमसीडी का चुनाव भले ही स्थानीय निकाय का चुनाव हो लेकिन, इस चुनाव में कांग्रेस की जीत या हार से कांग्रेस के भीतर अजय माकन का भविष्य भी तय होगा. कांग्रेस जीत जाती है या फिर विधानसभा चुनाव की तुलना में दिल्ली में बेहतर प्रदर्शन कर जाती है तो माकन का दबदबा पार्टी में बढ़ जाएगा. लेकिन, हारने की सूरत में कांग्रेस में माकन विरोधी नेताओं का स्वर और मुखर भी हो सकता है.

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इसकी एक बानगी तो अभी से ही देखने को मिल रही है. कांग्रेस की कद्दावर नेता और लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित के करीबी नेता दिल्ली कांग्रेस के भीतर हाशिए पर हैं. इन नेताओं की नाराजगी इस बात को लेकर है कि टिकट बंटवारे के दौरान इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. इसी कारण इनमें से कुछ नेता बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

बात अगर आम आदमी पार्टी की हो तो इस वक्त वहां भी खींचतान खूब हो रही है. अरविंद केजरीवाल भले ही इस वक्त पार्टी के सर्वेसर्वा हैं लेकिन, एमसीडी की में हार पार्टी के भीतर हलचल और बढ़ा सकती है. पार्टी के बवाना से विधायक वेदप्रकाश ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा भी कई विधायक पार्टी आलाकमान से खफा हैं.

लेकिन, आप के भीतर कुमार विश्वास की नाराजगी की चर्चा ज्यादा है. कुमार विश्वास का हाल का वीडियो केजरीवाल को नसीहत वाला माना जा रहा है. पंजाब और गोवा की हार के बाद दिल्ली का दंगल केजरीवाल के लिए काफी मुश्किल होने वाला है. एमसीडी की जीत केजरीवाल विरोधियों को शांत कर देगी लेकिन हार अंतर्कलह की ज्वाला को और धधका सकती है.

कई वरिष्ठ नेताओं के निशाने पर हैं मनोज तिवारी

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मनोज तिवारी की फेसबुक वॉल से

ये हाल सिर्फ कांग्रेस और आप का नहीं है. बीजेपी के भीतर भी सियासी खींचतान कम नहीं है. एमसीडी चुनाव से ठीक पहले बिहारी और पूर्वांचली वोटरों को पार्टी से एकमुश्त जोड़ने के लिए भोजपुरी स्टार और सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली बीजेपी की कमान सौंपी गई है.

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इसके बाद से ही पार्टी के भीतर गुटबाजी चल रही है. पार्टी के दूसरे सांसद और अध्यक्ष पद की दौड़ में रहे नेता इस फैसले को पचा नहीं पा रहे हैं. टिकट बंटवारे के दौरान हुई बहस और खींचतान से साफ है कि पार्टी के भीतर भी गुटबाजी खत्म नहीं हो पा रही है.

अगर मनोज तिवारी के नेतृत्व में बीजेपी एमसीडी चुनाव जीतने में सफल हो जाती है तो दिल्ली बीजेपी में उनके कद के सामने शायद ही कोई दूसरा नेता ठहर पाए. वहीं हारने पर स्थिति ठीक उलटी भी हो सकती है.

अब सबको एमसीडी चुनाव के रिजल्ट का इंतजार रहेगा उसके बाद सियासी दलों के भीतर की उठापटक का एक और एपिसोड देखने को मिल सकता है.

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