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एमसीडी चुनाव 217: मंझधार में कांग्रेस, कौन लगाएगा नैया पार

बगावत के स्वर एमसीडी चुनाव बाद कांग्रेस पार्टी में एक बड़ा भूचाल ला सकते हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 20, 2017 08:35 PM IST

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एमसीडी चुनाव 217: मंझधार में कांग्रेस, कौन लगाएगा नैया पार

कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की कमी एमसीडी चुनाव में कांग्रेस के अरमानों को कहीं चकनाचूर न कर दे. एमसीडी चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद से अमूमन सभी पार्टियों में बगावत हुई है. पर, कांग्रेस के अंदर कुछ ज्यादा ही घमासान देखने को मिल रहा है. कांग्रेस पार्टी में मचे घमासान का असर चुनाव प्रचार पर साफ देखा जा रहा है. अब एमसीडी चुनाव से भी पार्टी के बड़े नेता नदारद हैं.

कांग्रेस से उलट दूसरी पार्टियों के चुनाव प्रचार से यह लग रहा है कि वे इस चुनाव को बहुत अहमियत दे रही हैं. दिल्ली में राजनीतिक पार्टियां जगह-जगह होर्डिंग, पोस्टर, बैनर से अपनी बात जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं. बीजेपी और आप के स्टार प्रचारकों ने जहां दिन-रात एक कर रखा है वहीं कांग्रेस के नेता आरोप-प्रत्यारोप और आपसी खींचतान में लगे हुए हैं.

दूसरी राजनीतिक पार्टियों की तुलना में कांग्रेस पार्टी पोस्टर-बैनर से भी गायब नजर आ रही है. कुछ इलाकों में तो पार्टी को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में भी दिक्कत आ रही है. टिकट बंटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं का विरोध सभी पार्टियों में लगभग समान तौर पर हुआ. पर, कांग्रेस पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिल रहा है.

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आम आदमी पार्टी ने अपने कई प्रत्याशियों के टिकट बदल दिए. आप के इस फैसले का कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया. आप के नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का खुद केजरीवाल ने बीड़ा उठाया. सभी नाराज कार्यकर्ताओं से मिलकर या उनके घर जाकर अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी में मचे घमासान के बीच उपजी नाराजगी को काफी हद तक कम किया है.

'पार्टी में सीनियर नेताओं की कोई पूछ नहीं है'

कांग्रेस से एक दर्जन ऐसे नेताओं ने पार्टी छोड़ी है जो या तो दिल्ली सरकार के मंत्री रहे हैं या फिर विधायक रहें हैं या फिर दिल्ली के पार्षद और डिप्टी मेयर रहे हैं. पार्टी छोड़ने वाले अधिकांश नेताओं का कहना था कि कांग्रेस पार्टी को अजय माकन ने कब्जे में ले लिया है. पार्टी में सीनियर नेताओं की कोई पूछ नहीं है.

वहीं, बीजेपी ने अपने सभी पुराने पार्षदों का टिकट काट दिया. पार्टी ने कुछ दिन पहले लगभग 25 नेताओं को पार्टी से निकाल भी दिया. जिसमें कई वर्तमान पार्षद शामिल हैं. ये निर्णय लेकर बीजेपी ने पार्टी में मचे घमासान को काफी हद तक कम कर दिया.

पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने साधी चुप्पी

बीजेपी और आप की तुलना में कांग्रेस में कुछ ज्यादा ही बगावत के स्वर दिखाई दे रहे हैं. कांग्रेस पार्टी में उपजे विरोध के स्वर को मनाने की कोई कोशिश भी आलाकमान के तरफ से नहीं की जा रही है. पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने चुप्पी साध रखी हैं. ऐसा लगता है कि पार्टी आलाकमान ने दिल्ली कांग्रेस को उसके हाल पर छोड़ रखा है.

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कांग्रेस में बगावत के लगातार उठते स्वर एमसीडी चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी में एक बड़ा भूचाल ला सकते हैं. कांग्रेस और अजय माकन के लिए आने वाले दिन कई चुनौतियों से भरे साबित हो सकते हैं.

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पूरे एमसीडी चुनाव में कांग्रेस अपने स्टार प्रचारकों के बगैर ही चुनाव प्रचार करती दिख रही है. कुछ नेताओं को छोड़ कर अधिकांश नेता चुनाव प्रचार करने से बच रहे हैं.

जो पहले करते थे प्रचार, वो अब गायब हैं

कांग्रेस के वे तमाम नेता चुनाव प्रचार से गायब हैं जो पूर्व के चुनावों में कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा हुआ करते थे. अरविंदर सिंह लवली, अमित मलिक, अमरीश गौतम ने तो खुलेआम टिकट बंटवारे से नाराज होकर बीजेपी का दामन थाम लिया.

वहीं, एके वालिया, हारुन युसूफ, परवेज हाशमी, संदीप दीक्षित, योगानंद शास्त्री और मंगतराम सिंघल जैसे नेताओं की लंबी फेहरिस्त है जो अजय माकन से नाराज हो कर चुनाव प्रचार से दूर हैं.

शीला दीक्षित ने भी ऐसे वक्त में पार्टी से किनारा कर लिया है जब पार्टी को उनकी सख्त जरूरत थी. शीला दीक्षित भी दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन की कार्यशैली से काफी नाराज चल रही हैं. हालांकि, नाराजगी के बावजूद शीला दीक्षित ने अरविंदर सिंह लवली और अमित मलिक को धोखेबाज करार दिया.

शीला दीक्षित ने दिल्ली में मुख्यमंत्री के तौर पर 15 साल तक राज किया. इन 15 सालों में अजय माकन और शीला दीक्षित में छत्तीस का आंकड़ा रहा. अब जब अजय माकन के पास दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की कमान है तो शीला दीक्षित और उनकी टीम हाशिए पर चली गई है.

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