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मायावती को चाहिए एकमुश्त मुस्लिम वोट

विधानसभा चुनाव को देखते हुए मायावती की कोशिश रही है कि किसी तरह मुस्लिम वोटों को बसपा के समर्थन में एकजुट किया जाए.

Updated On: Dec 26, 2016 06:45 PM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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मायावती को चाहिए एकमुश्त मुस्लिम वोट

सोमवार को लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती की पत्रकार-वार्ता को देखकर लगा कि वे नेता की भूमिका छोड़कर चुनाव-विश्लेषक बन गई हैं. उनकी ताजा चिंता ये है कि यदि कांग्रेस और सपा के बीच चुनावी तालमेल हो गया तो मुस्लिम वोट बैंक दोनों के पक्ष में एकजुट हो जाएगा. यदि ऐसा हो जाता है तो चुनावी दंगल शुरु होने के पहले ही बसपा मैदान से बाहर हो जाएगी.

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पिछले कुछ महीनों से मायावती की कोशिश रही है कि किसी तरह मुस्लिम वोटों को बसपा के समर्थन में एकजुट किया जाए. आज पत्रकार वार्ता में वे बार-बार मुसलमानों को सावधान करती नजर आईं कि यदि उनके वोट विभाजित हो गए तो भाजपा की जीत सुनिश्चित हो जाएगी.

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मायावती ने फूंका चुनावी बिगुल

मायावती ने मुसलमानों को चेताया

मायावती ने मुसलमानों से कहा कि सपा में अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच जारी लड़ाई की वजह से यादव वोट विभाजित हो जाएंगे, जिसकी वजह से सपा, भाजपा को नहीं हरा पाएगी. उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मानकर चला जा रहा है कि यदि मुस्लिम वोट एकजुट होकर सपा या बसपा के साथ नहीं जाते हैं तो भाजपा बाजी मार ले जाएगी.

मायावती मुसलमानों के भीतर यह भय पैदा करने की कोशिश कर रही है कि यदि उन्होंने एकजुट होकर बसपा को वोट नहीं दिया तो भाजपा की सरकार बन जाएगी. उनका यह कहना बेहद हास्यास्पद है कि भाजपा के इशारे पर सपा और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल कराने की कोशिश हो रही है. इस तरह की बातों से यह संकेत मिलता है कि मायावती का अपना आत्मविश्वास लगातार कमजोर होता जा रहा है.

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ मायावती मुसलमानों के वोट अपनी पार्टी के पक्ष में एकजुट करना चाहती हैं और दूसरी तरफ यह चेतावनी भी देती है कि भाजपा चुनाव के दौरान हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर सकती है.

आश्चर्य की बात यह है कि जिस बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस, सपा और भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा या सरकार बनाई, आज वह सपा और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल को लेकर हो रही बातचीत से ही परेशान नजर आ रही है.

मायावती का बचाव वाला तर्क

मायावती आज मुसलमानों को यह बताने की कोशिश कर रही हैं कि वे ही एकमात्र नेता हैं, जो भाजपा को उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने से रोक सकती है. पत्रकार-वार्ता में उन्होंने स्वयं ही इस बात का जिक्र किया कि वे भाजपा के समर्थन से दो बार मुख्‍यमंत्री बनी हैं. इस संदर्भ में उनका बचाव का तर्क यह है ‍कि उनके मुख्यमंत्री काल के दौरान मुसलमानों पर कोई अत्याचार नहीं होने दिया.

आश्चर्य की बात है कि जिस व्यक्ति ने भाजपा के समर्थन से दो बार मुख्‍यमंत्री का पद पाया, आज वही व्यक्ति मुस्लिम समुदाय को चेतावनी दे रहा है कि यदि बसपा के पक्ष में एकजुट वोट नहीं किया तो भाजपा सत्ता में आ जाएगी.

कुछ महीनों पहले यह माना जाता था कि उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरू में होनेवाले विधानसभा चुनाव में बसपा पहले नंबर पर रहेगी और दूसरे नंबर के लिए सपा और बसपा में लड़ाई होगी. सपा के यादव परिवार में जारी कलह और मोदी की नोटबंदी ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है.

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बीजेपी की पुरानी साथी है बसपा

सपा-बसपा के निशाने पर प्रधानमंत्री

आज बसपा और सपा दोनों का मुख्य हमला भाजपा के खिलाफ हो रहा है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी सभाओं में नरेंद्र मोदी को मुख्य निशाना बना रहे हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती भी भाजपा व नरेंद्र मोदी पर हमला कर रही हैं. दोनों यह मानकर चल रहे हैं कि उनकी मुख्‍य लड़ाई भाजपा के साथ है.

वहीं भाजपा चाहेगी कि असम की तरह उत्तर प्रदेश में भी मुस्लिम वोट सपा, बसपा व कांग्रेस के बीच विभाजित हो जाए. यदि मुस्लिम वोट किसी एक पार्टी की तरफ एकजुट होते दिखाई देंगे तो भाजपा निश्चित ही हिन्दू कार्ड खेलने की कोशिश करेगी.

मायावती ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि वे दलित-मुस्लिम गठजोड़ के आधार पर ही सत्ता में आने का सपना देख रही हैं. वही अखिलेश यादव जातिवाद से थोड़ा-सा हटकर विकास का कार्ड खेलकर फिर से मुख्‍यमंत्री बनने की कोशिश कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कंधों पर बैठकर सत्ता में आना चाहती है.

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