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केंद्र सरकार पोस्ट ऑफिस नहीं है तो थाना की तरह न करे व्यवहार: मायावती

मायावती ने जजों की नियुक्ति के मामले पर बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार अगर पोस्ट ऑफिस नहीं है तो उसे पुलिस थानों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए

Updated On: Jun 12, 2018 08:18 PM IST

FP Staff

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केंद्र सरकार पोस्ट ऑफिस नहीं है तो थाना की तरह न करे व्यवहार: मायावती

बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) अध्यक्ष मायावती ने जजों की नियुक्तियों के लंबित पड़े मामले को लेकर कानून मेंत्री रविशंकर प्रसाद पर निशाना साधा है. उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों को अनदेखा कर रही है.

मंगलवार को बीएसपी द्वारा जारी एक बयान में मायावती ने कहा कि समय-समय पर केंद्र सरकार के मंत्री यह कहते रहे हैं कि कानून मंत्रालय कोई डाकघर नहीं है जो सुप्रीम कोर्ट कॉलोजियम द्वारा की गई सिफारिशों पर हमेशा नजर रखे, यह बेहद दुखद है. केंद्र सरकार के इस रवैये के कारण देश आज न्यायपालिका में एक गंभीर सकट का सामना कर रहा है.

मायावती ने केंद्र सरकार पर यह हमला तब बोला है जब कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का सम्मान करती है लेकिन इसका यह मतलब नहीं हुआ कि वो एक पोस्ट ऑफिस की तरह व्यवहार करे.

न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, मायावती ने कहा कि अगर कानून मंत्रालय पोस्ट ऑफिस नहीं है तो वह एक पुलिस थाना की तरह व्यवहार न करे. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को इसे स्वीकार करना चाहिए और न्यायपालिका का अपमान करना बंद कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 26 न्यायधीशों की नियुक्ति करने का दावा किया है लेकिन कॉलेजिय द्वारा सुझाए गए 300 न्यायधीशों की नियुक्ति पर वे लोग चुप्पी साध रखे हैं.

उत्तराखंड हाईकोर्ट के जस्टिस जोसेफ का नाम वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा के साथ सुप्रीम कोर्ट जज के लिए 10 जनवरी को कॉलेजियम द्वारा सुझाया गया था. सरकार ने 26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सुझाव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और जस्टिस जोफेफ के नाम पर दोबारा विचार करने के लिए कहा था.

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