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यूपी चुनाव 2017: मौखिक घोषणापत्र के साथ चुनाव लड़ती हैं मायावती

मायावती अपने चुनाव प्रचार में विकास और बेहतर कानून-व्यवस्था को तरजीह दे रही हैं

Badri Narayan Updated On: Feb 09, 2017 11:11 PM IST

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यूपी चुनाव 2017: मौखिक घोषणापत्र के साथ चुनाव लड़ती हैं मायावती

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) एक रोचक पार्टी है. वह चुनावों में आम तौर पर घोषणापत्र जारी नही करती. सभी दल जहां चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी करते हैं. अपना घोषणापत्र पूरा होने, दूसरे की घोषणापत्र पूरा न होने की बातें करते हैं. वहीं मायावती घोषणापत्र के बिना चुनाव लड़ती हैं.

बीएसपी प्रायः चुनाव के वक्त कोई लिखित घोषणापत्र प्रकाशित नहीं करती. इसका मतलब यह नही कि मायावती का कोई घोषणापत्र नही होता. अगर आप चुनाव में उनके भाषणों के सार बिंदुओं को इकट्ठा करें तो जाहिर होता है कि मायावती एक ‘मौखिक घोषणापत्र’ के साथ चुनाव लड़ रही होती हैं.

BSP rally in Muzaffarnagar

मायावती की पार्टी बीएसपी को दलित-मुस्लिम गठजोड़ से यूपी चुनाव जीतने का भरोसा है

इस बार के चुनाव में अगर मायावती के भाषणों से मुख्य बातों को इकट्ठा करें तो एक घोषणापत्र विकसित होता हुआ दिखाई पड़ता है. 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए मायावती का घोषणा पत्र कुछ यूं विकसित होता हुआ दिखाई पड़ता है:-

सांप्रदायिक दंगे नही होंगे

मायावती इस चुनाव में अपनी सोशल इंजीनियरिंग का ‘दलित-मुस्लिम गठजोड़’ मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं. वो मतदाताओं को भरोसा दिला रही हैं कि अगर 2017 में उनकी सरकार बनी तो वे सांप्रदायिक दंगे नही होने देंगी. यह एक बहुत बड़ा कमिटमेंट हैं जो वो राज्य की जनता से कर रही हैं.

मायावती समाजवादी पार्टी सरकार को उत्तर प्रदेश में दंगे रोकने में अक्षम सरकार बता रही हैं. वो बीजेपी को दंगे फैलाने का जिम्मेदार मानती हैं. यह वादा पुलिस-प्रशासन में सुधार की मांग तो करता ही है. अपराधियों पर नियंत्रण और सामाजिक संरचना में संतुलन लाने की भी मांग करता है.

यूपी के वोटर के बारे में ये कहा जाता है कि वो अक्सर भावनाओं में आकर वोट देता है

बीएसपी का प्रभाव प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में भी देखने को मिलता है

कानून-व्यवस्था का शासन

उनका दूसरा महत्वपूर्ण वादा राज्य की जनता से यह है कि वो राज्य में कानून-व्यवस्था का शासन मजबूत करेंगी. वे अपनी हर सभा में एसपी के शासन में लचर कानून-व्यवस्था का हवाला देकर राज्य की जनता को भयमुक्त और कड़ी कानून-व्यवस्था देने का वादा करती फिर रही हैं.

मायावती बताती हैं कि जब-जब वो शासन में रही हैं, कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर रही है. इस प्रकार वो शहरी मतदताओं और मिडिल क्लास जिसे वे एसपी के शासनकाल में भू-माफिया एवं आपराधिक गतिविधियों से परेशान मानती रही हैं, तक कानून और व्यवस्था के वादों के साथ पहुंचना चाहती हैं.

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यह सच है कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति केवल शहरी वर्ग के लिए ही नहीं बल्कि ग्रामीण जनता के लिए भी एक अहम सवाल बनकर उभरा है.

मूर्तियां नही बनाएंगें, विकास पर ज्यादा जोर होगा

बीएसपी का पिछला शासन बुद्ध, अंबेडकर और दूसरे संतों-गुरुओं की मूर्तियां बनवाने को लेकर विवादों में रहा. इसलिए इस बार मायावती अपने भाषणों में विकास को प्राथमिकता दे रही हैं. वो कह रही हैं कि इस बार अगर वे शासन में आई तो मूर्तियां नहीं बनवाकर सारा ध्यान राज्य के विकास पर केंद्रित करेंगी.

बीएसपी

मायावती अपनी पार्टी बीएसपी की इकलौती स्टार प्रचारक हैं

आरक्षण की जारी नीति पर कोई हेरफेर नहीं 

पिछले दिनों जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आरएसएस के एम के वैद्य द्वारा दिए गए आरक्षण संबंधी भाषण से जो विवाद उभरा है. मायावती ने उसका चुनावी मुद्दा बनाने में कोई देर नहीं की. वो लगातार अपनी हर सभा में बीजेपी को आरक्षण खत्म करने की मंशा रखने वाली पार्टी बताकर आरक्षण की वर्तमान नीति को बनाए रखने की लड़ाई लड़ेंगी, ऐसा वादा कर रही हैं. इसके जरिए से वो दलित और पिछड़े जिन्हें आरक्षण का लाभ मिल रहा है. उन्हें अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही हैं.

राज्य में शिक्षा व्यवस्था में सुधार

अपने समय की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जिन्हें एसपी सरकार ने बंद कर दिया, उन्हें फिर से जारी करना. पुलिस विभाग की छुट्टियों को कैेश में बदलना, पुलिस ट्रांसफर नीति में उनकी सुविधाओं को देखकर परिवर्तन, इत्यादि दूसरी नीतिगत घोषणाएं भी कर रही हैं.

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मायावती ने इस बार के यूपी चुनाव में 99 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है (फोटो: पीटीआई)

एसपी के शासन की सभी नीतियों की समीक्षा कर जिनके साथ अन्याय हुआ है, उन्हें इंसाफ दिलाने का वादा भी वो कर रही हैं. युवाओं के लिए रोजगार जैेसे वादे भी मायावती के भाषणों में आते रहते हैं.

राज्य का विकास

दूसरी राजनीतिक दलों की तरह मायावती के भी मौखिक घोषणापत्र का हिस्सा है. देखना है कि यह विकास सड़क, बिजली, पानी से आगे जाकर कहां तक मानवीय विकास, रोजगार सृजन, यूपी में कारखानों की स्थापना जैसे मुद्दों से जुड़ पाता है.

मायावती का मौखिक घोषणापत्र असल में एक प्रकार का राजनीतिक एजेंडा है, जिससे वो समाज के सभी वर्गों से खुद को जोड़ना चाहती हैं.

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