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रिकॉर्ड से लकदक है उत्तराखंड का चुनाव

उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव में होने वाली हर एक बात खुद में एक रिकॉर्ड है

Anant Mittal Updated On: Feb 14, 2017 11:35 PM IST

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रिकॉर्ड से लकदक है उत्तराखंड का चुनाव

चीन और नेपाल की सीमा से लगे उत्तराखंड में ताजा विधानसभा चुनाव में रिकॉर्डों की झड़ी लग गई है. यह राज्य रणनीतिक दृष्टि के साथ ही साथ धार्मिक और पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है. यह बात दीगर है कि इसका राजनीतिक वजूद छोटा है. इसके बावजूद बीजेपी ने इस चुनाव में नया रिकॉर्ड बनाया है.

यह रिकॉर्ड है मुख्यमंत्री हरीश रावत को सत्ता से बेदखल करने के लिए हरेक दांव आजमाने का. केंद्र में सत्तारूढ़ और राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद उसने यहां क्षेत्रीय दल की तरह चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड बनाया. कांग्रेस की ही तरह हर एक हथकंडा अपनाया.

पीएम मोदी ने बीजेपी उम्मीदवारों के पक्ष में उत्तराखंड में रिकार्ड 5 रैलियां की हैं

प्रधानमंत्री की रैलियों का रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यहां पांच चुनावी सभाओं का रिकार्ड बनाया है. उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में अब तक किसी प्रधानमंत्री ने इतनी सारी चुनाव सभा नहीं कीं. मोदी की सभाओं में आई महिलाओं और बुजुर्गों की भारी संख्या भी अपने आप में रिकार्ड है. मोदी जैसे बड़े और ऊंचे कद के नेता को पूरे तीन दिन इस छोटे से राज्य के चुनाव प्रचार में झोंका जाना भी रिकॉर्ड है.

पिछले एक हफ्ते के दौरान बीजेपी के बड़े-मंझोले तीन दर्जन से अधिक नेताओं द्वारा राज्य में चुनाव सभा की कारपेट बॉम्बिंग भी नया रिकार्ड है. इन सभाओं में उनके निशाने पर एक ही व्यक्ति मुख्यमंत्री हरीश रावत का रहना भी रिकॉर्ड है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा राज्य में खुद चुनाव की कमान संभालना भी रिकार्ड है.

इससे पहले बीजेपी के किसी अध्यक्ष ने यहां आकर खुद चुनाव संचालन नहीं किया. शाह द्वारा इतनी सारी चुनाव सभा करना भी बीजेपी के किसी अध्यक्ष के लिए रिकार्ड है.

कांग्रेस नेताओं में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हरिद्वार जिले में 75 किमी लंबा रोड शो एक ही दिन में निकाल कर रिकॉर्ड बनाया. मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी चुनावी दौरों और सभाओं में भाषण का रिकॉर्ड बनाया. उनसे पहले कांग्रेस या बीजेपी का कोई भी मुख्यमंत्री चुनाव में इतना सक्रिय नहीं रहा. इसी तरह कई दूसरे मामलों में भी उत्तराखंड में इस चुनाव में नए रिकार्ड बने है.

Harish Rawat Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने भी लंबा रोड शो कर कांग्रेस के पक्ष में हवा बनाने का काम किया है

इस बार राज्य में 76,10,126 मतदाताओं का नया रिकॉर्ड बना हैं. महिला मतदाताओं की संख्या भी रिकार्ड 36,09,190 हो गई. छह सीटों पर मतदाताओं की संख्या डेढ़ लाख पार करने का नया रिकॉर्ड है. उम्मीदवारों की कुल संख्या 637 भी नया रिकार्ड है. मतदान केंद्रों की संख्या भी रिकार्ड 10,854 हो गई. देहरादून में सबसे अधिक 1725 मतदान केंद्रों का नया रिकॉर्ड बना है. सबसे कम 312 मतदान केंद्रों का रिकार्ड रूद्रप्रयाग के नाम है.

कुदरत का नया रिकॉर्ड

चुनाव प्रक्रिया के दौरान अबकी बर्फबारी ने भी छह बार राज्य की चोटियों को सफेद कर नया रिकॉर्ड बनाया है. चुनाव के दौरान रिक्टर पांच दशमलव आठ तेजी का भूकंप आना भी कुदरत का नया रिकॉर्ड है. एक लाख से उपर मतदान कर्मियों का पहली बार रिकॉर्ड बना.

लगभग 50,000 की संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती का रिकॉर्ड बना. पहाड़ी गांवों में जमी बर्फ के बीच 479 मतदान केंद्रों का रिकॉर्ड भी इस बार बना. अति संवेदनशील 1664 मतदान केंद्रों की संख्या का भी रिकॉर्ड नया. इस बार कुल 1283 रिकॉर्ड संवेदनशील मतदान केंद्र हैं .

राज्य में किसी विधानसभा चुनाव के दौरान माओवाद के सर उठाने की भी इस बार पहली घटना का रिकॉर्ड बना. माओवाद ने नैनीताल के धारी ब्लॉक में दस्तक दी. हरिद्वार जिले में प्रति हजार लड़कों पर 811 लड़कियों की मौजूदगी का न्यूनतम लिंग अनुपात भी एक रिकॉर्ड है. डीडीहाट में प्रति हजार लड़कों पर 1064 लड़कियों का अधिकतम लिंग अनुपात रिकॉर्ड.

polling

प्रदेश के 29 गांवों में किसी भी दल या निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा प्रचार के लिए नहीं जाने का भी रिकॉर्ड आया. इन गांवों की दूरी और खड़ी चढ़ाई के कारण कोई विधायक भी आजतक गांव वालों का हाल लेने नहीं गया. उनके चेले जरूर प्रचार कर आते हैं. फिर मतदान कर्मी जाकर वोट डलवा लेते हैं.

राज्य में कुल 34 राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने का भी रिकॉर्ड बना. इनमें से छल दल राष्ट्रीय, चार दल क्षेत्रीय, 24 दल गैर मान्यता प्राप्त हैं. कुल 261 उम्मीदवार किसी भी दल से नहीं बंधे यानी वे आजाद अथवा निर्दलीय है जो रिकॉर्ड है.

असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के अनुसार आपराधिक मामलों में शामिल 91 उम्मीदवारों की संख्या भी रिकॉर्ड है. इनमें से रिकॉर्ड 54 पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है. हत्या जैसे जघन्य अपराध में नामजद भी कम से कम दस उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जो रिकॉर्ड है. यदि ये चुनकर विधान सभा पहुंचे तो वो राजनीति के अपराधीकरण का नया रिकॉर्ड होगा!

आपराधिक अतीत का रिकॉर्ड

आपराधिक अतीत वाले सबसे अधिक 19 उम्मीदवार देने का रिकॉर्ड भी बीजेपी ने बना डाला है. हालांकि आपराधिक मामलों वाले 17 उम्मीदवारों के साथ कांग्रेस का रिकॉर्ड भी बीजेपी से बहुत पीछे नहीं है. बाकियों में बीएसपी के 7, यूकेडी के 4 और समाजवादी पार्टी के 2 तथा 32 निर्दलयी उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज है.

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उत्तराखंड विधानसभा की 69 सीटों के लिए 15 फरवरी को एक ही चरण में मतदान होना है

उत्तराखंड में करोड़पति उम्मीदवारों का भी नया रिकॉर्ड सामने आया हे. कम से कम 200 उम्मीदवार करोड़पति है. हालांकि उनके ठीक उलट मात्र 500 रूपए की संपत्ति वाले भी दो उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. सबसे अधिक यानी कुल 52 करोड़पति उम्मीदवारों का रिकॉर्ड कांग्रेस के सिर हो गया.

बीजेपी भी 48 करोड़पतियों को कमल थमाकर नया रिकॉर्ड बना रही है. बीएसपी के भी 69 उम्मीदवारों में से 19 करोड़पति हैं. यूकेडी के 55 उम्मीदवारो में से भी 13 का करोड़पति होना ये साफ जता रहा है कि राजनीति में पैसे का रोल भी पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है.

करोड़ियों की इस होड़ में निर्दलीय भी पीछे नहीं हैं. उनमें से 53 उम्मीदवार करोड़पति हैं. करोड़पतियों के नेता बीजेपी के सतपाल महाराज हैं जिनके नाम रिकॉर्ड 80 करोड़ की संपत्ति है. वैसे महाराज आध्यात्मिक संघ के मुखिया हैं. इनकी शादी 1980 के दशक में हाथी-घोड़ा पालकी वाले अंदाज में हुई और नया रिकॉर्ड बना गई. सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत का उत्तराखंड में और खुद उनका केंद्र में मंत्री रहने का भी रिकॉर्ड है.

करोड़पति उम्मीदवार

निर्दलीय मोहन प्रसाद काला भी रिकॉर्ड 75 करोड़ की संपत्ति के साथ सतपाल महाराज से कुछ ही पीछे हैं. उम्मीदवारों में तीसरे नंबर के करोड़पति होने का रिकॉर्ड 35 करोड़ की संपत्ति के मालिक बीजेपी उम्मीदवार शैलेंद्र मोहन सिंघल के नाम है. इन सबके उलट मंगलौर के सुनील कुमार के नाम सबसे कम संपत्ति का रिकॉर्ड है. उनके हलफनामे के अनुसार उनकी संपत्ति 500 रुपये भर है. लोहाघाट से राजेंद्र सिंह और बद्रीनाथ से अरूणा ने भी अपनी कुल संपत्ति 500 से 1000 रुपये होने का रिकॉर्ड बनाया है.

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उत्तराखंड में अपनी सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने पूरा दमखम लगा दिया है (फोटो: फेसबुक से साभार)

उत्तराखंड विधान सभा में 11 विधायक ऐसे भी थे जिन्होंने पिछले तीनों चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है. ये उम्मीदवार हैं कांग्रेस के जागेश्वर से गोविंद सिंह कुंजवाल,चकराता से प्रीतम सिंह और धरमपुर से दिनेश अग्रवाल. ऐसे ही बीजेपी के रिकॉर्डधारी हैं-  देहरादून कैंट से हरबंस कपूर, हरिद्वार से मदन कौशिक, डीडीहाट से बिशन सिंह चुफाल और काशीपुर से हरभजन सिंह चीमा इनमें शामिल हैं.

इस बार बीजेपी के कमल से चुनाव लड़ रहे चार पूर्व कांग्रेसी बाजपुर से यशपाल आर्य, कोटद्वार से हरक सिंह रावत, खानपूर से प्रणव सिंह चैंपियन ओर जसपूर से शैलेंद्र मोहन सिंघल हैं. बीजेपी की ही विजया बर्थवाल यमकेश्वर से तीन चुनाव लगातार जीतती रहीं मगर इस बार पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी की बेटी ऋतु खंडूड़़ी की उम्मीदवारी में उनका टिकट कट गया.

 

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