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दो ध्रुवों का मिलन! ममता-उद्धव की दोस्ती 2019 में होगी कितनी असरदार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दिल्ली में टीएमसी दफ्तर में शिवसेना नेता संजय राउत के साथ मुलाकात के बाद जो खबरें आ रही हैं, वो नए समीकरण के संकेत दे रही हैं.

Updated On: Aug 02, 2018 04:44 PM IST

Amitesh Amitesh

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दो ध्रुवों का मिलन! ममता-उद्धव की दोस्ती 2019 में होगी कितनी असरदार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दिल्ली में टीएमसी दफ्तर में शिवसेना नेता संजय राउत के साथ मुलाकात के बाद जो खबरें आ रही हैं, वो नए समीकरण के संकेत दे रही हैं. इस मुलाकात के बाद सूत्रों का दावा है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अगले साल जनवरी में कोलकाता में होने वाली रैली में शिरकत करने पर सहमत हो गए हैं.

दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 19 जनवरी 2019 को कोलकाता में बड़ी रैली की तैयारियों में लगी हुई हैं. इस रैली में विपक्षी दलों का जमावड़ा लगाने की तैयारी हो रही है. ममता की कोशिश मोदी-विरोधी दलों के केंद्र में अपने-आप को रखने की हो रही है.

लेकिन, पहले बात शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ ममता बनर्जी के रिश्तों की करें तो साफ लग रहा है कि दोनों नेताओं के बीच एक बेहतर ट्यूनिंग बन रही है. ममता बनर्जी और बीजेपी में तलवारें पहले से ही खींची हुई हैं. दूसरी तरफ, शिवसेना का रिश्ता बीजेपी के साथ भी पहले से ही हिचकोले खा रहा है. अजीब विडंबना है कि सत्ता का स्वाद लेते हुए भी शिवसेना बीजेपी के खिलाफ बोल भी रही है और बीजेपी के खिलाफ बनने वाले मोर्चे और मंच को साझा भी करने पर राजी हो रही हैं.

ममता के साथ चलने को तैयार हैं उद्धव ?

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सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी के साथ उद्धव ठाकरे की बेहतर ट्यूनिंग की शुरुआत लगभग दो साल पहले हो गई थी, जब नवंबर 2016 में नोटबंदी के विरोध में सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के सांसदों के मार्च में शिवसेना के सांसदों ने भी शिरकत की थी. इसके बाद से ममता और उद्धव आपस में संपर्क में रहे हैं.

नवंबर 2017 में जब ममता बनर्जी ने मुंबई का दौरा किया था उस वक्त उद्धव ठाकरे और उनके बेटे और युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे के साथ उनकी मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा गया था. अब मोदी-विरोधी मंच पर विपक्षी दलों के जमावड़े में उद्धव ठाकरे के पहुंचने की हामी भर देने से साफ है कि दो साल पहले से अंदरखाने जो खिचड़ी पक रही थी, अब वह सतह पर भी दिखने लगी है.

अभी हाल ही में मुसलमानों के लिए शिक्षा में 5 फीसदी आरक्षण के समर्थन वाले बयान को भी शिवसेना के बदलते रुख की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपनी छवि बदलना चाह रहे हैं या फिर विपक्षी कुनबे के और करीब होने के लिए उनकी तरफ से इस तरह की कोशिश की जा रही है. लेकिन, शिवसेना की रणनीति में बदलाव का असर साफ दिख भी रहा है. उद्धव ठाकरे का विपक्षी नेताओं के साथ करीब होना इस ओर इशारा भी कर रहा है. अविश्वास प्रस्ताव पर सदन से गैर-हाजिर होकर शिवसेना ने अप्रत्यक्ष तौर पर सरकार का विरोध ही किया है.

अब ममता बनर्जी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी उद्धव ठाकरे की नजदीकी चर्चा का विषय बनी हुई है.

राहुल-उद्धव की जुगलबंदी भी चर्चा का विषय !

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण की तारीफ करना, बीजेपी के उलट राहुल के पक्ष में बोलना शिवसेना की बदली रणनीति को दिखा रहा है. शिवसेना ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ कर अपने-आप को कांग्रेस के करीब लाने की कोशिश की है. बदले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 27 जुलाई को उद्धव ठाकरे के जन्मदिन के मौके पर उनको बधाई भी दे दी. इसके बाद अब कांग्रेस-शिवसेना के और करीब होने को लेकर कयास तेज हो गए हैं.

सवाल यह भी उठ रहा है क्या शिवसेना अगले चुनाव में अलग होकर केवल बीजेपी को नुकसान करने की कोशिश भर करेगी. यानी शिवसेना महज कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को फायदा पहुंचाने भर के लिए अपने-आप का इस्तेमाल होने देगी या फिर खुलकर बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर गठबंधन कर लेगी. अगर ऐसा हुआ तो फिर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है.

ममता बनर्जी की जनवरी में होने वाली रैली में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के पहुंचने की खबर अपने-आप में बड़ा संकेत देने वाला है. उस वक्त तक पूरे देश में चुनावी माहौल बन चुका होगा. लिहाजा इस रैली से निकलने वाले मैसेज पर सबकी नजरें टिकी होंगी.

ममता बनर्जी की इस रैली में उद्धव ठाकरे के अलावा लगभग सभी विपक्षी दलों के नेताओं के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है. इसके लिए ममता बनर्जी देश भर में अलग-अलग राज्यों में जाकर विपक्षी नेताओं को निमंत्रण भी देने वाली हैं. हालाकि इसकी शुरुआत उन्होंने कर दी है.

मोदी विरोधी मोर्चे के केंद्र में आने की कोशिश में ममता

Mamata Banerjee meets Sonia Gandhi

यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के आवास दस जनपथ पर उनकी सोनिया गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मुलाकात के दौरान ममता ने अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा की है और साथ में जनवरी की रैली में कोलकाता आने का न्योता भी दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ममता बनर्जी ने सोनिया-राहुल से मुलाकात के बाद कहा ‘मैंने उन्हें 19 जनवरी को कोलकाता आने का न्योता दिया है. हमारा सोनिया गांधी से पुराना रिश्ता रहा है. हमने एनआरसी पर भी चर्चा की. हमारी चर्चा अच्छी रही. हम बीजेपी से एकजुट होकर लड़ेंगे. हमलोग उन सीटों पर अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे जिन सीटों पर जो पार्टी मजबूत होगी. यानी बीजेपी के साथ हम वन-ऑन-वन फाइट करेंगे.’

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पद को लेकर कहा ‘प्रधानमंत्री कौन बनेगा यह महत्वपूर्ण नहीं है. हम एक कार्यकर्ता हैं.  हमारा लक्ष्य बीजेपी को हराना है. उचित समय आने पर प्रधानमंत्री पद पर फैसला हो जाएगा.’

ममता बनर्जी के इस बयान को फिलहाल किसी भी तरह के विवाद से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. लेकिन, कोलकाता में कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं का जमावड़ा लगाकर ममता बनर्जी अपने-आप को सबसे बड़े पद के दावेदार के तौर पर पेश करना चाह रही हैं. हो सकता है ममता के बहाने ही सही उद्धव ठाकरे मोदी-विरोधी मोर्चे की तरफ उसी वक्त खुलकर कदम बढ़ा सकते हैं.

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