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ममता बनर्जी अपने किस शौक को अपनी विरासत मानती हैं

रबर की चप्पल और सफेद साड़ी की पहचान वाली ममता बनर्जी सादगी भरी जीवन शैली के लिए जानी जाती हैं

Updated On: Jan 05, 2018 09:23 AM IST

Ravi kant Singh

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ममता बनर्जी अपने किस शौक को अपनी विरासत मानती हैं

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 5 जनवरी को अपना जन्मदिन मनाती हैं. लोगों के बीच ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता बंगाल की नौवीं मुख्यमंत्री हैं. बंगाल में इन्हीं के नाम पहली दफा किसी महिला का सीएम कुर्सी पर काबिज होने का भी रिकॉर्ड दर्ज है. लगातार किसी महिला का दो बार सीएम बनने का रिकॉर्ड भी इनके नाम है. मगर इसके बाद भी कई ऐसी बाते हैं जो दीदी को सबसे अलहदा बनाती हैं.

ब्राह्मण विरासत और पेंटिंग का हुनर

ममता पर अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं. जबकि उनका पारिवारिक बैकग्राउंड शुद्ध बंगाली ब्राह्मण खानदान से ताल्लुक रखता है. उनके पिता का नाम प्रोमिलेश्वर बनर्जी है तो मां का नाम गायत्री देवी. महज 9 साल की उम्र में अपने पिता को खो देने वालीं ममता ने शादी नहीं की. इनके पास धन-दौलत के नाम पर क्या है, इसे जानकार लोग अक्सर चौंक जाते हैं. जैसा कि खुद ममता बनर्जी बताती हैं-अपनी बनाई कुछ पेंटिंग्स और कुछ कविताएं ही थाती हैं.

ममता ने आरंभिक पढ़ाई-लिखाई के साथ उच्च शिक्षा भी काफी ढंग की पाई है. कोलकाता के जुगमाया देवी कालेज से ग्रेजुएट होने के अलावा कोलकाता यूनिवर्सिटी से इस्लामिक इतिहास में मास्टर्स की डिग्री. एजुकेशन के साथ-साथ लॉ की भी डिग्री है इनके पास.

Mamata Banerjee

तृणमूल कांग्रेस की स्थापना

बंगाल में 34 वर्ष तक कम्युनिस्ट राज रहा. जाहिर है इस दौरान भ्रष्टाचार भी फला-फूला. लोगों में बदलाव की एक सुगबुगाहट जगी. पर तत्कालीन पार्टियां कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ रोष को भुनाने में नाकाम साबित होती रहीं. उस वक्त ममता बनर्जी इंडियन नेशनल कांग्रेस के बैनर तले अपनी राजनीति चमका रही थीं. साठगांठ वाली राजनीति का कोई प्रतिफल नहीं मिलता देख ममता ने 1997 में कांग्रेस से अलग होने का फैसला किया. इनने अलग पार्टी बनाई और नाम दिया तृणमूल कांग्रेस. इसे ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम से भी जाना जाता है. तृणमूल का मतलब होता है-घास की जड़. अंग्रेजी में कहें तो ग्रासरूट. इसी कवायद के तहत ममता बनर्जी अपनी पार्टी को ग्रासरूट स्तर पर जोड़ने का संदेश देती रही हैं.

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वामपंथियों की हार

बंगाल में 34 साल से राज कर रहे वामपंथियों को ममता ने धूल चटाई. तृणमूल की इस भारी व ऐतिहासिक जीत के बाद सवाल खड़े हुए कि आखिर किसकी हार और किसकी जीत? दरअसल ममता की पार्टी ने एक खास रणनीति के तहत वामपंथी विचारधारा को हथिया कर प्रदेश के वामपंथियों को पटखनी दी. ममता ने उन-उन मुद्दों पर माहौल बनाया जिन पर लेफ्ट की सरकार अक्सर चूकती रही थी.

क्या-क्या रहीं दीदी

ममता के नाम मुख्यमंत्री से जुड़े रिकॉर्ड तो हैं ही. कई और पदों को भी इन्होंने संभाला है. दुनिया में सबसे लंबे दिनों तक राज करने वाली किसी सरकार को उखाड़ फेंकने का जिम्मा ममता ने निभाया. रेल मंत्री के पद अगर कोई महिला पहली बार बिराजी तो वह ममता बनर्जी हैं. वह भी दो बार. इसके अलावा मानव संसाधन, कोयला, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, युवा मामले-खेल का जिम्मा भी वे बखूबी संभाल चुकी हैं.

यह बात कम लोग ही जानते होंगे कि राजनीति में आने से पहले ममता बनर्जी स्टेनोग्राफर से लेकर ट्यूटर और स्कूल टीचर से लेकर प्राइमरी टीचर का काम कर चुकी हैं.

Mamata's rally against demonetization

ममता के कुछ अनछुए पहलू

'दीदी' स्वादु भोजन की शौकिन हैं लेकिन तले-भुने भोजन से परहेज करती हैं. आमतौर पर उबले चावल, चाय और चॉकलेट की शौकीन ममता बनर्जी कभी-कभार आलू के चिप्स भी खूब चाव से खाती हैं. ट्रेडमिल पर रोजाना 5-6 किलोमीटर दौड़ लगाना उनका शगल है.

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बंगाल असेंबली कवर करने वाले लोग जानते हैं कि सत्रों के दौरान कुछ फुरसत के पल में वे पार्टी कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ कैसे चहलकदमी करती हैं.

इनका पहनावा भी काफी यूनिक है. सफेद साड़ी वह भी एकरंगे बॉर्डर के साथ. यह साड़ी उनकी पहचान भी बन गई है. धनेखली में बनाई जाने वाली यह साड़ी अपनी बुनाई कला के लिए मशहूर है.

सादा जीवन जीने में माहिर

कोलकाता स्थित हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर इनका मकान भी काफी सुर्खियां बटोरता है. वह भी तब जब बारिश हो जाए. इनके घर के आस-पास बारिश का पानी जमा हो जाता है और इन्हें अक्सर पानी में छिपकते हुए घर में घुसते देखा जा सकता है.

ममता को कुदरत से काफी लगाव है. जब भी मौका मिलता है, वे मेदिनीपुर में हिमालय की पहाड़ियों का दौरा करती हैं. इन्हें नेचर फोटोग्राफी का भी शौक है. इनके पसंदीदा शायरों में काजी नजरूल इस्लाम का नाम है.

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