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ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सियासत में नई लड़ाई का आगाज कर दिया है

भले ही मुद्दा सीबीआई का है, लेकिन, इसके पीछे पश्चिम बंगाल में बीजेपी बनाम टीएमसी की सियासी लड़ाई भी नजर आ रही है.

Updated On: Feb 04, 2019 08:05 PM IST

Amitesh Amitesh

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ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सियासत में नई लड़ाई का आगाज कर दिया है

कोलकाता में सारदा और रोजवैली चिटफंड घोटाले से जुड़े मामले में पूछताछ को लेकर पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार के पास जैसे ही सीबीआई पहुंची, वैसे ही सीबीआई और कोलकाता पुलिस आमने-सामने आ गए. बवाल तो तब और मचा, जब सीबीआई की इस कार्रवाई के खिलाफ खुद सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने आ गए हैं.

संसद से लेकर सड़क तक इस बात की गूंज सुनाई दे रही है. गृह-मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन के भीतर इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा तो वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पार्टी की तरफ से इस मुद्दे पर टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा.

उन्होंने विरोधी दलों के गठबंधन को भ्रष्ट लोगों का गठबंधन बताते हुए सवाल पूछा, ‘क्या भ्रष्टाचार के मामले की जांच करना पाप है?’ उन्होंने कहा कि सबसे पहले अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के तौर पर धरने की शुरुआत की थी, लेकिन, पहली बार हो रहा है कि एक पुलिस ऑफिसर पर कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री धरना पर हैं.

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दरअसल, बीजेपी बार-बार इस मुद्दे को ही जोर-शोर से उठा रही है कि जब इसके पहले सुदीप बंदोपाध्याय से लेकर कई बड़े-बड़े नेता गिरफ्तार हुए थे तो उस वक्त ममता जी ने कोई बड़ा बयान नहीं दिया, लेकिन, वो एक पुलिस कमिश्नर के मुद्दे पर इतना क्यों बोल रही हैं. रविशंकर प्रसाद ने कटाक्ष करते हुए सवाल किया कि कहीं यह पुलिस कमिश्नर कोई बड़ा राजदार तो नहीं है. मतलब राजदार बहुत जानता है.

दरअसल, टीएमसी की तरफ से यह दलील दी जा रही है कि बिना किसी सूचना के सीबीआई की तरफ से यह कार्रवाई की गई थी, जिसके जवाब में बीजेपी और सरकार की तरफ से यह कहा जा रहा है कि पुलिस कमिश्नर को तीन बार समन भेजे जाने के बावजूद वो सीबीआई के सामने नहीं आए थे, जिसके बाद सीबीआई को उनसे पूछताछ के लिए जाना पड़ा.

दरअसल, बीजेपी की तरफ से तर्क यही दिया जा रहा है कि इस पूरे मामले में ममता बनर्जी की सरकार की तरफ से 26 अप्रैल 2013 को एसआईटी का गठन किया गया था. बाद में 9 मई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि व्यापक स्तर पर इस पूरे मामले की जांच की जाएगी, जिसके बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की.

गौरतलब है कि 26 मई 2014 को केंद्र में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी, जिसके पहले का यह पूरा मामला है. ऐसे में बीजेपी इस मुद्दे पर टीएमसी समेत दूसरे विरोधी दलों की तरफ से पॉलिटिकल वेंडेटा के लिहाज से की जा रही कार्रवाई को सिरे से खारिज कर रही है.

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बीजेपी के पास ममता बनर्जी के सीबीआई कार्रवाई के बाद धरने के मुद्दे पर घेरने के लिए बहुत बड़ा प्रमाण भी है. पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान सीबीआई की तरफ से की गई पूछताछ और उसमें सहयोग की बात को आधार बनाया जा रहा है.

रविशंकर प्रसाद ने भी इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गुजरात के गृह मंत्री रह चुके अमित शाह (पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष) को भी परेशान किया गया था, यहां तक कि अमित शाह को तो सलाखों के पीछे भी जाना पड़ा था, लेकिन, उस वक्त बीजेपी ने सीबीआई जांच के खिलाफ धरना और असहयोग कभी नहीं दिखाया.

ये अलग बात है कि बाद में अदालत की तरफ से अमित शाह बरी हो गए थे, फिर भी उस वक्त मोदी-शाह ने कभी सीबीआई के खिलाफ इस तरह का व्यवहार नहीं किया था.

आज संयोगवश मोदी-शाह की जोड़ी ही सरकार और बीजेपी में शीर्ष पद पर स्थापित है. मोदी प्रधानमंत्री हैं तो शाह बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान संभाले हुए हैं. ऐसे में पार्टी बार-बार इस मुद्दे के सहारे ममता बनर्जी और उनके समर्थन में खड़े तमाम विपक्षी कुनबे के नेताओं को घेर रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फिलहाल ममता बनर्जी के साथ खड़े दिख रहे हैं. लिहाजा बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 8 मई 2014 के उस ट्वीट का जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चिटफंड मामले में 20 लाख लोगों का पैसा डूब गया था. लेकिन, अब जबकि इस मामले में सीबीआई उस वक्त के एसआईटी प्रमुख रहे मौजूदा पुलिस कमिश्नर पर कार्रवाई कर रही है तो फिर, वो ममता के साथ खड़े हैं.

दरअसल, बीजेपी के एजेंडे में बंगाल सबसे ऊपर है. 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति इसी बात को लेकर बनाई जा रही है कि अगर पार्टी की सीटों की संख्या 2014 के मुकाबले यूपी, मध्यप्रदेश, राजस्थान हिंदीभाषी राज्यों में कुछ कम होती है तो फिर उसकी भरपाई, पश्चिम बंगाल, ओडीशा और नॉर्थ-ईस्ट से कर ली जाएगी. ऐसे में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.

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बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और दूसरे बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की लगातार रैलियां कराई जा रही हैं. बीजेपी ने चुनाव से पहले 42 लोकसभा क्षेत्रों में 310 रैलियां कराने का कार्यक्रम तय किया है. लेकिन, कभी अमित शाह तो कभी योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग की अनुमति नहीं देने या फिर कभी अमित शाह की रथयात्रा को माहौल खराब होने के नाम पर विरोध कर ममता बनर्जी ने भी बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को कम करने की कोशिश की है.

भले ही मुद्दा सीबीआई का है, लेकिन, इसके पीछे पश्चिम बंगाल में बीजेपी बनाम टीएमसी की सियासी लड़ाई भी नजर आ रही है. बहाना जो भी हो, ममता बनर्जी के धरने ने लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत में एक नई लड़ाई का आगाज कर दिया है.

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