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गांधी को याद कर सेवाग्राम से कांग्रेस देगी 'बीजेपी गद्दी छोड़ो का नारा'

कांग्रेस के सभी बड़े नेता इस दिन वर्धा में मौजूद रहेंगे. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के भी उपस्थित रहने की उम्मीद है. कांग्रेस के सभी प्रदेश के नेताओं को भी निर्देश दिए गए हैं

Updated On: Oct 01, 2018 10:16 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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गांधी को याद कर सेवाग्राम से कांग्रेस देगी 'बीजेपी गद्दी छोड़ो का नारा'

2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर कांग्रेस वर्धा में बैठक करने जा रही है. जिसमें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे, हालांकि गांधी जयंती का अवसर है लेकिन राजनीतिक मकसद और है. कांग्रेस महात्मा गांधी की विरासत से सियासत का नया अध्याय शुरू करने की तैयारी कर रही है. बीजेपी गांधी के विरासत को अपनाने का प्रयास कई साल से कर रही है. कांग्रेस बीजेपी के गांधी प्रेम से विचलित है.

गांधी जयंती को मोदी सरकार स्वच्छता दिवस के तौर पर मना रही है. जिससे ये दिन भी कांग्रेस के हाथ से निकला जा रहा है. कांग्रेस चुनावी साल में गांधी के जन्म जयंती पर नए राजनीतिक दिशा की ओर चलने की तैयारी कर रही है.

कांग्रेस के सभी बड़े नेता इस दिन वर्धा में मौजूद रहेंगे. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के भी उपस्थित रहने की उम्मीद है. कांग्रेस के सभी प्रदेश के नेताओं को भी निर्देश दिए गए हैं.

गांधी के मूल सिद्धांत अहिंसा के पाठ के साथ बीजेपी के खिलाफ अभियान की शुरुआत होगी. जिसमें बीजेपी के राज में चल रहे कथित हिंसा का जवाब कांग्रेस ढूंढने की कोशिश करेगी. कांग्रेस के कई नेता तैयारी के सिलसिले में वर्धा का दौरा भी कर चुके हैं.

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कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि देश में पहली बार इस तरह का माहौल है. जिसमें हर आदमी डर के साए में जी रहा है. जिस पार्टी की वजह से ये सब हो रहा है वो महात्मा गांधी के नाम का सिर्फ इस्तेमाल करना चाहती है, जबकि महात्मा गांधी कांग्रेस के मूवमेंट के पुरोधा रहे हैं.

क्या है कार्यक्रम?

2 अक्टूबर से महात्मा गांधी की 150वीं जयंती शुरू हो रही है. सेवाग्राम वर्धा में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होगी. जिसमें आजादी के आंदोलन में गांधीजी के योगदान को याद किया जाएगा.

जिसके बाद महात्मा गांधी के प्रिय भजन गाए जाएंगे. कांग्रेस इसके बाद एक मार्च निकालेगी और राहुल गांधी की सभा भी होगी. जिसमें बीजेपी निशाने पर रहने वाली है. बताया जा रहा है कि सेवाग्राम तक राहुल गांधी पदयात्रा भी कर सकते हैं.

सेवाग्राम में ही कांग्रेस ने भारत छोड़ो का खाका तैयार किया था. जिसके बाद क्विट इंडिया मूवमेंट की शुरूआत हुई थी. कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ प्रस्ताव पास कर सकती है. जिसमें देश में बढ़ रहे असहिष्णुता के लिए सत्ताधारी दल को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. कांग्रेस लगातार कह रही है कि अराजकता और हिंसा के लिए बीजेपी ही कसूरवार है. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि डर, हिंसा, करप्शन इन सबको भारत छोड़ना पड़ेगा, जिस तरह अग्रेज़ों को भारत छोड़ना पड़ा उसी तरह इस सरकार को भी गद्दी छोड़नी पड़ेगी. मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का ये संकल्प है.

यहां से निकले संदेश को कांग्रेस हर घर तक ले जाएगी. कांग्रेस की योजना है कि गांधी जयंती के बाद गांधी के संदेश के साथ कांग्रेस का संदेश हर गली तक पहुंच जाए. जिसके लिए पार्टी के संगठन के लोगों का कार्यक्रम तय किया जा रहा है. जिसका नाम 'लोक संपर्क अभियान' रखा गया है.

रणदीप सुरजेवाला के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

रणदीप सुरजेवाला के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

महात्मा के भजन के साथ कांग्रेस की राजनीतिक शुरुआत

गांधी जी के सर्वधर्म संभाव के जरिए कांग्रेस का अभियान चलेगा. गांधी जी के प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम, ईश्वर अल्ला तेरो नाम की धुन से लोक संपर्क का आगाज किया जाएगा. इस अभियान से कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगी. कांग्रेस के नेता शकीलुज़्ज़मा अंसारी का कहना है कि मौजूदा दौर में गांधी की महत्ता और बढ़ गई है. जिस तरह बीजेपी नफरत का माहौल पैदा कर रही है,उसका जवाब गांधीवाद ही है. नफरत को मोहब्बत से ही जीता जा सकता है. कांग्रेस ही इस देश को गांधीवाद की तरफ ले जा सकती है. बीजेपी सिर्फ गांधी का नाम इस्तेमाल कर रही है.

गांधी की विरासत बचाने की चुनौती

कांग्रेस के सामने गांधी की विरासत अपने पास बचाने की चुनौती है. बीजेपी की निगाह पहले ही गांधी जी की विरासत पर है. नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद गांधी जयंती को स्वच्छता से जोड़ दिया है. गांधी जी भी सफाई के पैरोकार थे. भारत सरकार का स्वच्छता दिवस पर फोकस रहता है. पूरे देश में इसको लेकर प्रोग्राम किया जा रहा है. इस बार महात्मा की 150वीं जयंती है जिसको लेकर सरकार की भी तैयारी है. सरकार के सामने महात्मा की विरासत संजोने की चुनौती कांग्रेस पर है. ये इतना आसान नहीं है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन का राजनीतिक इस्तेमाल करने में पीछे नहीं रहने वाले हैं. कांग्रेस उनके निशाने पर रहने वाली है, पार्टी के सामने गांधी पर बीजेपी के किसी भी दावे को नकारने के लिए रणनीति की जरूरत है.

कांग्रेस के नेता सरदार पटेल को बीजेपी पहले ही आत्मसात कर चुकी है. जबकि सरदार पटेल की आरएसएस से नहीं बनती थी. इसके बावजूद सरदार पटेल की सबसे बड़ी प्रतिमा गुजरात में लग रही है. कांग्रेस हाथ मलती रही है. बीजेपी सरदार पटेल को बड़े तरीके से नेहरू के सामने खड़ा कर देती है, जिसका जवाब देने में कांग्रेस को मुश्किल होती रही है. कांग्रेस के इस कशमकश से बीजेपी फायदा उठाती है.

कांग्रेस के सामने राजनीतिक परिदृश्य

पहले आम चुनाव के बाद से पहली बार कांग्रेस की हालत पस्त है. लोकसभा में कांग्रेस अपने न्यूनतम स्तर पर है. पार्टी की पंजाब और पुदुच्चेरी में ही सरकार है. कर्नाटक में मिलीजुली सरकार है. पूरे देश कांग्रेस की राजनीतिक हालत खस्ता है. पार्टी को फिर से सेंटर स्टेज पर लाने की जद्दोजेहद राहुल गांधी कर रहे हैं . महागठबंधन पर भी ग्रहण लगा हुआ है. पार्टी के पास कोई ठोस कार्यक्रम नहीं है. कांग्रेस कोई जनांदोलन नहीं खड़ा कर पा रही है. कांग्रेस के नेता समझ रहे कि पार्टी को जनता तक पहुंचाने के लिए गांधी जी का उपदेश काम आ सकता है. गांधी के जरिए जनता से कनेक्ट हो सकता है.

sonia gandhi rahul gandhi

सेवाग्राम और गांधी जी

1936 से शहीद होने तक महात्मा गांधी सेवा ग्राम में ही रहते थे. यहां से गांधी जी की राजनीतिक गतिविधि चलती रही है. जुलाई 1942 में क्विट् इंडिया का प्रस्ताव सेवाग्राम में ही पास किया गया था ,जिसके बाद अग्रेजो भारत छोड़ो का अभियान 9 अगस्त से शुरू हुआ था. 1930 में दांडी यात्रा के दौरान गांधी जी ने तय किया कि वो भारत के आजाद होने तक साबरमती नहीं लौटेंगे, नमक सत्याग्रह में गांधी जी को दो साल की कैद की सजा हो गई थी. रिहा होने के बाद कुछ दिन गांधी भारत भ्रमण करते रहे. 1934 में जमनालाल बजाज के बुलावे पर वर्धा आ गए. 1936 में सिवगांव में आश्रम स्थापित किया गया, जिसका 1940 में नाम बदल कर सेवाग्राम रखा गया. जाति के बंधन को तोड़ने के लिए यहां हरिजन लोगों की नियुक्ति की गई थी.

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