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महाराष्ट्र में कांग्रेस के हाथ को मिला एनसीपी का साथ

2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग हो गए थे और कई सीटों पर वोटों के बंटवारे की वजह से कांग्रेस-एनसीपी के उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा

FP Staff Updated On: Feb 06, 2018 10:00 PM IST

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महाराष्ट्र में कांग्रेस के हाथ को मिला एनसीपी का साथ

तीन साल पहले एकदूसरे से नाता तोड़ने वाले कांग्रेस-एनसीपी की दूरियां खत्म होती नजर आ रही हैं. पहली बार दोनों दलों के बीच लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने के मुद्दे पर बैठक हुई. इस बैठक में कांग्रेस की तरफ से महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण, नसीम खान, महाराष्ट्र विधानसभा के नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटील शामिल हुए.

वहीं एनसीपी की तरफ से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार, जितेंद्र आव्हाड, एनसीपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे सहित कई बड़े नेता मौजूद थे. करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में दोनों दलों ने मौजूदा राजनीतिक हालात की समीक्षा की और साथ मिलकर लड़ने के फायदों और बीजेपी को रोकने पर चर्चा की.

खत्म हुए गिले शिकवे

कल तक एक दूसरे पर ताने कसने वाले एनसीपी-कांग्रेस नेताओं के बीच बैठक में न तो पहले की तरह तल्खी थी और ना ही कोई गिला शिकवा. हंसते-मुस्कुराते हुए दोनों दलों के नेताओं ने एक बात पर सहमति बना ली कि जो हुआ उसे भुलकर फिर एक बार साथ आया जाए और मोदी-शाह के अश्वमेघ रथ को महाराष्ट्र में रोका जाए. अशोक चव्हाण ने कहा कि इस गंठबंधन में कोई भी बड़ा या छोटा नहीं हैं. दोनों ही दल भाई-भाई हैं. जितने भी मुद्दे थे उन्हें सुलझा लिया गया है.

सेकुलर वोटों का बंटवारा रोकने को गठबंधन जरूरी एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं ने माना कि दोनों के अलग-अलग लड़ने का सीधा फायदा बीजेपी और शिवसेना को हुआ. जो मतदाता धर्मनिरपक्षेता के मुद्दे पर इनके गठबंधन को वोट देते थे वो बंट गए. इस बार पिछली वाली गलती न हो इसलिए दोनों दलों के महाराष्ट्र के नेताओं ने संकेत दे दिए हैं कि गठबंधन होगा. कई मुद्दों पर दोनों दलों के नेताओं के बीच सहमति भी बन गई है.

पवार और राहुल लेंगे अंतिम फैसला

एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि वो साथ मिलकर लड़ने को तैयार हैं लेकिन गठबंधन पर आखिरी मुहर दोनों पार्टियों के सर्वोच्च नेता शरद पवार और राहुल गांधी लगाएंगें. कुछ दिन पहले खुद शरद पवार भी कह चुके हैं कि सोनिया गांधी की तरह कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्व भी सबको साथ लेकर आगे चलने में यकीन करता है. ऐसे में दोनों दलों के बीच दोबारा गठबंधन होना लगभग तय हैं. गठबंधन का ऐलान महज औपचारिकता माना जा रहा है.

साथ लड़ें तो बीजेपी पर पड़ेंगे भारी

2014 में मोदी लहर ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी का सुपड़ा साफ कर दिया था. इसके बाद 2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग हो गए थे. इन चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन अलग लड़ने के बावजूद कांग्रेस और एनसीपी 40 से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रहे थे. इसकी उम्मीद बहुत कम थी. कई सीटों पर वोटों के बंटवारे की वजह से कांग्रेस-एनसीपी के उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा. लेकिन इस बार हालात अलग हैं.

शिवसेना पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि वो बीजेपी के साथ नहीं लड़ेगी. महाराष्ट्र में किसानों के बड़े नेता और सांसद राजू शेट्टी भी कह चुके हैं कि उनकी पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करेगी. ऐसे राजनीतिक हालात में कांग्रेस-एनसीपी साथ लड़ते हैं तो उनका पलड़ा भारी रहना तय है.

(न्यूज18 हिंदी के लिए दिनेश मौर्य की रिपोर्ट)

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