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मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव: सस्पेंस, ड्रामा और परिवार की दरार

कोलारस और मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के पिछले विधानसभा आम चुनाव में कांग्रेस जीती थी. बीजेपी इन दोनों सीटों को छीन कर ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को कमजोर करना चाहती है

Dinesh Gupta Updated On: Feb 19, 2018 08:35 AM IST

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मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव: सस्पेंस, ड्रामा और परिवार की दरार

मध्यप्रदेश के कोलारस एवं मुंगावली के विधानसभा उपचुनाव में नजारा दिलचस्प है. चुनाव के दृश्य किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं. कहीं बीजेपी की सभा में मतदाता कांग्रेस के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आते हैं तो कहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लंच, डिनर और ब्रेकफास्ट की डिप्लोमेसी से सिंधिया को घेरने की कोशिश करते दिखते हैं.

बुआ और भतीजे की जंग ने चुनाव को दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. पहली बार ऐसा नजर देखने को मिल रहा है बुआ के खिलाफ भतीजे की पार्टी चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटा रही है. उपचुनाव के लिए मतदान 24 फरवरी को होना है. दोनों विधानसभा क्षेत्र के बीच लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी है. कांग्रेस और बीजेपी नेता कभी इस क्षेत्र में भाग रहे हैं तो कभी उस क्षेत्र में दौड़ लगा रहे हैं. इन दोनों विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने पहली बार ऐसा नजारा देखा है, जिसमें रोज कोई न कोई मंत्री दरवाजे पर खड़ा वोट मांगता नजर आता है.

मुंगावली में डिनर डिप्लोमेसी काम नहीं आई

मुंगावली विधानसभा के उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने ब्रजेन्द्र सिंह यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है. ब्रजेन्द्र सिंह के नाम की घोषणा होने के साथ ही कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के सांसद प्रतिनिधि केपी यादव को बीजेपी ने तोड़ लिया.

केपी यादव लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने पूरे मुंगावली क्षेत्र की दीवारें कांग्रेस को वोट देने की अपील के साथ रंगवा दी थीं. उम्मीदवार ब्रजेन्द्र सिंह बन गए. केपी यादव की तरफ से दीवारों पर लिखवाई गई अपील आज भी मौजूद है, जबकि वे खुद बीजेपी की उम्मीदवार बाई साहब का प्रचार कर रहे हैं.

उलझन में है मतदाता

मतदाता केपी यादव को लेकर भ्रमित हो गया है. इस भ्रम का फायदा कांग्रेस को ही मिल रहा है. मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा यादव मतदाता हैं. दोनों ही राजनीतिक दलों के उम्मीदवार यादव हैं और आपस में रिश्तेदार भी हैं. यादव मतदाता हवा का रुख देख रहे हैं. यादव मतदाताओं के विभाजित होने की संभावना को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अन्य जाति के वोटों पर ध्यान केन्द्रित किया है.

shivraj chauhan

सिंधिया के गढ़ को भेदने के लिए मुख्यमंत्री ने सिंधिया के समर्थकों को निशाना बनाना शुरू किया. लेकिन पहला ही दांव उल्टा पड़ गया. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंधिया समर्थक मनोज जैन के घर डिनर का कार्यक्रम तय कर दिया. रात भर सियासत चलती रही. डिनर ब्रेकफास्ट कार्यक्रम में बदल गया. कई समाज के प्रमुख व्यक्तियों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया. अघोषित तौर पर बताया गया कि सिंधिया समर्थक बीजेपी में शामिल हो रहे हैं.

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मुख्यमंत्री का यह बड़ा दांव था. लेकिन ब्रेकफास्ट खत्म होते ही मनोज जैन ने साफ तौर पर कह दिया कि उन्होंने या किसी भी कार्यकर्त्ता ने बीजेपी ज्वाइन नहीं किया है. बीजेपी के चुनाव प्रभारी अरविंद भदौरिया ने कहा कि हमारा मकसद पूरा हो गया. इस ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी के जरिए बीजेपी सिंधिया विरोध का मनौवैज्ञनिक संदेश देने में सफल हो गई है.

कोलारस में बुआ यशोधरा की धमकी

राज्य की खेल एवं युवक कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ हैं. वे अकेली ऐसी मंत्री हैं, जिन्हें प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराया गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद रथ में बैठकर प्रचार कर रहे हैं. उनकी एक रात मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में और एक रात शिवपुरी में कटती है.

यशोधरा राजे सिंधिया का हेलीकॉप्टर जब गांव में पहुंचता है तो औरतें, बच्चे भी घरों से निकल आते हैं. यशोधरा राजे सिंधिया यहां अपनी मां विजयराजे सिंधिया का हवाला देकर बीजेपी को वोट देने की अपील कर रहीं हैं. वे अपने भाषण में चुनाव चिन्ह की बात करतीं हैं. पंजा और कमल का फूल. गांव वालों को धमकी भरे अंदाज में यह कहना भी नहीं भूल रहीं कि यदि पंजे को वोट दिया तो रोटी बनाने के लिए गैस का चूल्हा भी नहीं मिलेगा. प्रधानमंत्री आवास भी नहीं देंगे. शौचालय बनाने के लिए पैसा भी नहीं देंगे. यशोधरा राजे सिंधिया की इस धमकी की शिकायत कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग को मतदाता सूची में गड़बड़ी होने की शिकायत भी की है.

सोशल मीडिया पर छाया हुआ है मुंगावली, कोलारस

सोशल मीडिया में लगभग हर ग्रुप पर सिर्फ मुंगावली और कोलारस के विधानसभा के चुनाव की चर्चा है. इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों की हर छोटी-बड़ी घटना तेजी से वायरल हो रहीं हैं. कई तरह की अफवाहें भी इसमें शामिल होतीं हैं.

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मुंगावली और कोलारस के लगभग हर गांव में बीजेपी कार्यकर्ता जमे हुए हैं. सैकड़ों गाड़ियां क्षेत्र में घूम रहीं हैं. ज्यादातर वाहन ऐसे हैं, जिन पर चुनाव आयोग की मंजूरी का आदेश भी नहीं लगा हुआ है. मजरे टोले में भी प्रचार करने पहुंचे कार्यकर्ताओं की संख्या कुल मतदाताओं से भी ज्यादा है.

अनुसूचित जाति, जनजाति और मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस का परंपरागत वोटर माना जाता है. बीजेपी इस वोट बैंक को तोड़ने की कोशिश में लगी हुई है. मजरे-टोलों में चिकन-मटन की पार्टियां चल रहीं हैं.

एक को मनाते हैं, दूसरा रूठ जाता है. सबसे ज्यादा नाटकीय घटनाक्रम मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में सामने आ रहे हैं. कहीं किसान मंत्रियों और विधायकों को घेराव कर रहे हैं तो कहीं आदिवासी बीजेपी के कार्यक्रम में सिंधिया जिंदाबाद के नारे लगाते नजर आ रहे हैं. पूरा मंत्रिमंडल इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में पड़ा हुआ है. भोपाल में सरकारी कामकाज लगभग ठप है.

चौदह साल बनाम छह माह

राज्य में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होना है. बीजेपी ने विधानसभा के आम चुनाव में दो सौ सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कोलारस और मुंगावली की बाधा पार करना चुनौती भरा दिखाई दे रहा है.

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कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें मंत्री और पार्टी के पदाधिकारियों की सभा में सिर्फ बच्चे ही नजर आ रहे हैं. कई गांव में सभा सुनने के लिए भी लोग नहीं आ रहे हैं. चुनाव का मुद्दा क्षेत्र का विकास बनाने की कोशिश की जा रही है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार अपने भाषणों में सिर्फ यही कह रहे हैं कि आप हमें छह माह के लिए विधायक दे दें, हम क्षेत्र का नक्शा बदल देंगे. जवाब में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पूछ रहे हैं कि चौदह साल मुख्यमंत्री को इस क्षेत्र का विकास याद क्यों नहीं आया.

कोलारस और मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के पिछले विधानसभा आम चुनाव में कांग्रेस जीती थी. बीजेपी इन दोनों सीटों को छीन कर ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को कमजोर करना चाहती है.

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