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मध्य प्रदेश चुनाव: यह सूची देख बीजेपी पर वंशवाद का आरोप लगा सकती है कांग्रेस

230 सीटों के लिए घोषित बीजेपी सूची में 42 उम्मीदवार पार्टी नेताओं के बेटे, बेटियां या रिश्तेदार हैं. कांग्रेस के हिस्से में यह संख्या महज एक दर्जन से अधिक हैं.

Updated On: Nov 27, 2018 05:54 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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मध्य प्रदेश चुनाव: यह सूची देख बीजेपी पर वंशवाद का आरोप लगा सकती है कांग्रेस

लंबे समय से बीजेपी वंशवादी राजनीति के लिए कांग्रेस पर हमला करती रही है. लेकिन अब कांग्रेस को ऐसा मौका मिला है कि वह इसी वजह से बीजेपी का मजाक उड़ा सकती है. भगवा पार्टी ने मध्यप्रदेश में वरिष्ठ पार्टी सदस्यों के रिश्तेदारों को बड़े पैमाने पर टिकट दिए है. 230 सीटों के लिए घोषित बीजेपी की सूची में 42 उम्मीदवार पार्टी नेताओं के बेटे, बेटियां या रिश्तेदार हैं. कांग्रेस के हिस्से में यह संख्या महज एक दर्जन से अधिक है. मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को चुनाव होने हैं.

बीजेपी और कांग्रेस नेताओं, जिनके बच्चों, भाई-बहनों या रिश्तेदारों को टिकट मिला हैं, उनमें पूर्व प्रधानमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री तक और वर्तमान केंद्रीय मंत्रियों से ले कर पूर्व विधायक तक शामिल हैं. मध्य प्रदेश में दोनों पार्टियों के लिए यह चुनाव एक पारिवारिक मामला बन गया है.

बीजेपी उम्मीदवार

इस चुनाव में, बीजेपी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भतीजे अनूप मिश्रा को भितरवार, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेन्द्र पटवा को भोजपुर से, कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी को हाट पिपलिया से, वीरेंद्र कुमार सकलेचा के बेटे ओम प्रकाश सकलेचा और बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर को भोपाल के गोविंदपुरा से टिकट दिए हैं. अनूप मिश्रा मध्य प्रदेश में मंत्री थे, जबकि पटवा और जोशी वर्तमान में शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट में शामिल हैं.

अनूप मिश्रा

अनूप मिश्रा

कृष्णा गौर पूर्व महापौर हैं. बाबूलाल गौर द्वारा गोविंदपुरा सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद बीजेपी नेतृत्व ने उनकी बहू को टिकट दिया. इस सीट से बाबूलाल गौर लगातार 10 बार निर्वाचित हुए हैं. उम्र सीमा (75 साल तक) के कारण बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया.

ग्वालियर से बीजेपी दिग्गज राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटी यशोधराराजे को शिवपुरी से चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिला है. वह अभी राज्य की मंत्री भी हैं.

मध्य प्रदेश विधानसभा के दो पूर्व अध्यक्ष, ईश्वर दास रोहानी के बेटे अशोक लोहानी और बृजमोहन मिश्रा की बेटी अर्चना चिटणीस को क्रमशः जबलपुर छावनी और बुरहानपुर से टिकट मिला है. चिटणीस ने मंत्री के रूप में भी कार्य किया हैं.

इसके अलावा, वर्तमान और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों ने भी अपने बच्चों, भाई-बहनों या रिश्तेदारों के लिए टिकट हासिल किए हैं. जैसे, सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत के बेटे जितेंद्र गहलोत को (आलोट) से और पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोढ़ी को (खरगापुर) से टिकट मिला है. पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा को अपनी पत्नी नीता वर्मा (धार) और प्रहलाद पटेल के भाई जालान सिंह पटेल (नरसिंहपुर) को भी टिकट मिला है.

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शेष 30 उम्मीदवारों में मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्रियों, वर्तमान सांसदों या विधायकों के बेटे, बेटियां या भाई बहन हैं, जिसमें बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं.

कांग्रेस उम्मीदवार

Digvijay Singh

बीजेपी की तुलना में, इस बार कांग्रेस की संख्या इस मामले में कम है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे जयवर्धन सिंह के लिए टिकट सुरक्षित किया है, जो राघोगढ़ के मौजूदा विधायक हैं. उनके भाई लक्ष्मण सिंह, पूर्व सांसद और विधायक और भतीजे प्रियव्रत सिंह को भी टिकट मिला है.

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह चुरहट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह के कैबिनेट के पूर्व मंत्रियों के बच्चों और रिश्तेदारों को भी टिकट दिए हैं. इसमें सत्यदेव कटारे के बेटे हेमंत कटारे, हजारील रघुवंशी के पुत्र ओमप्रकाश रघुवंशी, जमुना देवी के भतीजे उमंग, इंद्रजीत पटेल के बेटे कमलेश्वर पटेल और महेदरा सिंह कालुखेड़ा के भाई केके कालुखेड़ा शामिल हैं. यूपीए सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने अपने बेटे विक्रांत भूरिया, जो पेशे से चिकित्सक है और भतीजी कलावती भूरिया को क्रमशः झाबुआ और जोबाट से टिकट दिलवाए हैं.

पार्टी ने राज्यसभा सदस्य सत्यव्रत चतुर्वेदी के भाई आलोक चतुर्वेदी को खजुराहो से टिकट दिया है. सत्यव्रत चतुर्वेदी को 19 नवंबर को कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था.

दिग्विजय सिंह के कैबिनेट में पूर्व डिप्टी सीएम रहे स्वर्गीय सुभाष यादव के बेटे अरुण यादव और सचिन यादव को क्रमशः बुधनी और कसरवाड से चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिले हैं. पूर्व एमपीसीसी अध्यक्ष और यूपीए के पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव मुख्यमंत्री चौहान के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे. यह सीट चौहान के लिए घरेलू मैदान मानी जाती है.

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एआईसीसी के एक विस्तृत सत्र के दौरान, मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था, 'हमें संगठन को बदलना होगा. हमारे पास कार्यकर्ता है, जिन्हें पीछे धकेल दिया गया है. उनके पास देश को बदलने की ऊर्जा है. लेकिन उनके और नेताओं के बीच एक दीवार है. मेरा पहला काम उस दीवार को तोड़ना है. टिकट वितरित करते समय उन्हें वरीयता दें.' लेकिन हकीकत में, नेताओं द्वारा किए गए दावे अलग हैं.

बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने दावा किया है कि 'जीत' जैसे फैक्टर के आधार पर उम्मीदवारों को टिकट दिए गए हैं. भोपाल स्थित राजनीतिक टिप्पणीकार गिरिजा शंकर कहते हैं,'इससे पहले भी कांग्रेस और बीजेपी ने नेताओं के बेटों, बेटियों या करीबी रिश्तेदारों को टिकट दिए थे. आखिरी चुनाव में बीजेपी ने करीब 20 टिकट दिए थे. लेकिन इस चुनाव में यह संख्या सर्वाधिक है.' उन्होंने कहा, 'यह विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए पिछले 15 वर्षों में सबसे अधिक कठिन है, जबकि कांग्रेस पार्टी के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है.'

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