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मध्यप्रदेश चुनाव: सिंधिया आगे चल रहे हैं फिर भी कमलनाथ को घेर रही है बीजेपी

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ अब तक चुनाव के लिए अपनी टीम तय नहीं कर पाए हैं वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी परिवर्तन रैली की पूरी तैयारी कर ली है

Updated On: May 09, 2018 08:27 AM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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मध्यप्रदेश चुनाव: सिंधिया आगे चल रहे हैं फिर भी कमलनाथ को घेर रही है बीजेपी

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ अब तक चुनाव के लिए अपनी टीम तय नहीं कर पाए हैं. राज्य कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर लाने की कोई पहल भी अभी होती हुई दिखाई नहीं दी है. जबकि दूसरी ओर मध्यप्रदेश कांग्रेस की कैंपेन कमेटी के चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया की परिवर्तन यात्रा 11 मई को उज्जैन से शुरू हो रही है. इस यात्रा में मध्यप्रदेश कांग्रेस के दूसरे बड़े नेताओं की मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. माना यह जा रहा है कि कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी कांगे्रस के नेताओं के आपसी मतभेद अभी भी बरकरार हैं.

कमलनाथ ने राज्य का दौरा भी शुरू नहीं किया है

कमलनाथ,मध्यप्रदेश कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संभवत: इस उम्मीद में उन्हें राज्य की कमान सौंपी होगी कि वे सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर ले आएंगे. एक मई को कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का काम संभाला. इस दिन उन्होंने एक बड़ी रैली निकाल कर अपनी ताकत का प्रदर्शन भी किया. उनकी रैली में प्रदेश कांग्रेस के सभी बड़े नेता मौजूद भी थे. इसके बाद कोई भी नेता सक्रिय दिखाई नहीं दिया.

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कमलनाथ को अपनी टीम बनाने में भी काफी कवायद करना पड़ रही है. राज्य में विधानसभा के आम चुनाव साल के अंत में होना है. सत्ताधारी दल बीजेपी लगातार चौथी बार सरकार बनाने के लिए राज्य भर में अलग-अलग कार्यक्रम कर रही है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह कार्यभार ग्रहण करने के बाद राज्य के दौरे पर निकल गए हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी भोपाल का एक चक्कर लगाकर चले गए हैं.

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अमित शाह ने बीजेपी की राज्य इकाई की विस्तारित कार्यसमिति को बैठक को भी संबोधित किया था. जबकि कमलनाथ अब तक कांग्रेस का कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं बना पाए हैं. कमलनाथ के सामने सबसे बड़ी समस्या पार्टी के संगठन को लेकर आ रही है. राज्य में पिछले पंद्रह साल से कांग्रेस सत्ता से बाहर है. इन पंद्रह सालों में कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गए हैं. कई जिलों में पार्टी के जिला अध्यक्ष भी नहीं हैं. जिन जिलों में अध्यक्ष हैं, वे विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं. कमलनाथ ने टिकट के दावेदार जिला अध्यक्षों से पद छोड़ने के लिए कहा है. प्रदेश कांग्रेस की कार्यसमिति पहले ही भंग की जा चुकी है. अनुशांगिक संगठन भी नए अध्यक्ष की चुनावी रणनीति सामने आने का इंतजार कर रहे हैं.

परिवर्तन यात्रा पर निकल रहे हैं सिंधिया

कमलनाथ पहली बार राज्य की राजनीति में सक्रिय हुए हैं. उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के बाहर कोई विशेष राजनीतिक गतिविधि भी नहीं रखी. प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद कमलनाथ को यह स्थापित भी करना पड़ रहा है कि वे बाहरी नेता नहीं हैं. कमलनाथ का भोपाल में सरकारी बंगला है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद वे तीन दिन इस बंगले में रुके, फिर छिंदवाड़ा चले गए. कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने भोपाल दौरे में सरकारी गेस्ट हाउस में रुकते हैं.

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सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस की कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है. इस कारण यह माना गया कि कमलनाथ-सिंधिया की जोड़ी प्रदेश में चुनाव की रणनीति तैयार करेगी. दोनों नेताओं ने अब तक कोई संयुक्त बैठक भोपाल में नहीं की है. कमलनाथ, अकेले ही नजर आ रहे हैं.

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों और इंटक की बैठक में भी सिंधिया मौजूद नहीं थे. कमलनाथ ने कुछ नेताओं का पार्टी से निष्कासन भी समाप्त किया है. इनमें पूर्व विधायक राजनारायण पूनिया भी शामिल हैं.

पूनिया, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के समर्थक हैं. कमलनाथ के लिए पर्दे के पीछे रणनीति दिग्विजय सिंह ही तैयार कर रहे हैं. उन्होंने घर बैठे अपने पुराने साथियों को सक्रिय होने के लिए कहा है. कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें किसके साथ चलना है.कमलनाथ या ज्योतिरादित्य सिंधिया.

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सिंधिया 11 मई से अपना चुनाव अभियान उज्जैन से शुरू कर रहे हैं. परिवर्तन रैली की शुरुआत भी इसी के साथ होगी. अगले दिन वे धार और फिर इंदौर में भी रैली करने वाले हैं. इस परिवर्तन रैली में कमलनाथ की भूमिका को लेकर भी संशय है. कमलनाथ का कार्यक्रम अभी तक जारी नहीं हुआ है.

कमलनाथ के नेतृत्व से बीजेपी की उम्मीद जगी

कमलनाथ, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना मित्र बताते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ मित्र लायक होते हैं और कुछ नालायक. कमलनाथ के इस बयान के बाद बीजेपी नेता सक्रिय हो गए. भोपाल के सांसद आलोक संजर ने कहा कि कमलनाथ को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका जवाब शायराना अंदाज में दिया है. उन्होंने कहा कि हाथों की रेखाएं हमारी खास हैं, तभी तो आप जैसा दोस्त हमारे पास है.

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दरअसल मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी, कमलनाथ को चुनाव में किसी भी तरह की चुनौती नहीं मान रही है. राज्य के जल संसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि मुख्यमंत्री पैंतालीस डिग्री के तापमान में प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और जनता से मिल रहे हैं. दूसरी ओर कमलनाथ फेसबुक, ट्विटर पर चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस की स्थिति पर कटाक्ष करता एक ऐसा वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री चौहान को अंगद के रूप में दिखाया गया है. इस वीडियो में कांगे्रस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ को रावण और ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरुण यादव को उनका दरबारी बताया गया है. कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने कहा कि इस आपत्तिजनक वीडियो को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है.

तय नहीं हुई चार कार्यकारी अध्यक्षों की भूमिका

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस में चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए थे. ये कार्यकारी अध्यक्ष जातीय संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से तय किए गए गए.

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कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए सर्वश्री रामनिवास रावत, जीतू पटवारी,बाला बच्चन और सुरेन्द्र चौधरी की भूमिका को लेकर भी असमंजस की स्थिति है. चारों कार्यकारी अध्यक्ष अपनी जिम्मेदारी तय होने का इंतजार कर रहे हैं. सुरेन्द्र चौधरी को छोड़कर अन्य तीन कार्यकारी अध्यक्ष विधायक है. इन तीनों को फिर से चुनाव मैदान में जाना है. इस कारण इनकी रुचि सिर्फ क्षेत्र की गतिविधियों में ही है.

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