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मंदसौर: शहादत का दर्द नहीं वोटों की चिंता में किसानों को अपने पक्ष में करने की चल रही खींचतान

किसानों पर राजनीति कर रही पार्टियों में किसी को भी शायद किसानों की चिंता नहीं है. दरअसल सारी कवायद वोटों को अपनी तरफ खींचने की लिए किसान हितैषी प्रदर्शित करने की चल रही है.

Dinesh Gupta Updated On: Jun 01, 2018 10:05 AM IST

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मंदसौर: शहादत का दर्द नहीं वोटों की चिंता में किसानों को अपने पक्ष में करने की चल रही खींचतान

अपनी उपज का वाजिब दाम की मांग कर रहे 6 किसानों के पुलिस की गोली से मारे जाने के बाद चर्चा में आया मंदसौर अब किसान राजनीति का बड़ा अखाड़ा बन गया है. पूरे मंदसौर जिले में पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात है. अश्रु गैस के गोले से लेकर बंदूक की गोली तक से पुलिस बल सुसज्जित है. चंद माह बाद राज्य में विधानसभा के आम चुनाव होना है. चुनाव से पहले आई गोलीकांड की इस बरसी में किसानों की शहादत और उनकी समास्याएं कहीं गुम हो गई हैं. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच किसान वोटरों को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए जबरदस्त जोर-अजमाइश चल रही है.

मुख्यमंत्री का आरोप-कांग्रेस करना चाहती है खून खराबा

मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के सूत्रधार शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्काजू हैं. शिवकुमार शर्मा राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष हैं. इस संगठन के अस्तित्व में आने से पहले कक्काजू राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ के प्रांताध्यक्ष थे.

2013 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले रायसेन जिले के बरेली में किसानों ने शर्मा के नेतृत्व में आंदोलन किया था. आंदोलन में पुलिस फायरिंग से एक किसान की मौके पर ही मौत हो गई थी. घटना के बाद कक्काजू को भारतीय किसान संघ से हटा दिया गया. हिंसा फैलाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. वे दो माह जेल में रहे.

इस घटना से पहले शर्मा वर्ष 2010 में उस वक्त पहली बार सुर्खियों में आए थे, जब उनके नेतृत्व में किसानों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर तीन दिन तक पूरे भोपाल को अस्त-व्यस्त कर दिया था. एक जून से किसानों की हड़ताल का नेतृत्व भी शिव कुमार शर्मा ही कर रहे हैं. किसानों की हड़ताल दस जून तक चलेगी.

इन दस दिनों के बीच ही छह जून को मंदसौर पुलिस फायरिंग का एक साल पूरा हो रहा है. कांग्रेस ने 6 जून को ही मंदसौर में राहुल गांधी की सभा का आयोजन किया है. इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बुधवार की रात मंदसौर में ही गुजारी. उन्होंने वहां एक सभा भी की.

SHIVRAJ

सभा में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर खून खराबा करने का षड्यंत्र करने का आरोप लगाते हुए कहा कि-शांति के टापू मेरे प्रदेश को बचा लो. उन्होंने किसानों से पूछा कि क्या वे मेरा(शिवराज सिंह चौहान)साथ देने को तैयार हैं. किसानों के हां कहने के बाद मुख्यमंत्री ने सभा में सरकार द्वारा किसानों के हितों के लागू की गईं योजनाओं ब्यौरा दिया.

इसके जवाब में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा कि-कितना शर्मनाक है कि जिन लोगों की सरकार में किसानों के सीने पर गोलियां दागी गईं, उनका खून बहाया गया... वो आज कांग्रेस पर खून-खराबा फैलाने का आरोप लगा रहे हैं. कमलनाथ ने कहा कि प्रतिदिन ऐसी बयानबाजियां कर मुख्यमंत्री खुद अराजकता फैला रहे हैं व माहौल बिगाड़ रहे हैं.

अफसर कर रहे हैं किसानों की आवभगत

मंदसौर के किसान आंदोलन के केन्द्र में आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने शांति बनाए रखने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं. लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. बड़े पैमाने पर पुलिस बल भी तैनात किया गया है. किसान संगठनों की घोषणा दस दिन तक गांव बंद रखने की है. मंदसौर में लहसुन और प्याज के अलावा अफीम की खेती भी होती है. अफीम के तस्कर भी प्राय: इस इलाके में सक्रिय देखे जाते हैं. पुलिस गांव-गांव में यह पता लगाने में जुटी है कि कोई बाहरी लोग तो आकर नहीं ठहरे हैं.

किसानों के प्रति अफसर नरम रवैया अपनाए हुए हैं. अपनी उपज बेचने के लिए मंडी आ रहे किसानों को ठंडा पानी और छाछ पिलाया जा रहा है. मंडी परिसर में छांव के लिए टेंट लगा दिए गए हैं. मंदसौर में इस साल प्याज एवं लहसुन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है. सरकार प्याज एवं लहसुन की खरीदी भावांतर योजना के तहत कर रही है. किसानों को आठ रुपए का बोनस भी दिया जा रहा है. मंदसौर मंडी के बाहर सैकड़ों ट्राली प्याज और लहसुन से भरी हुई कतार में हैं. लेकिन, हड़ताल को लेकर चिंता सभी के माथे पर दिखाई दे रही है. पिछले साल की हिंसा से डरे लोगों ने दूध और सब्जी का स्टॉक करना शुरू कर दिया है.

प्रशासन के दबाव में व्यापारी लोगों को दो किलो दूध और दो किलो सब्जी से ज्यादा एक व्यक्ति को नहीं दे रहे हैं. प्रशासन इस कोशिश में लगा हुआ है कि किसान आम दिन की तरह ही सब्जी और दूध की सप्लाई करता रहे. अब तक किसान गांव से बाहर निकलने को तैयार नहीं हो रहे हैं. पिछले साल पुलिस फायरिंग में बरखेड़ा पंथ गांव के अभिषेक की भी मौत हुई थी.

इस गांव के लोग आज भी उस दिन को नहीं भूले हैं. गांव के लोगों ने तय किया है कि दस दिन तक गांव से बाहर नहीं जाएंगे. बालागुड़ा के किसान संतोष पाटीदार ने कहा कि पिछले साल की इतनी बड़ी घटना के बाद भी किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं. उपज का दाम भी नहीं मिल रहा है.

राहुल गांधी की सभा में मृतकों के परिजनों को लाने की कोशिश

Rahul Gandhi addresses media

राहुल गांधी इन दिनों विदेश में हैं. लेकिन, वे वहां से लगातार मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेताओं के संपर्क में हैं 6 जून को राहुल गांधी की मंदसौर में सभा है. राहुल गांधी पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देंगे. प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राहुल गांधी की सभा में दो लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है. प्रदेश कांग्रेस के सभी बड़े नेता इस सभा में मौजूद रहेंगे.

इस सभा को कांग्रेस के चुनाव अभियान की शुरुआत भी माना जा रहा है. राहुल गांधी की सभा को सफल बनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चार कार्यवाहक अध्यक्ष मंदसौर जिले के गांव-गांव में लोगों से संपर्क कर रहे हैं.

कांग्रेस के नेता इस कोशिश में हैं कि पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों के परिजन भी इस सभा में आएं. कांग्रेस के नेताओं ने अपनी इसी कोशिश के तहत फायरिंग में मारे गए नाबालिग अभिषेक के परिजनों से राहुल गांधी की फोन पर बात कराई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र में सक्रिय होने के बाद कांग्रेस के लिए भीड़ जुटाने में थोड़ी मुश्किल आ रही है. प्रशासन की कोशिश है कि किसान अपनी हड़ताल के दौरान 6 जून को भी गांव में ही रहें. सभा में हिस्सा लेने के लिए भी गांव से न निकलें.

किसान आंदोलन की दृष्टि से सरकार ने प्रदेश के 18 जिलों को अति संवेदनशील जिलों की श्रेणी में रखा है. पुलिस प्रशासन ने किसानों के दस दिन के इस आंदोलन को ऑपरेशन 240 घंटे का नाम दिया है. इन 240 घंटों में पुलिस बल को हाई अलर्ट पर रखा जा रहा है. दूसरी ओर आंदोलन के नेता शिव कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन किसानों का है. इसलिए राजनीतिक दलों को मंच नहीं देंगे. लेकिन अगर कोई साथ आना चाहता है तो आंदोलन में भाग ले सकता है लेकिन राजनीति नहीं करने देंगे.

शर्मा ने कहा कि दस दिन शहरवासियों के लिए हम गांवों में ही दुकानें, स्टॉल लगाकर फल, सब्जी व दूध बेचेंगे. किसानों का यह आंदोलन ऋण माफी, लागत मूल्य का डेढ़ गुना दाम, फल, सब्जी और दूध का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य तथा छोटे किसानों की आय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर है. इस आंदोलन के तहत संगठन ने 6 जून को मंदसौर में श्रद्धांजलि सभा रखी है. राहुल गांधी श्रद्धांजलि देने आ रहे हैं.

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