S M L

मध्य प्रदेश: अफसरों ने फैलाई थी 'भारत बंद' के दौरान हिंसा

सहायक आबकारी आयुक्त बृजेन्द्र कोरी और खनिज अधिकारी सोहन सलामे बंद समर्थक भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे

Dinesh Gupta Updated On: Apr 07, 2018 09:36 AM IST

0
मध्य प्रदेश: अफसरों ने फैलाई थी 'भारत बंद' के दौरान हिंसा

दो अप्रैल को 'भारत बंद' के दौरान मध्य प्रदेश के कई जिलों में हुई हिंसा के पीछे अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की विधानसभा के आम चुनाव को लेकर चिंता और बढ़ गई है. बंद के दौरान सबसे ज्यादा हिंसा ग्वालियर एवं चंबल संभाग में हुई थी. आदिवासी क्षेत्र बालाघाट में भी हिंसा हुई लेकिन, किसी की जान नहीं गई. ग्वालियर-चंबल संभाग की हिंसा में 7 लोगों की मौत हुई है.

बंद के दौरान हुई हिंसा को जातिवादी संघर्ष की शुरूआत माना जा रहा है. मध्य प्रदेश में इस तरह का वर्ग संघर्ष पहले कभी नहीं देखा गया. पुलिस की अब तक की जांच में राजनीतिक साजिश के साक्ष्य सामने नहीं आए हैं. बालाघाट और भिंड दोनों ही राज्य के दो अलग-अलग छोरों पर स्थित हैं. भिंड में जहां अनुसूचित जाति वर्ग की अधिकता है वही बालाघाट आदिवासी इलाका है. पिछड़ा वर्ग प्रभावी भूमिका में है.

बालाघाट में आबकारी और खनिज अफसर के खिलाफ एफआईआर मध्य प्रदेश  के बालाघाट जिले की सीमाएं महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य से लगी हुईं हैं. इस जिले में पिछले कुछ माह से नक्सली गतिविधियां भी तेज देखी गईं हैं. इस आदिवासी जिले में दो दशक पूर्व नक्सलियों ने राज्य के मंत्री लिखिराम कांवरे की हत्या कर दी थी. छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बन जाने के बाद नक्सली गतिविधियां लगभग समाप्त हो गईं थीं.

प्रदर्शनकारियों ने रेल की पटरियां उखाड़ दीं. इससे रेल यातायात पर बुरा असर देखने को मिला (फोटो: पीटीआई)

हाल ही में सुकमा में हुई घटना के बाद नक्सली इस इलाके में फिर से देखे जाने लगे हैं. बंद के दौरान बालाघाट में तैनात सहायक आबकारी आयुक्त बृजेन्द्र कोरी और खनिज अधिकारी सोहन सलामे जबरन दुकानें बंद कराते देखे गए. प्रदेश में सबसे पहले हिंसा की वारदात भी बालाघाट में ही रिपोर्ट हुई थी. व्यापारियों और आंदोलनकारियों के बीच टकराव दुकानों को बंद कराने को लेकर हुआ था.

ये भी पढ़ेंः राजस्थान की इस बस्ती में दलित अब इस्लाम को लगाना चाहते हैं गले

सहायक आबकारी आयुक्त बृजेन्द्र कोरी और खनिज अधिकारी सोहन सलामे बंद समर्थक भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे. सरकारी रिकार्ड में ये दोनों अधिकारी निजी कारणों से दो दिन के अवकाश पर थे. बालाघाट पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए जब वीडियो फुटेज खंगाले उसमें इन दोनों अधिकारियों के चेहरे सामने आए.

बालाघाट रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जी. जर्नादन ने बताया कि इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ दुकान में जबरन घुसने, बलवा,मारपीट करने और शासकीय कार्य में बाधा डालने के अलावा धमकाने की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है. बलबा फैलाने के आरोपी बृजेन्द्र कोरी का दावा है कि वे घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे.

Dalit Maratha Clash

भिंड की घटनाओं के पीछे भी सरकारी अफसर

'भारत बंद' के दौरान भिंड में 3 लोगों की मौत गोली लगने से हुई थी. भिंड में हिंसा के लिए भीड़ को उकसाने के पीछे भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है. भिंड के कलेक्टर इलैया टी राजा ने पुलिस मुख्यालय और राज्य सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में सहायक कोषालय अधिकारी महेश वर्मा सहित चार कर्मचारियों के नामों का उल्लेख किया है.

इन चारों को हिंसा फैलने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. तीन कर्मचारी सुरेश कौशल, योगेश गुप्ता तथा भृत्य प्रवेश कुमार को निलंबित कर मामला दर्ज किया गया है. वर्मा को सरकार ने निलंबित कर दिया है. उनके खिलाफ भी आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. ग्वालियर-चंबल अंचल में हुए वर्ग संघर्ष में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर राज्य के मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह और पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौर कर हालात का जायजा लिया है.

ये भी पढ़ेंः SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ है

ग्वालियर की हिंसा में एक मौत आपसी रंजिश निकालने के उद्देश्य से किया जाना पाया गया है. ग्वालियर-चंबल अंचल में अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं. इस वर्ग के मतदाताओं में बहुजन समाज पार्टी की पैठ अधिक है. चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के उम्मीदवार की मौजदगी नतीजों को प्रभावित करती रही है. भिंड की लोकसभा सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है.

इस सीट पर बीजेपी से भागीरथ प्रसाद सांसद हैं. इलाके में जातिगत आधार पर विभाजन साफ दिखाई देता है. दो अप्रैल की हिंसा में बीजेपी की जिला मंत्री और पूर्व जनपद अध्यक्ष संजू जाटव के पति गजराज जाटव की भूमिका भी सामने आई है. उनकी गिरफ्तारी पर पुलिस ने दस हजार रूपए का ईनाम भी घोषित किया है.

तीन बार से लगातार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान की छवि किसान और गरीब हितैषी है

पदोन्नति में आरक्षण है टकराव की वजह

अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के भारत बंद में सरकारी अधिकारियों में कर्मचारियों द्वारा हिंसा को बढ़ावा देने के पीछ पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर सरकार के रवैये को जिम्मेदार माना जा रहा है. राज्य में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में भी आरक्षण दिया जाता था. आरक्षण की यह व्यवस्था दिग्विजय सिंह के शासनकाल में शुरू हुई थी. वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की मुख्य वजह पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को ही माना गया था.

डेढ़ वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक करार देते हुए नियमों को निरस्त कर दिया था. हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. सरकार की याचिका अभी भी सुप्रीम कोर्ट में ही लंबित है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को लगातार यह आश्वासन दे रहे हैं कि वो नए नियम बनाकर पदोन्नति में आरक्षण को पुन: लागू करेंगे. चुनाव नजदीक होने के कारण शिवराज सिंह चौहान नए नियम बनाने की हिम्मत भी नहीं कर पा रहे हैं और बिना आरक्षण के पदोन्नति भी नहीं कर रहे हैं.

ये भी पढ़ेंः SC/ST के खिलाफ अत्याचारों पर चुप क्यों हैं पीएम: राहुल

पदोन्नति न होने के कारण अधिकांश विभागों के मुखिया प्रभारी के तौर पर काम कर रहे हैं. पदोन्नति न होने से सामान्य वर्ग के कर्मचारी भी नाराज हैं. हिंसा में शामिल जिन कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है वे अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संगठन (अजाक्स) के सदस्य हैं. अजाक्स के अध्यक्ष मुख्यमंत्री के करीबी आईएएस अधिकारी जेएन कंसोटिया हैं. कंसोटिया कहते हैं कि कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को भी नहीं है.

सपाक्स लगा रहा है पक्षपात का आरोप

राज्य के सामान्य प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य भिंड जिले की गोहद विधानसभा क्षेत्र के विधायक है. वे अनुसूचित जाति वर्ग के हैं. सामान्य प्रशासन विभाग ही सरकार के सेवा एवं पदोन्नति नियम तैयार करता है. सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग अधिकारी और कर्मचारी संगठन (सपाक्स) का आरोप है कि आर्य वर्ग भेद के आधार पर ही उनके संगठन को मान्यता देने संबंधी फाइल पर अड़गे लगा रहे हैं.

सपाक्स के अध्यक्ष आईएएस अधिकारी राजीव शर्मा हैं. राजीव शर्मा कहते हैं कि हमारी लड़ाई में हिंसा की कोई जगह नहीं है. सपाक्स ने दस अप्रैल के 'भारत बंद' बंद को भी समर्थन देने से इनकार कर दिया है. सरकारी कर्मचारियों के बीच शुरू हुए वर्ग संघर्ष ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की दिक्कतें बढ़ा दी हैं. वो जल्द से जल्द हालात सामान्य करने का रास्ता तलाश कर रहे हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi