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मध्यप्रदेश चुनाव नतीजे: कांग्रेस के लिए वो लकी 7, जिनकी मदद से बनेगी सरकार

कांग्रेस 114 सीटों के साथ मध्यप्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी पर बहुमत से फिर भी दो सीट दूर थी

Updated On: Dec 12, 2018 01:35 PM IST

FP Staff

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मध्यप्रदेश चुनाव नतीजे: कांग्रेस के लिए वो लकी 7, जिनकी मदद से बनेगी सरकार

Madhya Pradesh Assembly Elections 2018: मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है. पूरी रात नतीजे आते रहे. सस्पेंस बरकरार रहा. फिर कहीं जा के सुबह फाइनल हुआ कि सरकार कांग्रेस की बन रही. कांग्रेस 114 सीटों के साथ मध्यप्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी पर बहुमत से फिर भी दो सीट दूर थी. लेकिन जल्द ही ये परेशानी भी दूर हो गई, क्योंकि मायावती, अखिलेश यादव और चारों निर्दलियों ने कांग्रेस को समर्थन का ऐलान कर दिया. इन सात सीटों की मदद से कांग्रेस ने बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल किया. आइए जानते हैं उन सात उम्मीदवारों के बारे में जिनके पास है, कांग्रेस की मध्यप्रदेश सरकार की चाभी...

- ठाकुर सुरेंद्र सिंह नवल सिंह: कांग्रेस के बागी नेता ठाकुर सुरेंद्र सिंह को पार्टी ने बुरहानपुर से टिकट देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उन्होंने पार्टी का साथ छोड़ अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया. उन्होंने इस सीट पर शिवराज सरकार में मंत्री अर्चना चिटनिस को पांच हजार से ज्यादा वोटों से हराया. लेकिन अंत में उन्होंने बागी तेवर त्याग सरकार बनाने में कांग्रेस का साथ दिया.

- विक्रम सिंह राणा: कांग्रेस की जीत में एक और बागी नेता विक्रम सिंह राणा ने भी अहम रोल प्ले किया है. पार्टी से नाराज राणा ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा. उन्होंने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि बीजेपी को भी सुसनेर सीट पर धूल चटा दी. राणा ने 27 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र सिंह बापू को हराया. जब कि बीजेपी उम्मीदवार मुरलीधर पाटीदार को तीसरे नंबर पर ढकेल दिया.

- केदार चिदाभाई डावर: कांग्रेस के तीसरे बागी नेता हैं केदार चिदाभाई. कांग्रेस से नाखुश केदार ने भी अकेले चुनाव लड़ा. उन्होंने खारगोन सीट से बीजेपी के जमनासिंह सोलंकी को 9,716 वोटों से हराया.

- प्रदीप अमृतलाल जायसवाल: कांग्रेस के चौथे बागी नेता और निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रदीप अमृतलाल जैसवाल ने भी मुश्किल की घड़ी में आखिरकार नाराजगी छोड़ पार्टी का साथ दिया. वारासियोनी सीट से उन्होंने जीत दर्ज की और कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया.

- ये तो बात हुई निर्दलियों की. अब बात करते हैं सपा-बसपा के तीन विधायकों की जिन्होंने कांग्रेस का काम आसान किया. आपको बता दें कि मध्यप्रदेश चुनाव में सपा ने सिर्फ एक और बसपा ने महज दो सीटें ही जीतीं. लेकिन उनकी ये तीनों सीटें कांग्रेस के लिए वर्दान साबित हुई हैं. सपा के राजेश कुमार ने पार्टी के लिए एकमात्र सीट जीती और बीएसपी के लिए संजीव सिंह और रामबाई गोविंद ने जीत दर्ज की.

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