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मध्य प्रदेश: 15 वर्षों की शिवराज सरकार को बेदखल करने का ये है राहुल गांधी का प्लान

राहुल पहले चरण में मध्य प्रदेश के नीमच-मांडवा-धार क्षेत्र का दौरा करेंगे. इसमें 22 विधानसभा सीटें कवर की जाएंगी

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Aug 02, 2018 10:16 AM IST

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मध्य प्रदेश: 15 वर्षों की शिवराज सरकार को बेदखल करने का ये है राहुल गांधी का प्लान

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सितंबर के पहले हफ्ते में चुनाव के लिए तैयार मध्य प्रदेश के पवित्र शहर ओमकारेश्वर से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे. मंगलवार को मध्य प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं को एकजुटता की ताकत दिखाने और साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने का संदेश देने के बाद राहुल ने अपनी चुनाव प्रचार योजना को अंतिम रूप दिया.

प्लान के मुताबिक, राहुल पहले ओमकारेश्वर मंदिर जाएंगे. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है.

इमरजेंसी बैठक में राहुल ने की प्रचार की रणनीति पर चर्चा

पार्टी कार्यकर्ताओं के एक समूह द्वारा कथित रूप से 29 जुलाई को रीवा में मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया से बदसलूकी के बाद राहुल ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मंगलवार को अपने 12 तुगलक लेन निवास पर आपात बैठक बुलाई थी. बैठक में बाबरिया, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष कमलनाथ, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया, नेता विपक्ष अजय सिंह, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष अरुण यादव और दिग्विजय सिंह, अरुण पचौरी और विवेक तंखा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हुए.

शिकायतों के निबटारे की पृष्ठभूमि में हुई इस बैठक में, कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव अभियान में शामिल किए जाने वाले राज्य के निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार की रणनीति पर नेताओं के साथ विस्तार से चर्चा की.

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, 'पीसीसी अध्यक्ष ने बताया है कि राहुल जी सितंबर के पहले हफ्ते में मध्य प्रदेश चुनाव के लिए ओमकारेश्वर से, जो कि मेरा चुनाव क्षेत्र है, अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे.'

ओंकारेश्वर मंदिर.

ओंकारेश्वर मंदिर.

अपने चुनाव अभियान के तहत, कांग्रेस अध्यक्ष पहले तीन चरणों में चार लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में जाएंगे.

वह बताते हैं. 'कांग्रेस अध्यक्ष के साथ बैठक में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के आगामी चुनाव के लिए योजना और अभियान की रणनीति पर ध्यान दिया गया. अपने दौरे की प्लानिंग के अलावा, राहुल जी ने राज्य में जमीनी हालात, मुद्दों और पार्टी चुनाव में कैसे आगे बढ़ेगी, इन बातों के बारे में जानकारी ली.'

पहले चरण में कवर की जाएंगी 22 सीटें

प्लान के मुताबिक, राहुल पहले चरण में मध्य प्रदेश के नीमच-मांडवा-धार क्षेत्र का दौरा करेंगे. इसमें 22 विधानसभा सीटें कवर की जाएंगी. गुजरात और कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान भी, राहुल ने अपनी चुनावी अभियान रणनीति के तहत मंदिरों का दौरा किया था, और इस कदम को उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ कहा गया था.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के एक सूत्र का कहना था कि 'कांग्रेस अध्यक्ष सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड खेलने के लिए मंदिर नहीं जाते हैं. यहां तक कि गुजरात और कर्नाटक चुनावों से पहले भी, उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान मंदिरों का दौरा किया था. लेकिन चूंकि यह मीडिया की नजरों से बाहर रहा, इसलिए इस पर किसी ने बात नहीं की. राहुल ओमकारेश्वर के अलावा, अन्य जिलों के मंदिरों का भी दौरा कर सकते हैं.'

अगले तीन विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अहम

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान-बीजेपी शासित तीन राज्य जहां चुनाव होने जा रहे हैं- कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है. मध्य प्रदेश में पिछले 15 सालों से शिवराज सिंह चौहान की अगुआई वाली बीजेपी सत्ता में है. 2003 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में एक दशक लंबे कांग्रेस शासन के अंत के बाद, पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा को मजबूत चुनौती दे पाने में नाकाम रही है.

तब से भारत की सबसे पुरानी पार्टी राज्य में गुटबाजी और भितरघात से जूझ रही है. राज्य में अपने कुछ नेताओं की असंगत टिप्पणियों पर पार्टी को शर्मिंदगी और आलोचना का सामना करना पड़ा. बाबरिया का एपिसोड इनमें सबसे नया था.

कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर पद संभालने के बाद, राहुल ने पार्टी के नेताओं से किसी भी तरह की गुटबाजी को दफन कर देने और एकजुट होकर चुनाव में जुट जाने के लिए कहा था. केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव शुरू किए. राज्य में पार्टी की जीत की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इस साल अनुभवी नेता और छिंदवाड़ा के सांसद कमलनाथ और तुलनात्मक रूप से युवा गुना के सांसद सिंधिया को मध्यप्रदेश में प्रमुख जिम्मेदारियां दी गई हैं. पीसीसी ने चुनाव प्रचार का मोर्चा मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया और अन्य विकल्पों के इस्तेमाल की भी योजना तैयार की है.

कांग्रेस राज्य में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ सीटों की साझेदारी के बारे में भी विचार कर रही है.

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