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मध्य प्रदेश: 49% आबादी के बावजूद गंधवानी की आदिवासी महिलाओं को डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा का इंतजार

महिला वोटरों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद कई दूरस्थ क्षेत्रों में न महिला डॉक्टर हैं, न ही जरूरी महिला स्वास्थ्य सुविधाएं

Updated On: Nov 10, 2018 11:28 AM IST

Karishma S

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मध्य प्रदेश: 49% आबादी के बावजूद गंधवानी की आदिवासी महिलाओं को डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा का इंतजार
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गंधवानी एक कांग्रेस शासित विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें महिला मतदाताओं की बहुतायत है. हालांकि, यह विडंबना ही है कि गंधवानी में कोई महिला डॉक्टर नहीं है, जिस कारण महिलाओं को बुनियादी स्वास्थ्य सेवा पाने के लिए भी कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता है.

धार जिले में गंधवानी और कुक्षी कांग्रेस के कब्जे वाली दो विधानसभा सीटें हैं, जबकि बाकी विधानसभा सीटों- धार, मनावर, बदनावर, सरदारपुर और धर्मपुरी- पर बीजेपी विधायकों का कब्जा है. इन विधानसभा क्षेत्रों में महिला डॉक्टर भी हैं. कुक्षी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एकमात्र महिला डॉक्टर है, लेकिन सुविधाओं की कमी के चलते, अधिकांश रोगियों को कहीं और रेफर करना पड़ता है.

एक ही महिला डॉक्टर हफ्ते के सातों दिन, 24 घंटे ड्यूटी पर

कुक्षी सीएचसी पर तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमारी देवड़ा बताती हैं, 'चार ब्लॉक- बाग, दही, कुक्षी और निसारपुर - कुक्षी तहसील के तहत आते हैं और मैं यहां एकमात्र महिला चिकित्सक हूं. मैं हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे ड्यूटी पर हूं. अदालत जाने, एमएलसी बनाने जैसे प्रशासनिक कामों का भी जिम्मा मेरे ही पास है.'

डॉ. देवड़ा के अनुसार, सोनोग्राफी मशीनें या आईसीयू जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते गंभीर रूप से बीमार लोगों को कुक्षी से 30 किलोमीटर दूर बड़वानी जिला अस्पताल जाना पड़ता है. 'धार कुक्षी से कम से कम 100 किलोमीटर दूर पड़ता है, इसलिए हम मरीजों को बड़वानी जिले में रेफर करते हैं.'

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मध्य प्रदेश के धार जिले कांग्रेस के कब्जे वाली दो सीटों पर मतदाता अनुपात

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, गंधवानी में 1.1 लाख महिला मतदाता हैं, जो विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं का 49.8% है. गंधवानी के कांग्रेस नेता उमंग सिंघार राज्य सरकार द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र से किए जा रहे सौतेले बर्ताव का मुद्दा उठाते हुए कहते हैं कि बीजेपी के कब्जे वाले अन्य विधानसभा क्षेत्रों में हालात बेहतर हैं. उनका दावा है कि बीजेपी की रंजना बघेल के एसटी आरक्षित विधानसभा क्षेत्र मनावर में गंधवानी और कुक्षी के मुकाबले महिलाओं के लिए चिकित्सा सुविधाएं काफी बेहतर हैं.

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सिंघार का कहना है कि उन्होंने गंधवानी जाने को तैयार होने वाली किसी भी महिला डॉक्टर को प्रति माह एक लाख रुपए वेतन देने का ऐलान किया था. उनका कहना है कि चूंकि वह विपक्षी पार्टी से हैं, इसलिए उन्हें राज्य सरकार के हाथों नाइंसाफी का सामना करना पड़ा: वह बताते हैं 'राज्य सरकार ने कहा था कि वो राज्य में महिला डॉक्टरों की कमी के कारण महिला डॉक्टर भेजने में असमर्थ है.'

गंभीर हालात होने पर ही इलाज कराने जाती हैं महिलाएं

इस विधानसभा क्षेत्र में महिलाएं कठिन सफर से बचने के लिए जानबूझ कर डॉक्टर के पास जाने में देरी करती हैं. 'मामूली सी बीमारी होने पर भी हमें बरवानी, इंदौर या धार जाना होता है. हमारे यहां एक भी महिला डॉक्टर नहीं है. ज्यादातर महिलाएं डॉक्टरों के पास नहीं जातीं क्योंकि वे इतनी लंबी दूरी की यात्रा नहीं करना चाहती हैं और इस वजह से उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है. केवल जब हालत बहुत गंभीर हो जाती है, तभी वे इलाज के लिए दूसरे जिलों में जाती हैं.' यह कहना है 55 वर्षीय अनीता देवी का जिन्होंने कुछ महीने पहले यूटीआई इंफेक्शन होने पर गंधवानी से इंदौर की यात्रा की थी.

प्रतीकात्मक तस्वीर (विकीपीडिया से साभार)

प्रतीकात्मक तस्वीर (विकीपीडिया से साभार)

क्षेत्र की एक अन्य निवासी भंवरी बाई का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को यह पक्का करना होता है कि वे अपनी डिलीवरी की तारीख के करीब आने से पहले ही सफर का इंतजाम कर लें.

धार के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरसी पनिका का कहना है कि 'पूरे जिले में महिला डॉक्टरों की कमी है. फिर भी हमारे पास मनावर और कुक्षी में कम से कम एक महिला डॉक्टर है. जिस डॉक्टर को गंधवानी में तैनात किया गया था, उसने एक साल पहले इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद से पद खाली है. हमने गंधवानी में डॉक्टर की तैनाती के लिए सरकार को एक पत्र भेजा है और उम्मीद करते हैं कि जल्द बहाली हो जाएगी.' वह बताते हैं कि गंधवानी जैसे दूरदराज इलाकों में सुविधाओं की कमी के चलते महिला डॉक्टरों की यहां जाने में कोई दिलचस्पी नहीं है. वे आदिवासी क्षेत्रों की तुलना में जिला मुख्यालय और शहरों को पसंद करती हैं.

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मनावर में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका चौहान का कहना है कि, 'महिला डॉक्टरों की कमी के कारण, हम पर इन इलाकों के मरीजों का बोझ बढ़ गया हैं. हमारे पास हर रोज उमरबंद, गंधवानी और बकनेर से सैकड़ों रेफरल केस आते हैं, जिसके लिए हमें ज्यादा देर तक काम करना पड़ता है.'

यहां काम नहीं करना चाहतीं महिला डॉक्टर

यह मुख्य रूप से इसलिए है क्योंकि महिला डॉक्टर शहरी क्षेत्रों में काम करना पसंद करती हैं. चूंकि चौहान मनवार से हैं, इसलिए उनके लिए वहां एडजस्ट करना मुश्किल नहीं था, लेकिन उनके अनुसार गंधवानी में किसी महिला डॉक्टर के नहीं आने का मुख्य कारण यह है कि यह एक दूरस्थ इलाका है.

ऐसा ही हाल कांग्रेस विधायक वाले कुक्षी विधानसभा क्षेत्र का भी है. यहां केवल एक महिला डॉक्टर है, लेकिन एडवांस हेल्थकेयर सुविधाओं की कमी के चलते, मरीजों को दूसरे जिलों में भेजना पड़ता है. कुक्षी के कांग्रेस विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल कहते हैं कि 2013 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले शिवराज सिंह चौहान ने कुक्षी में एक सिविल अस्पताल बनाने की घोषणा की थी; हालांकि, इसका निर्माण पांच साल बाद अभी भी लंबित है. वह कहते हैं, 'जैसे ही मैं 2013 में इस क्षेत्र से विधायक बन गया, अस्पताल का निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया.'

डॉ. देवड़ा कहती हैं, 'सिविल अस्पताल की इमारत करीब-करीब तैयार हो चुकी है लेकिन इसे शुरू करने में समय लगेगा. हमारे यहां कोई एमडी नहीं है, यह भी एक बड़ी समस्या है.'

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बघेल कहते हैं कि इलाके में सिर्फ बुनियादी ढांचे में सुधार से क्षेत्र को मदद नहीं मिलेगी, जब तक कि डॉक्टर ऐसे इलाकों में काम करने के लिए तैयार न हों.

हालांकि, धार में बीजेपी जिला अध्यक्ष डॉ. राज बर्फा का दावा है कि ये आरोप झूठे हैं और एक महिला डॉक्टर कई वर्षों से कुक्षी में काम कर रही है. वह कहते हैं, 'कुक्षी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा दिया गया है, जो कि अब पूरा होने के चरण में है. सिविल अस्पताल में 90 बेड और इलाज के लिए जरूरी अत्याधुनिक मशीनरी होगी. गंधवानी में महिला डॉक्टर इसलिए नहीं हैं क्योंकि हाल ही में वहां की डॉक्टर का तबादला कर दिया गया है.'

झाबुआ और अलीराजपुर जिलों में भी 49 प्रतिशत से अधिक मतदाता महिलाएं हैं और आगामी चुनाव में यहां भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठने की उम्मीद है. चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही इन जिलों में स्वास्थ्य, स्वच्छता व पोषण, महिलाओं की सुरक्षा और शराब पर प्रतिबंध का मुद्दा जोर पकड़ रहा है.

(लेखक पत्रकारों के जमीन से जुड़े अखिल भारतीय नेटवर्क  101reporters.com की सदस्य हैं)

(फीचर्ड इमेज- प्रतीकात्मक तस्वीर, wiktionary से साभार)

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