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मध्य प्रदेश चुनाव: मालवा के किसानों ने बढ़-चढ़कर किया वोट, बीजेपी की हो सकती है छुट्टी

मालवा क्षेत्र में मतदान प्रतिशत 1.5 से 4.5 फीसद ज्यादा रहा है और विशेषज्ञों का मानना है कि ये सरकार के खिलाफ जा सकता है

Updated On: Dec 01, 2018 02:36 PM IST

Kashif Kakvi

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मध्य प्रदेश चुनाव: मालवा के किसानों ने बढ़-चढ़कर किया वोट, बीजेपी की हो सकती है छुट्टी

मध्यप्रदेश का मालवा का इलाका भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है. किसानों के विरोध-प्रदर्शन का मुख्य केंद्र मालवा का ही इलाका है और इस इलाके में 28 नवंबर को विधानसभा चुनावों के लिए रिकार्ड 84.19 फीसद की वोटिंग हुई.

इलाके के मंदसौर में 6 जून, 2017 को पुलिस ने किसानों पर गोलियां बरसाईं थीं. छह किसान मारे गए. इसके बाद मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, अगर मालवा, सिहोर और इंदौर के ग्रामीण इलाके में किसानों का विरोध भड़क उठा.

मालवा का इलाका मध्यप्रदेश में सबसे बड़ा है. सूबे में सत्ता के गलियारे और सिंहासन तक रास्ता इसी इलाके से होकर जाता है. मध्यप्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं. इनमें 66 सीटें सिर्फ मालवा के इलाके में पड़ती हैं. यह कुल सीटों का 30 प्रतिशत है, सो मालवा के इलाके में कोई पार्टी हार जाए तो फिर उसके लिए सूबे में सरकार बनाना तकरीबन नामुमकिन है.

पिछली बार सूबे में विधानसभा के चुनाव 2013 में हुए थे. पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले मालवा के इलाके में इस बार मतदान 1.5 से 4.5 प्रतिशत ज्यादा हुआ है. वोटिंग प्रतिशत में सबसे ज्यादा उछाल नीमच जिले (मंदसौर का पड़ोसी जिला) में देखने को मिला. यहां पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले 4.20 प्रतिशत ज्यादा वोट पड़े. मतदान में आए उछाल के मामले में दूसरे नंबर पर सिहोर रहा, जहां पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले में 4 प्रतिशत ज्यादा लोगों ने वोट डाले. इसी तरह, राज्य के चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि शाजापुर में पिछली बार के मुकाबले मतदान में 1.8 फीसद की उछाल आई है.

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कुल 230 सीटों वाली मध्यप्रदेश की विधानसभा के लिए मतदान 28 नवंबर की शाम को समाप्त हुआ. सूबे में मतदाताओं की कुल संख्या 5.4 करोड़ है और इनमें से 74.85 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने मतदान केंद्रों पर पहुंचे. राज्य के चुनाव आयोग के मुताबिक सूबे के चुनावी इतिहास के एतबार से इस बार सबसे ज्यादा संख्या (प्रतिशत मात्रा) में वोट पड़े हैं.

क्या रही मतदान में उछाल की वजह?

राजनीति के जानकारों और पत्रकारों की मानें तो किसानों के दबदबे वाले इलाके और अन्य ग्रामीण हिस्सों में मतदान में आए 4 प्रतिशत की उछाल को दरअसल सरकार के खिलाफ मतदाताओं के गुस्से का संकेत समझा जा सकता है.

मतदाता भावांतर भुगतान योजना के नाकाम होने से नाराज हैं. वे फसल बीमा योजना में आ रही अड़चन और निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य ना मिलने से रोष में हैं. किसानों को मंडी में ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मंदसौर में 6 जून 2017 को किसान दरअसल स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसमें पुलिस की गोली से छह किसान मारे गए. किसानों में इन सारी बातों को लेकर गुस्सा है.

वरिष्ठ पत्रकार एस ए पटेरिया का कहना है, 'बुंदेलखंड समेत किसानों के दबदबे वाले बाकी इलाकों में वोटिंग प्रतिशत में उछाल आना संकेत करता है कि मतदाता किसान से नाराज है क्योंकि बीजेपी की सरकार किसानों को खुश करने में नाकाम रही.'

उन्होंने आगे यह भी कहा कि 'अगर हम ग्रामीण और शहरी इलाके के मतदान प्रतिशत पर गौर करें तो बड़ा अंतर दिख पड़ेगा. मिसाल के लिए, शहरी इलाके की तुलना में इंदौर के ग्रामीण हलके में मतदाताओं ने बड़ी तादाद में वोट डाले हैं और दोनों के बीच अंतर करीब 4 से 5 प्रतिशत का है.'

दरअसल, मालवा का इलाका बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है और 2013 के विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी (तब गुजरात सूबे के मुख्यमंत्री) ने इस इलाके में 11 जनसभाएं की थीं और पार्टी ने भारी जीत दर्ज करते हुए कुल 66 में से 56 सीटें अपनी झोली में झटक ली थीं. कांग्रेस के हिस्से में बस 9 सीटें गईं और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई.

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लेकिन राजनीति विज्ञानी गिरिजाशंकर मत-प्रतिशत में आए उछाल को तनिक अलग नजरिए से देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लोगों में गुस्सा ज्यादा है और इसी कारण वोटिंग प्रतिशत में उछाल आई है तो सत्ताधारी पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. साल 2003 के विधानसभा चुनावों में ऐसा ही हुआ था. मतदाता कांग्रेस से नाराज थे और मतदान 2 प्रतिशत ज्यादा हुआ.

'लेकिन मध्यप्रदेश में मतदाताओं की निराशा को कांग्रेस गुस्से में तब्दील कर पाने में नाकाम रही है. मालवा के इलाके में मतदान का प्रतिशत बढ़ा जरूर है लेकिन मौके को भुना पाने में कांग्रेस के नाकाम होने से बहुत मुमकिन है कि सत्ताधारी पार्टी तमाम मुश्किलों और ऊंचे मतदान-प्रतिशत के बावजूद अपना यह किला बचा ले जाए.'

गुस्से की वजह

मंदसौर में हुई पुलिस फायरिंग के बाद किसान नेता शिवकुमार शर्मा ने 500 किसानों को साथ लेकर मालवा के इलाके के 300 से ज्यादा प्रखंडों का दौरा किया. उन्होंने मतदाताओं से अपील की थी कि वो बड़ी संख्या में बाहर आएं और अपना वोट डालें. शिवकुमार शर्मा का कहना है, 'मतदान के प्रतिशत में आई ये उछाल संकेत कर रही है कि सरकार बदल जाएगी. किसानों ने मौजूदा सरकार के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया है. साफ है कि बीजेपी सत्ता के गलियारे से बाहर कर दी जाएगी और कांग्रेस पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी.'

एक अन्य किसान-नेता और मंदसौर विरोध-प्रदर्शन के मुख्य आरोपी अमृतलाल पाटीदार ने कहा कि पिछले साल जब हमारे साथी किसान मारे गए तो मालवा के इलाके के किसानों ने एक बैठक में सौगंध खाई थी कि आने वाले चुनाव में इस किसान-विरोधी सरकार को अपने वोट से हराना है. मालवा के इलाके में 'बढ़-चढ़कर मतदान हुआ तो समझिए यह मतदाताओं के गुस्से का संकेत है.'

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मतदाताओं के आक्रोश का कारण पूछने पर अमृतलाल पाटीदार ने कई बड़ी वजहें गिनाईं. उन्होंने कहा कि मंदसौर में किसान के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार ने भावांतर भुगतान योजना चलाई लेकिन इसका फायदा व्यापारियों को पहुंचा किसानों को नहीं. इसके बाद मुख्य फसलों की कीमतों में गिरावट आई और कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक नीचे चली गईं. किसान पर गोली चलाने वाले पुलिस अधिकारियों को दंड देने की जगह उन्हें क्लीन चिट थमा दी गई. इसके अलावा, इलाके में अशांति फैलाने के आरोप मढ़कर हजारों निर्दोष किसानों को मुकदमे में फंसा दिया गया. इन मामलों को खत्म करने के चक्कर में किसान इधर से उधर दर-ब-दर भटक रहे हैं.

मसले पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला ने कहा, 'ये बात सच है कि किसान नाखुश हैं और सूखा-प्रभावित बुंदेलखंड समेत किसानों के दबदबे वाले अन्य इलाकों में हुआ भारी मतदान सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ जा सकता है.'

उन्होंने कहा कि 'कई जगहों पर तो लोगों ने बीजेपी को नेताओं को एकदम से खदेड़ भगाया है क्योंकि मौजूदा शासन से नाराज चल रहे हैं, दूसरे, भारी संख्या में मतदान हुआ है. इन दोनों ही बातों से पता चलता है कि नतीजे बीजेपी के विपरीत जा सकते हैं.'

भारी संख्या में हुए मतदान के मसले पर अपनी बात रखते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि, 'मतदाताओं का बड़ी संख्या में वोट डालना बताता है कि वो मौजूदा सरकार से नाराज हैं, मतदाता बीजेपी के मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकना चाहते हैं, वे कांग्रेस को सत्ता में लाना चाहते हैं.'

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बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए ट्वीट किया है कि 'भारी मात्रा में हुआ मतदान बीजेपी पर मतदाताओं के भरोसे का संकेत करता है, मतदाता बीजेपी को फिर से मौका देना चाहते हैं.'

मतों की गिनती 11 दिसंबर, 2018 को होनी है.

मालवा क्षेत्र में जिलावार मतदान-प्रतिशत

जिला        मतदान प्रतिशत(2013)       मतदान प्रतिशत (2018)

मंदसौर             79.78                              81.29

नीमच               78.04                              82.24

रतलाम             77.98                              81.90

राजगढ़             79.51                              82.79

अागर मालवा      79.73                              82.93

शाजापुर            81.14                              82.22

सिहोर               80.19                              84.19

उज्जैन               74.93                              76.61

इंदौर                70.61                               71.44

(आंकड़े का स्रोत: मध्यप्रदेश चुनाव आयोग)

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