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मध्य प्रदेश उपचुनाव: क्या बुआ के चक्रव्यूह में फंस पाएंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया?

यशोधरा राजे सिंधिया के चुनाव प्रचार में उतर आने के कारण यहां मुकाबला सिंधिया बनाम सिंधिया होता जा रहा है

Updated On: Feb 07, 2018 10:20 AM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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मध्य प्रदेश उपचुनाव: क्या बुआ के चक्रव्यूह में फंस पाएंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया?

कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता का मुकाबला करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोलारस एवं मुंगावली के विधानसभा के उप चुनाव में उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया का चेहरा आगे कर दिया है. यशोधरा राजे सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में खेल एवं युवक कल्याण मंत्री हैं. कोलारस में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनाव की पूरी जिम्मेदारी यशोधरा राजे सिंधिया को सौंप दी गई है.

पिछले तीन महीने से इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार दौरे और जनसभाएं कर रहे थे. मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में यशोधरा राजे सिंधिया मौजूद नहीं रहतीं थीं. पार्टी को उनकी अनुपस्थिति के कारण इस बात का जवाब देना मुश्किल हो रहा था कि सिंधिया परिवार एक है. कोलारस में पार्टी के उम्मीदवार बनाए गए देवेंद्र जैन को यशोधरा राजे सिंधिया का ही समर्थक माना जाता है. यशोधरा राजे सिंधिया और कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच संवादहीनता की स्थिति सालों से चली आ रही है. दोनों की बीच संपत्ति के बंटवारे का विवाद भी कोर्ट में चल रहा है. यशोधरा राजे सिंधिया के चुनाव प्रचार में उतर आने के कारण यहां मुकाबला सिंधिया बनाम सिंधिया होता जा रहा है.

पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहीं थीं यशोधरा राजे

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा डेढ़ वर्ष पूर्व किए गए मंत्रिमंडल के विस्तार में यशोधरा राजे सिंधिया का कद घटा दिया गया था. यशोधरा राजे सिंधिया के पास पूर्व में वाणिज्य एवं उद्योग जैसा महत्वपूर्ण विभाग था. उन्ही के नेतृत्व में वर्ष 2014 में इंदौर में इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया गया था. समिट का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. कतिपय मामलों में यशोधरा राजे सिंधिया के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मतभेद बढ़ गए थे. उसके बाद उनसे वाणिज्य एवं उद्याोग विभाग की जिम्मेदारी वापस ले ली गई थी. यशोधरा राजे सिंधिया उसके बाद से ही नाराज चल रहीं थीं.

पिछले साल हुए अटेर विधानसभा के उप चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब सिंधिया परिवार पर अंग्रेजों का साथ देने का आरोप लगाया तो यशोधरा राजे सिंधिया को यह याद दिलाना पड़ा कि उनकी मां विजयाराजे सिंधिया ने ही अपने गहने बेचकर बीजेपी को खड़ा किया है. मुख्यमंत्री द्वारा सिंधिया परिवार के खिलाफ की गई टिप्पणी के कारण बीजेपी चुनाव हार गई थी. नारजगी इतनी बड़ी थी कि पिछले कुछ माह से यशोधरा राजे सिंधिया महत्वपूर्ण मौकों पर नजर भी नहीं आ रहीं थीं.

एक दूसरे के खिलाफ प्रचार से बचते हैं सिंधिया परिवार के सदस्य

मध्यप्रदेश के सबसे ताकतवर माने जाने वाले सिंधिया राज परिवार के सदस्य सार्वजनिक मंचों अथवा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ आरोपों और आलोचनाओं से बचते हैं. सिंधिया परिवार की राजनीति हमेशा ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच बंटी रही है. इस राज परिवार का ग्वालियर-चंबल संभाग की 34 विधानसभा सीटों पर खासा असर भी है.

विजयाराजे सिंधिया को इस क्षेत्र में राजमाता कहा जाता था. वे भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य रहीं हैं. जबकि उनके पुत्र माधवराव सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता के रूप में उभरे. विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया के बीच भी संवादहीनता की स्थिति देखी जाती थी. विजयाराजे सिंधिया की तीन पुत्रियां ऊषा राजे, वसुंधरा राजे एवं यशोधरा राजे हैं. विजयाराजे सिंधिया के जीवित रहते ही परिवार में संपत्ति के बंटवारे का विवाद शुरू हो गया था.

कोर्ट में मुकदमाबाजी के बाद भी सिंधिया परिवार के सदस्य विरोधी राजनीतिक दलों के सदस्य होने के बाद भी कभी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में नहीं उतरते हैं. विजयाराजे सिंधिया हमेशा ही गुना-शिवपुरी संसदीय सीट से चुनाव लड़तीं थीं. माधवराव सिंधिया के इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर विजयाराजे सिंधिया चुनाव नहीं लड़तीं थीं. माधवराव सिंधिया जब ग्वालियर से चुनाव लड़ते थे, तब वे गुना-शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़तीं थीं.

yashodhara raje

विजयाराजे सिंधिया की राजनीतिक विरासत को क्षेत्र में यशोधरा राजे सिंधिया ने ही संभाला है. यशोधरा राजे सिंधिया शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़तीं हैं. जिले में भाजपा की राजनीति में उनकी इच्छा के बगैर पत्ता नहीं हिलता है. मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में पिछले कुछ साल से सिंधिया परिवार के प्रभाव को कम करने की कोशिश की जा रही है. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राज्यसभा सदस्य प्रभात झा तथा राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया पार्टी में यशोधरा राजे सिंधिया का खुला विरोध भी करते हैं. तीनों ही नेताओं का कार्य क्षेत्र भी ग्वालियर संभाग ही है.

यशोधरा राजे से किया है महत्वपूर्ण विभाग देने का वादा

देवेंद्र जैन को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता प्रचार के लिए घर से नहीं निकल रहे थे. मजबूरी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यशोधरा राजे सिंधिया से बात करना पड़ी. मुख्यमंत्री ने यशोधरा राजे सिंधिया को महत्वपूर्ण विभाग देने का वादा भी किया है. इसके बाद ही यशोधरा राजे सिंधिया पार्टी उम्मीदवार देवेंद्र जैन का नामांकन दाखिल कराने कोलारस पहुंच गईं. सिंधिया आईं तो भाजपा के कार्यकर्ता भी घर से निकल आए. मुख्यमंत्री की सभा में भी खासी भीड़ जमा हो गई.

कोलारस के अलावा सिंधिया का असर मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में भी है. ये दोनों ही विधानसभा क्षेत्र गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां से सांसद हैं. इस कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यहां सीधा मुकाबला सिंधिया की छवि से है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर होने के बाद भी बीजेपी यहां से चुनाव नहीं जीत पाई थी. खुद नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र में प्रचार भी किया था. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वर्ष 2019 के चुनाव में गुना सीट जीतने का लक्ष्य राज्य इकाई को दिया है. राज्य में इस साल विधानसभा के चुनाव हैं. कांग्रेस सिंधिया की छवि का उपयोग विधानसभा चुनाव में करना चाहती है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को डर है कि यदि कोलारस और मुंगावली में बीजेपी हार गई तो सरकार विरोधी माहौल जोर पकड़ लेगा. इसी कारण वे ये दोनों चुनाव जीतने के लिए हर संभव समझौता कर रहे हैँ.

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हर वर्ग को लुभाने में लगे हैं शिवराज सिंह चौहान

पहले अटेर और फिर चित्रकूट विधानसभा के उप चुनाव में मिली पराजय के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोलारस एवं मुंगावली के हर वर्ग के मतदाता को साधने की कवायद तेज कर दी है. क्षेत्र में सहरिया आदिवासी निर्णायक स्थिति में हैं. उन्हें हर माह हजार रूपए नगद देने की योजना लागू कर दी गई है. चित्रकूट के उप चुनाव में पंचायत कर्मियों की नाराजगी से हुए नुकसान को कोलारस-मुंगावली में साधने की कोशिश की गई है. पंचायत सचिव को दस हजार रूपए प्रतिमाह वेतन देने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है. मुख्यमंत्री अब तक दो सौ करोड़ रूपए से अधिक की विकास योजनाओं को शुरू करने की घोषणा कर चुके हैं. क्षेत्र में बीस से अधिक मंत्री डेरा डाले हुए हैं.

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