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विधानसभा चुनाव तक एक रह पाएंगे मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेता ?

मध्य प्रदेश कांग्रेस में पार्टी कई गुटों में बंटी है और आगामी विधानसभा चुनाव में जीत के लिए सभी का एक रहना जरूरी है

Updated On: Jan 31, 2018 10:21 PM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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विधानसभा चुनाव तक एक रह पाएंगे मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेता ?

मध्यप्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच मध्यप्रदेश कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता पहली बार एक मंच पर एकत्रित हुए. कांग्रेस के नेताओं ने अपनी यह एकजुटता कोलारस एवं मुंगावली विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव के लिए प्रदर्शित की है. इन दोनों क्षेत्रों में उपचुनाव के लिए मतदान 24 फरवरी को होना है. राज्य में इस साल के अंत तक विधानसभा के आम चुनाव भी होना है.

आम चुनाव से पूर्व इन दोनों क्षेत्रों के उपचुनावों को भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस के बीच चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है. दोनों उपचुनाव कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में हो रहे हैं. इस कारण यहां पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों से ज्यादा महत्वपूर्ण बड़े नेताओं के चेहरे हो गए हैं. सीधे-सीधे चुनाव में मुकाबला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सिंधिया के चेहरे के बीच ही हो रहा है.

कांग्रेस ने दोनों क्षेत्रों में उम्मीदवार सिंधिया की पसंद के ही उतारे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों का चयन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पसंद के आधार पर किया गया है. चित्रकूट विधानसभा के उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद बीजेपी कोलारस-मुंगावली में कोई गलती नहीं दोहराना चाहते हैं. बीजेपी यहां सिंधिया को शिकस्त देने में सफल हो जाती है तो वह आम चुनाव में मुख्यमंत्री पद की उनकी दावेदारी पर मनोवैज्ञानिक असर डाल सकती है. सिंधिया ने स्थिति को भांपते हुए ही पार्टी के सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की पहली की थी. सभी बड़े नेताओं की मौजूदगी में बुधवार को कोलारस से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार महेंद्र यादव और मुंगावली के उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह यादव ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए.

अलग-अलग दिशाओं से जुटे कांग्रेसी नेता

लगातार तीन चुनावों में राज्य में कांग्रेस के सत्ता की रेस बाहर हो जाने की वजह बड़े नेताओं के आपसी झगड़े रहे हैं. राज्य में कांग्रेस के आधा दर्जन से अधिक ऐसे बड़े नेता हैं, जो हमेशा ही मुख्यमंत्री की कुर्सी के दावेदार रहे हैं. सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ, सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम हमेशा ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर चर्चा में रहता है.

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नेताओं के आपसी झगड़े के कारण ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला नहीं कर पा रहे हैं. राज्य में कांग्रेस जमीन पर कहीं भी नजर नहीं आ रही है. पिछले एक साल में कांग्रेस, सरकार के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन भी खड़ा नहीं कर पाई है.

राज्य में पार्टी को सक्रिय करने के लिए राहुल गांधी ने अपने भरोसेमंद दीपक बाबरिया को राज्य का प्रभारी नियुक्त किया है. बाबरिया की पहल पर कांग्रेस के सभी बड़े नेता पार्टी को सक्रिय करने के लिए एक मंच पर आने लगे हैं. मोहन प्रकाश जब तक राज्य के प्रभारी रहे कांग्रेस के अधिकांश बड़े नेता उनकी बैठकों में नहीं जाते थे. मोहन प्रकाश पर गुटबाजी को बढ़ावा देने के आरोप भी वरिष्ठ नेताओं द्वारा लगाए गए थे.

मोहन प्रकाश प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरुण यादव का समर्थन करते थे. कुछ समय पहले तक अरुण यादव और प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह के बीच संवादहीनता की स्थिति थी. दोनों अब एक मंच पर आकर साझा प्रेस कान्फ्रेंस भी कर रहे हैं. दोनों नेता इस बात पर एक राय हैं कि पार्टी को विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का कोई भी उम्मीदवार घोषित नहीं करना चाहिए.

अजय सिंह ने कोलारस में भी बुधवार को चेहरे के सवाल पर चुप्पी साध ली. रणनीति सिंधिया का रास्ता रोकने की है. सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार चेहरा घोषित करने पर दबाव बनाए हुए हैं. कोलारस एवं मुंगावली के उपचुनाव के बहाने सिंधिया अपने सभी विरोधियों को साधने की कोशिश में लगे हुए हैं. सिंधिया के आग्रह पर ही कांग्रेस के बड़े नेता अलग-अलग दिशाओं से चलकर कोलारस में एकत्रित हुए.

सिंधिया, दिल्ली से भोपाल पहुंचे. भोपाल से हेलीकॉप्टर में कांतिलाल भूरिया, दीपक बाबरिया, सुरेश पचौरी और अरुण यादव को लेकर कोलारस रवाना हो गए. कमलनाथ छिंदवाड़ा से कोलारस पहुंचे. अजय सिंह सीधी से ग्वालियर और फिर कोलारस पहुंचे. सिंधिया ने कोलारस विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रबंधन का काम दिग्विजय सिंह के करीबी पूर्व मंत्री केपी सिंह के जिम्मे कर दिया है. कुछ समय पहले तक सिंधिया को केपी सिंह का विरोधी माना जाता था.

दिग्विजय सिंह इन दिनों नर्मदा यात्रा पर हैं. उनकी नर्मदा यात्रा मार्च के अंत तक समाप्त होगी. पिछले दिनों दीपक बाबरिया उनकी यात्रा में शामिल भी हुए थे और राज्य के हालातों पर उनसे बात भी की थी. दिग्विजय सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं. उनकी प्राथमिकता राज्य में सरकार बनाने की है.

कमलनाथ-सिंधिया के बीच है मुकाबला

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राज्य की कांग्रेस राजनीति इन दिनों स्पष्ट तौर पर दो दिग्गजों के बीच बंटी हुई दिखाई दे रही है. कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया. दोनों ही चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के इच्छुक भी हैं और उत्सुक भी. कमलनाथ के पास दीर्घ अनुभव है. सिंधिया का चेहरा चमकदार है. कमलनाथ का आर्थिक पक्ष भी काफी मजबूत है. इन दो दिग्गजों नेताओं के बीच चल रही खींचतान में सुरेश पचौरी और कांतिलाल भूरिया ने अपना दावा वापस ले लिया है. सुरेश पचौरी दोनों ही नेताओं से तालमेल बैठाकर चल रहे हैं.

कांतिलाल भूरिया ने अपनी गतिविधियां झाबुआ के आदिवासी इलाके तक सीमित कर दी हैं. दिलचस्प यह है कि राज्य में मुख्यमंत्री के दावेदार अधिकांश कांग्रेसी नेताओं का पूरे प्रदेश में असर नहीं है. समर्थक भी नहीं हैं. कमलनाथ की राजनीति जहां महाकौशल तक सीमित रही है वहीं सिंधिया का प्रभाव ग्वालियर एवं चंबल संभाग तक सीमित है. अरुण यादव, यादवों के एकछत्र नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं. कोलारस एवं मुंगावली में यादव वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. सिंधिया ने इसी कारण दोनों स्थानों पर यादव उम्मीदवार मैदान में उतारा है. अजय सिंह का प्रभाव विंध्य क्षेत्र में है. मालवा और निमाड़ क्षेत्र में हर नेता के समर्थक मौजूद हैं. यह क्षेत्र बीजेपी के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है.

मुंगावली के विधानसभा के उपचुनाव में बीजेपी ने भी यादव समुदाय की बाई साहब को टिकट दिया है. बाई साहब पूर्व विधायक स्वर्गीय देशराज यादव की पत्नी हैं. मुंगावली बीजेपी में बाई साहब का विरोध हो रहा है. विरोध के स्वर कांग्रेस में सुनाई दे रहे हैं. ब्रजेंद्र सिंह यादव को उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में सिंधिया समर्थक केपी यादव और अनुराधा यादव ने बीजेपी का दामन थाम लिया है.

कोलारस में बीजपी उम्मीदवार देवेंद्र जैन सिंधिया परिवार की यशोधरा राजे सिंधिया के भरोसे पर चुनाव लड़ रहे हैं. कोलारस में देवेंद्र जैन के समर्थन में पूरा मंत्रिमंडल चुनाव प्रचार में जुटा हुआ है. कांग्रेस के मेगा शो के जवाब में बीजेपी भी दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त बड़े रोड शो का आयोजन करने जा रही है.

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