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कमलनाथ के मंत्रालय में जगह पक्की करने के लिए 'प्रेशर पॉलिटिक्स' का खेल शुरू

सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष या डिप्टी सीएम बनाने के लिए अड़े विधायक दिल्ली में डेरा डाले हैं तो भोपाल में नई कैबिनेट को लेकर हलचल तेज है

Updated On: Dec 16, 2018 09:54 PM IST

FP Staff

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कमलनाथ के मंत्रालय में जगह पक्की करने के लिए 'प्रेशर पॉलिटिक्स' का खेल शुरू

कमलनाथ की नई टीम को लेकर खींचतान जारी है. हर कोई मंत्रीमंडल में जगह बनाने की जुगत में है. इसको लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासत गर्म है. दरअसल, सूबे की सरकार में कमलनाथ के सहयोगी बनने के लिए जोर-आजमाइश जारी है.

कमलनाथ की टीम में जगह बनाने के लिए भोपाल से लेकर दिल्ली तक गहमागहमी का माहौल है. सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष या डिप्टी सीएम बनाने के लिए अड़े विधायक दिल्ली में डेरा डाले हैं तो भोपाल में नई कैबिनेट को लेकर हलचल तेज है.

कमलनाथ एक के बाद एक बैठक कर नाम फाइनल करने में लगे हैं लेकिन कैबिनेट के लिए चेहरों की तलाश अब बड़ी चुनौती बनती दिख रही है. दिल्ली में सिंधिया को अध्यक्ष बनाने के बहाने विधायक प्रेशर पालिटिक्स का इस्तेमाल कर मंत्रिमंडल में जगह पक्की करने की जुगत में हैं.

सिंधिया के पक्ष में दिल्ली पहुंचे विधायकों में तुलसी सिलावट, बनवारी लाल शर्मा, कमलेश जाटव, रणवीर जाटव, उमंग सिंगार, मुन्ना गोयल, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, रघुराज कंसाना, गिरिराज दंडोतिया शामिल हैं. वहीं भोपाल में मंत्रिमंडल के गठन को लेकर सियासत गर्म है. दिग्विजय खेमा भी पूरी तरह से सक्रिय है.

जानकारी के मुताबिक दिग्विजय मंत्रिमंडल में बेटे जयवर्धन का नाम पक्का कर लेना चाहते है. इसलिए अपने भाई लक्ष्मण सिंह का नाम उन्होंने विधानसभा स्पीकर के लिए आगे कर दिया है. वहीं चुनाव हार कर भी पावर तलाश रहे कांग्रेस के दिग्गज अरुण यादव और रामनिवास रावत ने दिल्ली में डेरा डाल लिया है. दोनों नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं.

विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो

विधानसभा की सीटें 230

बीजेपी-109 कांग्रेस- 114 बीएसपी- 02 एसपी- 01 निर्दलीय- 04

इसमें चंबल-ग्वालियर, महाकौशल, मालवा निमाड़, मध्यभारत और बुंदेलखंड से कांग्रेस को खासी जीत मिली है. जबकि विंध्य इलाके में पार्टी को निराशा मिली. ऐसे में पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती जीत दर्ज करने वाले इलाकों को मंत्रिमंडल में जगह देने के साथ ही हार वाले इलाकों को भी मजबूत करने पर फोकस होगा.

साथ ही इस बार एसपी-बीएसपी के साथ कांग्रेस से बागी होकर जीतने वाले निर्दलीयों को भी कैबिनेट में जगह देना होगी. लेकिन इससे पहले पार्टी में बनी प्रेशर पॉलिटिक्स से निपटना कमलनाथ के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं लग रहा है.

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