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मध्य प्रदेश: जेब में होंगे पचास हजार तब ही टिकट पर कांग्रेस करेगी विचार

मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया ने टिकट के इच्छुक दावेदारों से पचास हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट लेकर आर्थिक संकट से उबरने का रास्ता निकाला है

Updated On: Feb 27, 2018 08:23 AM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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मध्य प्रदेश: जेब में होंगे पचास हजार तब ही टिकट पर कांग्रेस करेगी विचार

मध्यप्रदेश में साल के अंत तक विधानसभा का चुनाव होना है. मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए रोजमर्रा के खर्चे चलाना भी मुश्किल भरा है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से मिलने वाली पांच लाख रुपए प्रतिमाह की राशि भी पिछले आठ माह से नहीं मिली है. राज्य में कांग्रेस पिछले चौदह साल से विपक्ष में बैठी हुई है. ऐसी स्थिति में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और राज्य के प्रभारी दीपक बाबरिया ने टिकट के इच्छुक दावेदारों से पचास हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट लेकर आर्थिक संकट से उबरने का रास्ता निकाला है.

गुजरात मूल के बाबरिया राज्य में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष की तरह काम कर रहे हैं. उनके बयानों और फैसलों के कारण पार्टी में असंतोष के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं. राज्य में किसी भी नेता को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट न करने के बयान से भी राज्य के बड़े कांग्रेसी नेता एक मत दिखाई नहीं दे रहे हैं.

साठ की उम्र तो नहीं मिलेगा टिकट

कांग्रेस के अध्यक्ष बनने से पूर्व ही राहुल गांधी ने दीपक बाबरिया को मध्यप्रदेश का प्रभारी नियुक्त कर दिया था. बाबरिया को मोहन प्रकाश के स्थान पर प्रभारी बनाया गया था. मोहन प्रकाश पर राज्य में गुटबाजी को बढ़ावा देने के आरोप भी लगे थे. इन्हीं आरोपों के बाद उनकी मध्यप्रदेश से विदाई कर दी गई थी. राज्य में कांग्रेस के तीन बड़े चेहरे हैं. कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया. तीनों ही नेताओं के बीच अक्सर खींचतान चलती रहती है. राज्य में पिछले दो साल से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करने की मांग उठ रही है.

कांग्रेस आलाकमान ने अब तक इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया है. राज्य में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरुण यादव हैं. यादव को तीन साल से भी अधिक का समय इस पद पर हो गया है. इन तीन सालों में यादव कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता नहीं बना पाए हैं. यादव को राज्य में जनाधार वाला नेता नहीं माना जाता है. उनके पिता सुभाष यादव, दिग्विजय सिंह सरकार में उपमुख्यमंत्री थे.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं. सुभाष यादव की पहचान सहकारी क्षेत्र के कद्दावर नेता के तौर पर थी. अरुण यादव उनकी विरासत के आधार पर राजनीति कर रहे हैं. राज्य में प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह हैं. अजय सिंह के पिता स्वर्गीय अर्जुन सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता थे. अजय सिंह और अरुण यादव के बीच भी तालमेल का अभाव देखा जाता रहा है.

deepak babaria

दीपक बाबरिया

दीपक बाबरिया के आने के बाद से ही राज्य में बड़े कांग्रेसी नेताओं को दरकिनार कर दिया गया गया है. दीपक बाबरिया के मंडलम फार्मूले का भी कोई असर मैदानी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है. साठ साल की उम्र पार कर चुके नेताओं को टिकट न देने का एलान कर दीपक बाबरिया ने सभी नेताओं को चौंका दिया है. राज्य के दिग्गज कांग्रेसी नेता कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह साठ की उम्र पार कर चुके हैं। बयान पर विवाद बढ़ा तो दीपक बाबरिया ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि जो नेता साठ की उम्र के बाद भी लगातार चुनाव जीत रहे हैं,उन पर यह फार्मूला लागू नहीं होता है। बाबरिया के इस फैसले के खिलाफ साठ साल की उम्र पार कर चुके विधायक राहुल गांधी के समक्ष विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं.

बाबरिया ही हैं मध्यप्रदेश में आलाकमान

दीपक बाबरिया के कामकाज की शैली आलाकमान की तरह है. बाबरिया ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिन्हें लेने का अधिकार कांग्रेस की कार्यसमिति को है. बाबरिया हाल ही में सीहोर जिले के दौरे पर गए थे. वहां जिला कांग्रेस कमेटी का कोई अध्यक्ष नहीं है. राज्य में लगभग एक दर्जन जिले ऐसे हैं, जहां जिला कांग्रेस का कोई अध्यक्ष ही नहीं है. अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला आलाकमान के पास लंबित है.

बाबरिया ने सीहोर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष ओम वर्मा को जिला कांग्रेस कमेटी का कार्यवाहक अध्यक्ष घोषित कर दिया. कांग्रेस की परंपरा यह है कि नया अध्यक्ष नियुक्त होने तक उपाध्यक्ष कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर काम करता है. सीहोर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला है. उनका निर्वाचन क्षेत्र बुधनी इसी जिले का विधानसभा क्षेत्र है. भौगोलिक दृष्टि से जिला काफी बिखरा हुआ है. कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए गए ओम वर्मा की उम्र सत्तर साल है.

इस कारण उनकी कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. बाबरिया ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को विभाजित कर मंडलम भी गठित कर रहे हैं. बाबरिया मैदानी दौरे करने के साथ-साथ कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें भी करते रहते हैं. बाबरिया अब तक राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ पार्टी के सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर लाकर कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं कर सके हैं.

पार्टी की आर्थिक स्थिति भी काफी गंभीर बनी हुई है. मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी को चलाने के लिए हर माह दस लाख रुपए से अधिक की जरूरत पड़ती है. कांग्रेस कमेटी यह खर्च कार्यालय की दुकानों के किराए से पूरा करती है. कुछ माह पहले तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी हर माह पांच लाख रुपए प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजती थी. यह राशि कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होती थी. दुकानें किराए पर दिए जाने के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पांच लाख रुपए हर माह भेजने बंद कर दिए.

राज्य में कांग्रेस के आर्थिक संकट को दूर करने के लिए बाबरिया ने टिकट के दावेदारों से आवेदन के साथ पचास हजार रुपए का डीडी जमा कराने का फरमान जारी कर दिया है. राज्य में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं. इनमें 35 सीट अनुसूचित जाति और 47 सीट जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. आरक्षित सीटों पर टिकट की मांग करने वालों से पच्चीस हजार रुपए का डीडी मांगा गया है.

Jyotiraditya M Scindia

इस हिसाब से कांग्रेस को एक करोड़ रूपए से अधिक की आमदनी सिर्फ उस स्थिति में होगी जब एक सीट पर सिर्फ एक ही व्यक्ति आवेदन करें. टिकट के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया पांच मार्च से शुरू की जा रही है. बाबरिया को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से कांग्रेस को पचास करोड़ से अधिक की आय हो सकती है. देश में कांग्रेस ने इस तरह की कवायद पहले कभी नहीं की है. मध्यप्रदेश कांग्रेस का कोई भी नेता बाबरिया के इस फैसले पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है. एक वरिष्ठ नेता ने ऑफ द रिकार्ड कहा कि इससे कांग्रेस की फजीहत ज्यादा होगी. आवेदन के साथ जमा कराई गई राशि टिकट न मिलने पर वापस भी नहीं की जाएगी.

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