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मध्य प्रदेश चुनाव: बुंदेलखंड में कांग्रेस का खेल बिगाड़ने में लगे हैं माया-अखिलेश

मायावती ने तो अपनी राजनीतिक गतिविधि का केंद्र ही खजुराहो को बना लिया है वहीं अखिलेश यादव बुंदेलखंड के बाहर भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं

Updated On: Nov 22, 2018 08:07 AM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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मध्य प्रदेश चुनाव: बुंदेलखंड में कांग्रेस का खेल बिगाड़ने में लगे हैं माया-अखिलेश

मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में हाथ (कांग्रेस) से मार खा चुके समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती दोनों ही नेता बुंदेलखड़ में कांग्रेस के पांव के नीचे की जमीन खिसकाने में लगे हुए हैं. मायावती ने तो अपनी राजनीतिक गतिविधि का केंद्र ही खजुराहो बना लिया है. अखिलेश यादव बुंदेलखंड के बाहर भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

बागियों के जरिए नुकसान पहुंचाने की रणनीति

राज्य के बुंदेलखंड इलाके के सागर संभाग में विधानसभा की 26 सीटें हैं. सात जिलों की सीमाएं उत्तर प्रदेश से लगी हुई हैं. उत्तर प्रदेश, बीएसपी-एसपी दोनों ही राजनीति दलों का प्रमुख केंद्र है. ये दोनों ही राजनीतिक दल, पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में तीसरी ताकत बनने लायक सीटें कभी भी नहीं जुटा पाए हैं. पिछले दो चुनावों से इन दोनों राजनीतिक दलों की ताकत में कमी देखने को मिली है.

बीएसपी और एसपी दोनों ही राजनीतिक दलों का कोई मजबूत संगठन मध्य प्रदेश में नहीं है. बीएसपी, अनुसूचित जाति वर्ग के वोट बैंक के सहारे ही अपनी ताकत दिखाती रही है. बीएसपी की ताकत उन विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावी रूप में सामने आती है जहां उम्मीदवार ऊंची जाति को होता है. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी की ताकत बढ़ाने में बीजेपी और कांग्रेस के महत्वाकांक्षी नेता मददगार साबित होते हैं.

कांग्रेस से गठबंधन करने में असफल रहने के बाद दोनों ही राजनीतिक दलों ने कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को तलाश कर अपनी-अपनी पार्टी की टिकट थमाई है. बुंदेलखंड में बागियों की हाथी और साईकल की सवारी ने पंजा और कमल का गणित बिगाड़ दिया है. छतरपुर जिले की लगभग हर सीट का हाल यही है. राजनगर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के पुत्र नितिन चतुर्वेदी, बिजावर सीट पर कांग्रेस के पूर्व विधायक जगदीश शुक्ला के भाई राजेश शुक्ला को एसपी ने उम्मीदवार बनाया है.

महाराजपुर सीट पर कांग्रेस सेवा दल के जिलाध्यक्ष रहे राजेश मेहतो को बीएसपी ने अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं बीजेपी के बागी चंदला, जतारा और खरगापुर की सीट पर हैं. चंदला में नगर पंचायत की अध्यक्ष अनित्य सिंह बागरी को एसपी ने उम्मीदवार बनाया है. खरगापुर की सीट पर पूर्व विधायक अजय सिंह यादव बीजेपी से बगावत कर बिएसपी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी बीजेपी के उम्मीदवार हैँ.

वहीं जतारा की सीट पर बीजेपी से नाराज जिला पंचायत सदस्य अनीता खटीक एसपी का टिकट लेकर मैदान में हैं. कांग्रेस ने यहां शरद यादव की पार्टी लोक जनतांत्रिक दल के उम्मीदवार विक्रम चौधरी को समर्थन दे दिया है. इससे कांग्रेस के मौजूदा विधायक दिनेश अहिरवार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं.

सागर विधानसभा सीट से कांग्रेस से बगवात कर जगदीश यादव एसपी से टिकट लेकर चुनावी मैदान में हैं. इसी तरह दमोह सीट से बीजेपी के पूर्व मंत्री और बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमारिया निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी मौजूदगी से राज्य के वित्त मंत्री जयंत मलैया मुश्किल में हैं.

बुंदेलखंड में कसौटी पर कसे जाएंगे राहुल गांधी

लगभग एक दशक पहले राहुल गांधी ने जमीन की राजनीति समझने के लिए बुंदेलखंड के गांवों का ही रुख किया था. राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भी गरीब परिवारों के बीच अपना समय गुजारा था. बुंदेलखंड के विकास के लिए डॉ. मनामोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा विशेष पैकेज भी दिया गया था.

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ जारी किए गए आरोप पत्र में भी बुंदेलखंड पैकेज और उसमें हुए भ्रष्टाचार का जिक्र किया है. बुंदेलखंड पैकेज में मिली राशि से इलाके की पीने के पानी की समस्या भी दूर की जाना थी. छतरपुर जिला मुख्यालय से लगभग चालीस किलोमीटर दूर स्थित बक्सवाहा कस्बे में आज भी लोग खरीदकर पानी पी रहे हैं.

बक्सवाहा, बड़ामलहरा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है. वक्सवाहा में नगर पंचायत दस दिन में एक बार पीने के पानी की सप्लाई करती है. नगर पंचायत क्षेत्र के चालीस में से 28 हैंड पंप बंद पड़े हैं. पीने के पानी की समस्या पन्ना जिले में भी है. पन्ना जिले में दो बड़ी-बड़ी मंडिया हैं. गुनौर और अमनागंज. यहां के लोग पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं. लेकिन,किसानों को सिंचाई के लिए पानी ही नहीं मिलता है.

बरगी बांध का पानी गुनू सागर में लाया जाना था. लेकिन, अभी भी लोग इंतजार कर रहे हैँ. बुंदेलखंड पैकेज के तहत बनाए गए भितरीमुटमुरू बांध साल भर से टूटा पड़ा है. पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में पलायन बड़ी समस्या है. पलायन की बड़ी वजह स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी है. खेतों में भी लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है. मनरेगा के तहत भी काम बंद हैं. जबकि राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव इसी बुंदेलखंड इलाके की रहली सीट से चुनकर आते हैं.

दीपावली का त्यौहार बीत जाने के बाद बुंदेलखंड इलाके के रेललाइन से जुड़े कस्बों और शहरों के रेलवे स्टेशन के बाहर गरीब, मजदूरों को पलायन करते देखा जा सकता है. छतरपुर के कलेक्टर रमेश भंडरी कहते हैं कि हमने उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिख कर आग्रह किया है कि उनके जिले में पलायन कर पहुंचे मजदूरों को 28 नवंबर को वोटिंग के दिन छुट्टी दी जाए.

बच्चे नहीं हैं इस कारण बंद किए जा रहे हैं स्कूल

स्कूलों के लिए शुरू की गई मध्यान्ह भोजन योजना भी बुंदेलखंड क्षेत्र में मजदूरों का पलायन रोकने में प्रभावी दिखाई नहीं दे रही है. छतरपुर जिले के ही कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घटने के कारण उन्हें हमेशा के लिए बंद किया जा रहा है. हालांकि शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए कई तरह की योजनाएं लागू की हैं. इसके बाद भी कई स्कूलों में बीस से भी कम छात्रों का नामांकन हुआ है. ऐसे तीस स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया जा चुका है. इन स्कूलों के छात्रों और टीचरों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट किया जा रहा है.

इस क्षेत्र में कुपोषण की स्थिति भी गंभीर है. टीकमगढ़ जिले में पचास प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी पाई गई है. कुपोषण का असर बच्चों के कद पर भी दिखाई दे रहा है. छतरपुर जिले में पांच सौ अधिक बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण के शिकार पाए गए थे. क्षेत्र से निर्वाचित होने वाली ललिता यादव, शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री हैं. बीजेपी ने इस बार उन्हें छतरपुर के बजाए बड़ा मलहरा से अपना उम्मीदवार बनाया है. बड़ा मलहरा के लिए वे बाहरी उम्मीदवार है.

बुंदेलखंड की राजनीति में राजाओं और जाति का असर

बुंदेलखंड की राजनीति में राजाओं का प्रभाव आज भी है. राजाओं के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग के वोटर भी यहां निर्णायक भूमिका अदा करते रहे हैं. बुदेलखंड क्षेत्र के राजपूत परिवारों में यह परंपरा है कि वे अपने नाम के आगे राजा उपनाम का उपयोग अवश्य करते हैं. भैय्या राजा,मुन्ना राजा,जग्गू राजा,भंवर राजा आदि-आदि. नाम के आगे राजा लगे होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वे किसी राज परिवार से हो. लेकिन, चुनावी राजनीति में इन राजाओं का महत्व हमेशा ही देखने को मिलता है. कई राजा उप नाम वाले लोग चुनाव मैदान में भी हैं.

कांग्रेस ने टीकमगढ़ से यादवेंद्र सिंह उर्फ जग्गू राजा, बिजावर से शंकर प्रताप सिंह उर्फ मुन्ना राजा, राजनगर से विक्रम सिंह उर्फ नाती राजा, पन्ना से शिवजीत सिंह उर्फ भैया राजा और खरगापुर से चंदा सिंह गौर उर्फ चंदा रानी को मैदान में उतारा है. वहीं बीजेपी ने महाराजपुर से मानवेंद्र सिंह उर्फ भंवर राजा, समाजवादी पार्टी ने पवई से भुवन विक्रम सिंह उर्फ केशू राजा को उम्मीदवार बनाया है. इन राजाओं का आतंक भी कई इलाकों में चुनाव जीतने में मददगार साबित होता है.

महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र के ऐसे कई गांव हैं, जिनमें रहने वाले लोगों को शहर में आने के लिए कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कमजोर वर्ग के लिए राजनीति में आना भी आसान नहीं है. क्षेत्र का संभागीय मुख्यालय सागर है. यहां बीड़ी व्यवसाय में सक्रिय जैन परिवारों का दबदबा देखने को मिलता है. सागर विधानसभा क्षेत्र में भी चुनावी मुकाबला दो बीड़ी निर्माताओं के बीच है. बीजेपी उम्मीदवार शैलेन्द्र जैन की पहचान ढोलक छाप बीड़ी से है. जबकि कांग्रेस उम्मीदवार नैवी जैन बालक छाप बीड़ी बनाने वाले परिवार से हैं.

वैसे बुंदेलखंड की राजनीति में दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं. उमा भारती और सत्यव्रत चतुर्वेदी. सत्यव्रत चतुर्वेदी अपने पुत्र प्रेम के कारण कांग्रेस से बगाबत कर चुके हैं. चतुर्वेदी कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी तो अपने पुत्र को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है. वहीं उमा भारती अपने भतीजे को जिताने में जुटी हुई हैं. उमा भारती पर उनके ही लोधी समुदाय की कुसुम सिंह महदेले हमलावर हैं. महदेले की टिकट बीजेपी ने काट दिया है. वे पन्ना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़तीं थीं. उन्होंने उमा भारती पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी उनका उपयोग समुदाय विशेष के वोटों के लिए कर रही है.

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