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मध्य प्रदेश चुनाव: पहले की थी बाबूगीरी अब करेंगे नेतागीरी

मध्य प्रदेश में तो अब प्रशासनिक अधिकारियों ने अपना एक राजनीतिक दल तक खड़ा कर दिया है

Updated On: Nov 02, 2018 09:24 AM IST

Nitesh Ojha

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मध्य प्रदेश चुनाव: पहले की थी बाबूगीरी अब करेंगे नेतागीरी

वैसे तो राजनीति में नेताओं की एंट्री कोई नई बात नहीं है. लेकिन अब दिन पर दिन प्रशासनिक अधिकारियों का राजनीति में पदार्पण और उनकी ताकत बढ़ती जा रही है. मध्य प्रदेश में तो अब प्रशासनिक अधिकारियों ने अपना एक राजनीतिक दल तक खड़ा कर दिया है.

नौकरशाहों ने खड़ा कर दिया अपने दम पर दल

सपाक्स नाम के इस संगठन ने वर्षों से राजनीति कर रहे नेताओं और पार्टियों की नींद उड़ा दी है. इस संगठन के संरक्षक हैं पूर्व आईएएस और पूर्व पुनर्वास और सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी. त्रिवेदी के ही नेतृत्व में सवर्ण समाज प्रदेशभर में अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

सपाक्स से जुड़ने वाले हीरालाल त्रिवेदी एकलौते ऐसे प्रशासनिक अधिकारी नहीं हैं. यहां भी सूची बड़ी लंबी है. पूर्व आईएएस वीणा घाणेकर, पूर्व आईएएस सुधा चौधरी और पूर्व आईपीएस विजय वाते भी सपाक्स से जुड़े हैं. विजय वाते पूर्व आईपीएस अफसर हैं जिन्होंने रिटायर होने के बाद सपाक्स में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. यह चुनावों में भी हाथ आजमा सकते हैं.

पूर्व आईएएस सुधा चौधरी सपाक्स की तरफ से विदिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और वह यहीं से चुनाव भी लड़ सकती हैं. वहीं कयास लगाए जा रहे हैं कि पूर्व आईएएस वीणा घाणेकर भी चुनाव लड़ सकती हैं. सपाक्स के प्रांताध्यक्ष केदार सिंह तोमर भी अपने शेष कार्यकाल को छोड़ पूर्ण रूप से पार्टी के साथ जुड़ने की तैयारी में हैं. फिलहाल तोमर पशुपालन विभाग में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं.

सत्ताधारी बीजेपी में बुलंदी पर हैं नौकरशाह

सिर्फ सपाक्स ही नहीं बल्कि नौकरशाह सत्ताधारी पार्टी का भी दामन थाम रहे हैं. और कई तो यहां वर्षों से सेवा दे रहे हैं. इन्हीं में से एक बड़ा नाम हैं रुस्तम सिंह. रुस्तम सिंह पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं. मौजूदा केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के समय पर रुस्तम की राजनीति में एंट्री हुई थी. राजनीति में वो लगातार सफलता पाते रहे. फिलहाल रुस्तम सिंह मौजूदा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं.

बीजेपी से जुड़ कर राजनीति में बुलंदी पाने वाले नौकरशाहों में पूर्व आईएएस भागीरथ प्रसाद का नाम भी है. भागीरथ प्रसाद ने प्रशासनिक सेवा छोड़ कर इंदौर विश्वविद्यालय के कुलपति का भार संभाला. इसके बाद उन्होंने बीजेपी की तरफ से राजनीति में एंट्री की और अभी वह भिंड के सांसद भी हैं.

बीजेपी का दामन थामने वालों में पूर्व आईएएस एसएस रूपला, पूर्व आईएएस एसएन चौहान, पूर्व आरपीएस पन्नालाल अवस्थी, पूर्व आईपीएस हरिसिंह यादव भी शामिल हैं. यह भी बीजेपी की ओर से टिकट की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे पूर्व आईएएस रूपला सुसनेर सीट से टिकट की मांग कर रहे हैं तो एसएन चौहान पन्ना जिले से टिकट की मांग कर रहे हैं. चौहान पन्ना और सिंगरौली में कलेक्टर सहित कई मुख्य पदों पर रहे चुके हैं.

पूर्व आरपीएस पन्नालाल अवस्थी भी चित्रकूट के डीएसपी और रीवा के सीएसपी रह चुके हैंं और बीजेपी की ओर से राजनगर सीट से टिकट की मांग कर रहे हैं. ग्वालियर के डीआईजी रह चुके पूर्व आईपीएस हरीसिंह यादव भी दतिया जिले से आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी से टिकट की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस की डोर पकड़ने वाले अफसरों की भी कमी नहीं

मध्य प्रदेश की सत्ता में वनवास काट रही कांग्रेस के साथ जुड़ने वाले नौकरशाहों की भी कोई कमी नहीं है. अभी हाल ही में कई पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने देश की सबसे पुरानी पार्टी से नाता जोड़ा है. इनमें से एक प्रिंटिंग घोटाले के आरोप में बर्खास्त हुईं पूर्व आईएएस अधिकारी शशि कर्णावत भी हैं. कर्णावत ने राज्य की सत्ता में काबिज बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का दामन थाम लिया है.

कर्णावत कई मुद्दों पर बेबाकी से सरकार के खिलाफ बोलती रही हैं. ऐसे में सत्ता से पिछले डेढ़ दशकों से दूर कांग्रेस उनमें एससी वोटर को लुभाने वाला चेहरा भी देख रही है. अपनी पकड़ के चलते कर्णावत कांग्रेस के लिए एससी वोटर्स के बीच ट्रंप कार्ड साबित हो सकती हैं.

कांग्रेस से जुड़ने वालों में 1981 बैच की अजिता वाजपेयी पांडे का नाम भी है. अजिता इसी साल जून महीने में ही कांग्रेस से जुड़ी है. पार्टी ने उन्हें राज्य में रिसर्च और एनालिस्ट डिपार्टमेंट का समन्वयक बनाया है. अजिता मध्य प्रदेश में शक्ति एप की प्रमुख भी हैं.

कांग्रेस से हाल ही में जुड़ने वाले कई नौकरशाह काफी अहम जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं. पूर्व आईएएस लक्ष्मीकांत द्विवेदी उन्ही में से एक हैं. छह महीने पहले ही कांग्रेस का दामन थामने वाले लक्ष्मीकांत कटनी जिले में संगठन का काम देख रहे हैं और वह यहीं से टिकट भी चाहते हैं.

पूर्व आइएएस बाथम भी कुछ ही समय पहले कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं. बाथम को कांग्रेस ने पार्टी की घोषणा समिति में प्रशासनिक सेक्टर की देखरेख का जिम्मा सौंपा है.

बीजेपी-कांग्रेस के अलावा इन दलों में भी है नौकरशाहों की आस्था

प्रशासनिक अधिकारियों ने न सिर्फ कांग्रेस, बीजेपी और सपाक्स का ही दामन थामा है. बल्कि कई अन्य दलों में भी उन्होंने अपनी आस्था दिखाई है. इनमें राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने और दिल्ली से बाहर विस्तार में जुटी आम आदमी पार्टी भी शामिल है. आप का दामन थामने वालों में अनुमा आचार्य का नाम सबसे अव्वल है. अनुमा एयरफोर्स की विंग कमांडर रह चुकी हैं और अब आम आदमी पार्टी की ओर से विदिशा से प्रत्यार्शी हैं.

रघुवीर सहाय भी पूर्व आईएएस अधिकारी हैं और कांग्रेस से टिकट चाह रहे थे. लेकिन टिकट न मिलने के चलते उन्होंने सवर्ण समाज पार्टी का दामन थाम लिया है. अब वह इसी पार्टी से जिसके प्रदेश समन्वयक भी हैं, की ओर से विदिशा की सिरोंज सीट पर चुनाव लड़ेंगे.

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