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MP Election: EVM तय करेगी 70 साल से ज्यादा उम्र के दर्जन भर नेताओं का भविष्य

राज्य में 28 नवंबर को हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों प्रमुख दलों ने 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं पर उम्मीदवारी का भरोसा जताया

Updated On: Dec 10, 2018 04:55 PM IST

Bhasha

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MP Election: EVM तय करेगी 70 साल से ज्यादा उम्र के दर्जन भर नेताओं का भविष्य

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मंगलवार को होने वाली मतगणना 70 साल से ज्यादा उम्र के दर्जन भर नेताओं के सियासी भविष्य का फैसला करेगी. जिनमें बीजेपी सरकार के दो मंत्री भी शामिल हैं. इन नेताओं ने बतौर उम्मीदवार पूरी ताकत से चुनाव लड़कर यह जताने की कोशिश की है कि उम्र उनके लिए महज एक आंकड़ा है.

राज्य में 28 नवंबर को हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों प्रमुख दलों ने 70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं पर उम्मीदवारी का भरोसा जताया.

बीजेपी-कांग्रेस दोनों की लिस्ट में हैं 70 साल से ज्याद उम्र के उम्मीदवार

लम्बे सियासी अनुभव को तरजीह देते हुए बीजेपी ने बड़वारा से 78 वर्षीय पूर्व मंत्री मोती कश्यप, लहार से 76 वर्षीय रसाल सिंह, गुढ़ से 76 वर्षीय नागेंद्र सिंह, रैगांव से 75 वर्षीय जुगुल किशोर बागरी को चुनावी मैदान में उतारा. निवर्तमान 73 वर्षीय स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह मुरैना से चुनाव लड़े, जबकि 71 वर्षीय वित्त मंत्री जयंत मलैया ने अपनी परंपरागत दमोह सीट से मोर्चा संभाला.

इनके अलावा, बीजेपी के दो अन्य प्रत्याशियों, सिंहावल से शिवबहादुर सिंह चंदेल और महाराजपुर से मानवेंद्र सिंह की उम्र 70-70 साल है. उधर, सबसे उम्रदराज कांग्रेस प्रत्याशियों की लिस्ट में 78 साल के पूर्व मंत्री सरताज सिंह अव्वल हैं. अपनी परंपरागत सिवनी-मालवा सीट से चुनावी टिकट काटे जाने से नाराज होकर सिंह ने बीजेपी छोड़ दी थी. कांग्रेस ने उन्हें होशंगाबाद से चुनाव लड़ाया है.

उम्र के मुकाबले नेता का तजुर्बा मायने रखता है

कांग्रेस ने मंदसौर से 72 साल के पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा और कटंगी से 71 वर्षीय टामला को चुनावी मैदान में उतारा. कांग्रेस की पूर्ववर्ती दिग्विजय सिंह सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहे नाहटा का मानना है कि सियासत में किसी उम्मीदवार की उम्र के मुकाबले उसका तजुर्बा ज्यादा मायने रखता है.

अपनी चुनावी जीत का भरोसा जताते हुए नाहटा ने सोमवार को कहा, 'चुनावों के दौरान मतदाता किसी उम्मीदवार की उम्र नहीं, बल्कि उसका अनुभव और उसके गुण-दोष देखते हैं.' प्रदेश के सबसे उम्रदराज उम्मीदवारों में 75 वर्षीय पूर्व कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया भी शामिल हैं.

'बाबाजी' के नाम से मशहूर कुसुमरिया को इस बार भी टिकट नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने बागी तेवर दिखाते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दो सीटों-दमोह और पथरिया से चुनाव लड़ा. सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठतम नेता बाबूलाल गौर (88) ने अपनी परंपरागत गोविंदपुरा सीट से इस बार भी ताल ठोंकने की इच्छा जताई थी. हालांकि, राजधानी भोपाल की इस सीट से बीजेपी ने उनके स्थान पर उनकी बहू कृष्णा गौर को चुनाव लड़ाया था.

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