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MP विधानसभा चुनाव: बीजेपी के प्रत्याशियों की लिस्ट पुराने चेहरों से नया इतिहास लिखने की कवायद?

बीजेपी की सूची को कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने पुरानी बोतल में नई शराब बताया है. वहीं बीजेपी के रजनीश अग्रवाल ने कहा कि जो जीत सकता है, उसे ही टिकट दिया गया है.

Updated On: Nov 02, 2018 04:14 PM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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MP विधानसभा चुनाव: बीजेपी के प्रत्याशियों की लिस्ट पुराने चेहरों से नया इतिहास लिखने की कवायद?
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तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश विधानसभा की 230 विधानसभा सीटों में से 177 सीट के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है. राज्य में चौथी बार सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने क्षेत्र और चेहरे को ही ध्यान में रखकर उम्मीदवारी तय की है. पार्टी ने न तो परिवारवाद से परहेज किया और न ही उम्र का कोई मापदंड लागू किया. जिन तीन मंत्रियों के टिकट काटे गए हैं, उनमें से दो के बेटों को उम्मीदवार बनाया गया है. सिर्फ नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ही खाली हाथ रही हैं. पार्टी ने उन्हें घर बिठा दिया है. ग्वालियर पूर्व की उनकी सीट पर सतीश सिकरवार को मैदान में उतारा गया है. पार्टी के इस फैसले से माया सिंह के समर्थक नाराज हैं. जहां है विवाद उन सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा रोकी गई

बीजेपी ने अपनी पहली सूची में 91 मौजूदा विधायकों के अलावा 22 उन चेहरों पर भी फिर दांव लगाया है जो कि विधानसभा का पिछला चुनाव हार गए थे. पार्टी को इंदौर जिले की नौ विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार तय करने में काफी दिक्कत आ रही है. इंदौर जिले में बीजेपी के कई कद्दावर नेता हैं. इनमें सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय प्रमुख हैं. सुमित्रा महाजन लोकसभा की अध्यक्ष हैं. कैलाश विजयवर्गीय, पार्टी के महासचिव हैं. दोनों ही नेता अपने-अपने पुत्रों को टिकट के लिए दबाव बना रहे हैं.

कैलाश विजयवर्गीय

कैलाश विजयवर्गीय

कैलाश विजयवर्गीय की ओर से यह बात भी सामने आई कि वे अपने पुत्र को टिकट दिलाने के लिए अपनी दावेदारी छोड़ने के लिए भी तैयार हैं. कैलाश विजयवर्गीय महू विधानसभा सीट से विधायक हैं. बताया जाता है कि वे अपने पुत्र आकाश विजयवर्गीय के लिए इंदौर की दो नबंर सीट से टिकट मांग रहे हैं. यहां उनके ही करीबी रमेश मेंदोला विधायक हैं. सुमित्रा महाजन ने बेटे मंदार महाजन के लिए इंदौर की तीन नंबर सीट से टिकट मांगा है.

इन दो टिकटों के कारण इंदौर की सभी नौ सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा रोक दी गई. इसी तरह भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र से भी पार्टी ने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर चुनाव लड़ते हैं. उम्र ज्यादा होने के कारण पार्टी गौर को चुनाव मैदान में नहीं उतारना चाहती. वे अपनी दावेदारी भी नहीं छोड़ रहे हैं. इसी तरह एक अन्य उम्रदारज मंत्री कुसुम सिंह मेहदेले की पन्ना सीट पर भी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है. सरताज सिंह की सीट सिवनी-मालवा को भी होल्ड पर रखा गया है.

लगभग दो साल पहले बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को 75 साल से अधिक की उम्र हो जाने के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रिमंडल से हटा दिया था. उसके बाद से ही दोनों नेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लगातार अपने निशाने पर लिए हुए थे. कुसुम सिंह मेहदेले को भी मुख्यमंत्री टिकट नहीं देना चाहते. उनकी उम्र भी सत्तर के पार हो गई है. इसके विपरीत पार्टी ने भिंड जिले की लहार विधानसभा सीट पर रसाल सिंह को उम्मीदवार बनाया है. इनकी उम्र भी सत्तर से ऊपर ही है. वे कांग्रेस के डॉ.गोविंद सिंह के मुकाबले में पिछला चुनाव हार गए थे.

भोपाल उत्तर की सीट को लेकर भी पार्टी उम्मीदवारी तय नहीं कर पा रही है. राज्य का ग्वालियर-चंबल संभाग सामाजिक समीकरणों के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जा रहा है. इस क्षेत्र में विधानसभा की कुल 34 सीटें हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह प्रभाव क्षेत्र है. एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ यहां बड़ा आंदोलन हो चुका है. बीएसपी का भी क्षेत्र में अच्छा-खासा वोट बैंक है.

narendra singh tomar

तस्वीर: नरेंद्र सिंह तोमर की फेसबुक की वाल से

पार्टी ने संभाग की अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है. मुरैना जिले की दिमनी सीट पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र देवेंद्र तोमर की दावेदारी के कारण इसे होल्ड पर रखा गया है. नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर से सांसद हैं. ग्वालियर जिले की भितरवार सीट को भी होल्ड पर रखा गया है. इस सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे सांसद अनूप मिश्रा दावेदारी कर रहे हैं. यह कांग्रेस के कब्जे वाली सीट है. अनूप मिश्रा यहां से पिछला चुनाव हार गए थे. मिश्रा अभी मुरैना से सांसद हैं.

भिंड जिले की दो सीट भिंड एवं मेहगांव पर भी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की गई है. मेहगांव से चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी विधायक हैं. उनके भाई राकेश चतुर्वेदी पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. इसके बदले में ही मुकेश चतुर्वेदी को मेहगांव से टिकट दी गई थी. राकेश चतुर्वेदी लंबे समय से अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे थे.

उनके पार्टी छोड़ने की चर्चाएं भी चल रही थीं. संभवत: इसी कारण भिंड और मेहगांव विधानसभा सीटों पर नामों की घोषणा नहीं की गई है. पार्टी को फैसला करना है कि दोनों भाइयों में से किसे टिकट दिया जाए? पिछले विधानसभा चुनाव में सुमावली से बीजेपी की टिकट पर जीते सतपाल सिंह सिकरवार ने अपने भाई सतीश सिकरवार को ग्वालियर पूर्व सीट से टिकट दिलाने के लिए अपनी दावेदारी छोड़ी थी. सतीश सिकरवार के कारण ही राज्य की नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह की टिकट कट गई. माया सिंह, स्वर्गीय विजयाराजे सिंधिया की भाभी हैं. केंद्र सरकार विजयाराजे सिंधिया की जन्मशती भी मना रही है.

सूची में परिवारवाद मजबूती से उभरा है

शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में वन मंत्री डॉ.गौरीशंकर शेजवार ने सूची जारी होने के बाद कहा कि मैंने पार्टी को पहले ही कह दिया था कि चुनाव नहीं लड़ना चाहता. शेजवार पिछले चार दशक से भी अधिक समय से रायसेन जिले की सांची सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. पार्टी ने उनके पुत्र मुदित को टिकट दिया है. शेजवार ने कहा कि वह उपयुक्त उम्मीदवार है. उन्होंने कहा कि पार्टी ने उसकी योग्यता को ध्यान में रखकर ही टिकट दिया है.

इसी तरह राज्य के उद्यानिकी मंत्री हर्ष सिंह के पुत्र विक्रम सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है. हर्ष सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे. केंद्रीय मंत्री थावरचंद्र गहलोत के पुत्र जितेन्द्र को आलोट से एक बार फिर पार्टी का टिकट दिया गया है. जितेन्द्र पिछली बार भी चुनाव जीते थे.

सागर के सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के पुत्र सुधीर यादव को सुरखी से उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी के दो पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी के बेटे पहले से ही विधायक हैं. उन्हें फिर से टिकट मिला है. पार्टी ने अपने दो मौजूदा सांसद नागेन्द्र सिंह और मनोहर ऊंटवाल को भी मैदान में उतारा है. नागेन्द्र सिंह को उनकी पुरानी सीट नागोद से उम्मीदवार बनाया गया है. पिछले चुनाव में हार की संभावनाओं के चलते ही नागेन्द्र सिंह ने चुनाव न लड़ने की घोषणा की थी. बाद में वे खजुराहो सीट से लोकसभा का चुनाव जीते थे.

देवास सांसद मनोहर ऊंटवाल को आगर सीट से टिकट दिया गया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ के प्रभाव क्षेत्र छिंदवाड़ा जिले की सीटों पर पार्टी ने पुराने चेहरों पर ज्यादा भरोसा जताया है. अमरवाड़ा की सीट पर पिछले चुनाव में उत्तर ठाकुर को टिकट दिया गया था. इस बार उनके पिता प्रेमनारायण ठाकुर को दिया गया है. इसी तरह सिरोंज विधानसभा की सीट पर पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है.

लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापमं घोटाले के आरोप में लंबे समय तक जेल में रहे हैं. पार्टी ने इस कारण उन्हें टिकट नहीं दिया. सिरोंज, विदिशा जिले में आता है. यह जिला मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत प्रभाव वाला क्षेत्र है. लक्ष्मीकांत शर्मा के परिवार से बाहर किसी को टिकट देकर पार्टी रिस्क नहीं लेना चाहती थी. विदिशा की सीट पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सबसे करीबी प्रमोद टंडन को टिकट मिला है.

मुख्यमंत्री की दूसरी सीट को लेकर सस्पेंस अब भी बरकरार

Shivraj Singh Chauhan's rally in Jabalpur Jabalpur: Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chauhan addresses a rally during his 'Jan Arashirvad Yatra' in Jabalpur, Thursday, Oct 25, 2018. (PTI Photo) (PTI10_25_2018_000119B)

पार्टी की पहली सूची जारी होने के बाद यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस बार विदिशा की सीट से भी चुनाव नहीं लड़ेंगे. पिछली बार वे बुधनी के साथ-साथ विदिशा सीट से भी चुनाव लड़े थे. बुधनी सीट से चौहान की उम्मीदवारी की घोषणा पार्टी ने कर दी है. विदिशा सीट पर भी उम्मीदवार घोषित हो गया है.

इसके बाद भी मुख्यमंत्री की दूसरी सीट को लेकर संस्पेंस बना हुआ है. चर्चा यह है कि अंतिम क्षणों में चौहान भोपाल की गोविंदपुरा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. पार्टी ने अपनी पहली सूची में जीत की संभावनाओं को ही ध्यान में रखकर कुछ मौजूदा विधायकों की सीटें बदली हैं. राज्यमंत्री ललिता यादव को मलहरा सीट से उम्मीदवार बनाया है. वे पिछला चुनाव छतरपुर से जीती थीं. इसी तरह अशोनगर के विधायक गोपीलाल जाटव को गुना सीट पर लड़ने भेजा है. भोपाल उत्तर की सीट मुस्लिम बाहुल्य सीट है. बीजेपी इस सीट पर लगातार हारती रही है. इस सीट पर पार्टी किसी नए चेहरे को उतारना चाहती है.

पार्टी की शुक्रवार को जारी की गई सूची में सोलह महिला उम्मीदवार हैं. इनमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर सात महिला हैं. नौ महिलाएं सामान्य वर्ग की सीटों पर उम्मीदवार बनाई गईं हैं. किसी अल्पसंख्यक का नाम नहीं है. बीजेपी की सूची को कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने पुरानी बोतल में नई शराब बताया है. वहीं बीजेपी के रजनीश अग्रवाल ने कहा कि जो जीत सकता है, उसे ही टिकट दिया गया है.

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